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ईद मिलन समारोह में दिखी गंगा जमुनी तहजीब
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वाराणसी। बुनकर बिरादराना तंजीम बावनी पंचायत की ओर से रविवार को रेवड़ी तालाब के जयनारायण इंटर कॉलेज में ईद मिलन समारोह, मुशायरा और कवि सम्मेलन हुआ। इसमें सभी धर्मों के प्रतिनिधियों ने प्यार और स्नेह का संदेश दिया। गंगा जमुनी तहजीब के बीच गंगा महासभा के महासचिव स्वामी जितेंद्रानंद, मुफ्ती ए बनारस मौलाना अब्दुल बातिन नौमानी, मौलाना हारून रशीद नक्शबंदी, मौलाना इश्तेयाक अंसारी, मैत्री भवन के निदेशक फादर चंद्रकांत, भाई धरमबीर सिंह आदि धर्मों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
युवा कवि सूरजमणि ने सुनाया ‘हम अपने घर में गीता रखते हैं, कुरान रखते हैं, दिलों में एकता की भावना, ईमान रखते हैं, हमें ना कोई बांटा है ना कोई बांट पाएगा, हम अपने दिल में सांसों में ये हिंदुस्तान रखते हैं... सुनाया तो हर कोई वाह वाह कहने से खुद को रोक ना सका।
प्रख्यात शायर मायल बनारसी ने शायरी सुनाई कि ‘जेहनसीब के उर्दू जबान धर्म है, लगे है जैसे के सारा जहान घर में है, ‘‘निफाक, खून, धूंआ, जख्म, टूटते रिश्ते, ये मेरा घर है कि हिन्दुस्तान धर्म है‘ सुनाकर खूब तालिया बटोरी। शायर सलीम रजा ने सुनाई ‘गुलजारें हिन्द में है कई रंगतो के फूल, शामिल हैं जिनकी खुशबू भजन में अजान में। डॉ. अख्तर मसूद ने ‘फर्क सुनने में पड़ा हो शायद, उसने कुछ और कहा हो शायद, सोच कर तर्के ताल्लुक कीजिए, उसके होंठो पें दुआ हो शायद‘ सुनाया। सिराज बनारसी ने ‘अब वादिए हरम से न फूटेगा नूरे हक, दश्ते हयात में तूही शम ए खलील है सुनाकर माहौल को कौमी एकता के सूत्र में बांधने का प्रयास किया।
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प्रख्यात कवि अनिल चौबे ने ‘नया नया टीवी जब घर में खरीदा गया हाथ में रिमोट ले पसर गये बाबूजी, चार बजे भोर से ही आस्था की नदी में धीरे धीरे करके उतर गये बाबू जी सुनाया तों समूचा मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। कार्यक्रम का संयोजन बावनी पंचायत के अध्यक्ष हाजी मोख्तार अहमद महतो ने किया। समारोह में बाईसी के सरदार हाजी अब्दुल कलाम, हाजी इकराद्दुीन, बारहों के सरदार हाजी हाशिम, चौदहों के सरदार हाजी हैदर, हाजी मकबूल हसन, पांचों के सरदार हाजी मुर्तजा आदि उपस्थित रहे। अतिथियों का स्वागत प्रख्यात उद्यमी केशव जालान एवं अहमद फैसल ने किया। संचालन एडवोकेट फिरदौसी एवं सलमान राशीद ने और धन्यवाद ज्ञापन निधिदेव अग्रवाल ने किया।
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युवा कवि सूरजमणि ने सुनाया ‘हम अपने घर में गीता रखते हैं, कुरान रखते हैं, दिलों में एकता की भावना, ईमान रखते हैं, हमें ना कोई बांटा है ना कोई बांट पाएगा, हम अपने दिल में सांसों में ये हिंदुस्तान रखते हैं... सुनाया तो हर कोई वाह वाह कहने से खुद को रोक ना सका।
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प्रख्यात शायर मायल बनारसी ने शायरी सुनाई कि ‘जेहनसीब के उर्दू जबान धर्म है, लगे है जैसे के सारा जहान घर में है, ‘‘निफाक, खून, धूंआ, जख्म, टूटते रिश्ते, ये मेरा घर है कि हिन्दुस्तान धर्म है‘ सुनाकर खूब तालिया बटोरी। शायर सलीम रजा ने सुनाई ‘गुलजारें हिन्द में है कई रंगतो के फूल, शामिल हैं जिनकी खुशबू भजन में अजान में। डॉ. अख्तर मसूद ने ‘फर्क सुनने में पड़ा हो शायद, उसने कुछ और कहा हो शायद, सोच कर तर्के ताल्लुक कीजिए, उसके होंठो पें दुआ हो शायद‘ सुनाया। सिराज बनारसी ने ‘अब वादिए हरम से न फूटेगा नूरे हक, दश्ते हयात में तूही शम ए खलील है सुनाकर माहौल को कौमी एकता के सूत्र में बांधने का प्रयास किया।
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प्रख्यात कवि अनिल चौबे ने ‘नया नया टीवी जब घर में खरीदा गया हाथ में रिमोट ले पसर गये बाबूजी, चार बजे भोर से ही आस्था की नदी में धीरे धीरे करके उतर गये बाबू जी सुनाया तों समूचा मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। कार्यक्रम का संयोजन बावनी पंचायत के अध्यक्ष हाजी मोख्तार अहमद महतो ने किया। समारोह में बाईसी के सरदार हाजी अब्दुल कलाम, हाजी इकराद्दुीन, बारहों के सरदार हाजी हाशिम, चौदहों के सरदार हाजी हैदर, हाजी मकबूल हसन, पांचों के सरदार हाजी मुर्तजा आदि उपस्थित रहे। अतिथियों का स्वागत प्रख्यात उद्यमी केशव जालान एवं अहमद फैसल ने किया। संचालन एडवोकेट फिरदौसी एवं सलमान राशीद ने और धन्यवाद ज्ञापन निधिदेव अग्रवाल ने किया।