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शव दफनाने के लिए दो पक्ष आमने सामने
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चंदौली। सदर कोतवाली के बसिला गांव में रविवार को शव दफनाने के दौरान एक ही समुदाय के दो पक्ष आमने सामने आ गए। जिससे गांव के तनाव की स्थिति बन गई। घंटों पंचायत के बाद भी शव दफनाया नहीं जा सका। सूचना मिलने के बाद पहुंची पुलिस ने दोनो पक्षों के लोगों को समझाने और लेखपाल के कब्रिस्तान की पैमाइश कराया। जिसके बाद एक पक्ष के लोग अपने कब्रिस्तान में शव को दफन करने पर राजी हुए। इसके बाद शव को दफन किया गया। इस दौरान गांव में भारी तादात में पुलिस बल तैनात रही।
बसिला निवासी सत्तार की रविवार की भोर में हृयद गति रुकने से मौत हो गई। परिवार के सदस्य सुबह शव को दफन करने के लिए गांव के बाहर स्थित कब्रिस्तान में पहुंचे और खुदाई शुरू की तो एक पक्ष के लोगों ने इसका विरोध करते हुए उन्हें रोक दिया और दूसरे कब्रिस्तान में दफन करने लिए वापस भेज दिया। जिसके बाद मृतक के पुत्र शेरु, लड्डू, और मुसर्रर गांव के ही दूसरे कब्रिस्तान में कब्र खोदने के लिए पहुंचे तो दूसरे बस्ती के लोगों ने भी उन्हें रोक दिया। जिसके बाद दोनो पक्ष आमने सामने आ गए। लेकिन सूचना पर दल बल के साथ पहुंच कोतवाल आशुतोष ओझा ने ग्रामीणों को समझा बुझाकर शांत कराया और हलका लेखपाल बजरंगबली विश्वकर्मा से कब्रिस्तान की पैमाइश कराया और कोने में शव को दफन करने के लिए सभी को राजी कर लिया। इसके बाद मृतक के शव को दफन कराया गया।
बसिला निवासी सत्तार की रविवार की भोर में हृयद गति रुकने से मौत हो गई। परिवार के सदस्य सुबह शव को दफन करने के लिए गांव के बाहर स्थित कब्रिस्तान में पहुंचे और खुदाई शुरू की तो एक पक्ष के लोगों ने इसका विरोध करते हुए उन्हें रोक दिया और दूसरे कब्रिस्तान में दफन करने लिए वापस भेज दिया। जिसके बाद मृतक के पुत्र शेरु, लड्डू, और मुसर्रर गांव के ही दूसरे कब्रिस्तान में कब्र खोदने के लिए पहुंचे तो दूसरे बस्ती के लोगों ने भी उन्हें रोक दिया। जिसके बाद दोनो पक्ष आमने सामने आ गए। लेकिन सूचना पर दल बल के साथ पहुंच कोतवाल आशुतोष ओझा ने ग्रामीणों को समझा बुझाकर शांत कराया और हलका लेखपाल बजरंगबली विश्वकर्मा से कब्रिस्तान की पैमाइश कराया और कोने में शव को दफन करने के लिए सभी को राजी कर लिया। इसके बाद मृतक के शव को दफन कराया गया।
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