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चैंपियंस ट्रॉफी: मेरठ में बने बल्लों से पाकिस्तान-दुबई में धूम मचा रहे बल्लेबाज, जानें कौन-कौन कर रहे इस्तेमाल
Tue, 04 Mar 2025 11:02 AM IST
मोहम्मद मुस्तकीम
आशुतोष भारद्वाज, मेरठ
आशुतोष भारद्वाज, मेरठ
Published by: मोहम्मद मुस्तकीम
Updated Tue, 04 Mar 2025 11:02 AM IST
सार
मेरठ में बन रहे क्रिकेट बैट की डिमांड विदेशों में बढ़ गई है। एशियन और यूरोपियन देशों में मेरठ के बल्ले पसंद किए जा रहे हैं। वहीं भारत के खिलाड़ी एसजी, एसएस के बल्ले पसंद कर रहे हैं।
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मेरठ की एक फैक्टरी में बनाए जाते बल्ले।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी में मेरठ के बल्लों से खूब चौके-छक्के लग रहे हैं। पाकिस्तान और दुबई में भारत, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, साउथ अफ्रीका, अफगानिस्तान के बल्लेबाजों की खूब बल्ले-बल्ले हो रही है। अंक तालिका में ग्रुप ए और बी में नंबर एक पर न्यूजीलैंड और साउथ अफ्रीका के खिलाड़ी इंग्लिश विलो से बने मेरठ के बल्लों को पसंद कर रहे हैं। भारत के खिलाड़ी एसजी, एसएस सहित अन्य कंपनियों के बल्लों से खेल रहे हैं।
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मेरठ की क्रिकेट का सामान बनाने वाली कंपनियों की डिमांड कोविड के बाद विदेशों में भी बढ़ गई है। एशियन और यूरोपियन देशों में मेरठ के बल्ले ही पसंद किए जा रहे हैं। इससे इनकी बिक्री बढ़ गई है। चैंपियंस ट्रॉफी में भारत के हार्दिक पंडिया, केएल राहुल, अक्षर पटेल, ऋषभ पंत, कुलदीप यादव, इंग्लैंड के जोफरा आर्चर, लिआम लिविंगस्टोन, मार्क वुड, अफगानिस्तान के हशमतुल्ला शाहिदी, अजमतुल्लाह, इब्राहिम जारदान, राशिद खान, सादिकुल्लाह अतल आदि खिलाड़ी मेरठ के एसजी, एसएस, पीआर के बल्लों से खेल रहे हैं।
चैंपियंस ट्राफी के बाद आईपीएल के लिए खरीदारी शुरू हो गई है।
चैंपियंस ट्राफी के बाद आईपीएल के लिए खरीदारी शुरू हो गई है।
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एसजी के सीनियर मैनेजर अनुराग वर्मा ने बताया कि कोविड के बाद से क्रिकेट उत्पाद और उपकरणों की मांग कई गुना बढ़ गई है। वर्ल्ड कप के बाद चैंपियंस ट्राफी और आईपीएल के लिए खरीद शुरू हो गई है। ज्यादातर खिलाड़ियों को उनके देश या जहां वह प्रैक्टिस कर रहे हैं, वहां माल भेजा गया।
विदेशों में तेजी से बढ़ रही मेरठ के खेल उत्पादों की मांग
पीआर कंपनी के डायरेक्टर सुमनेश अग्रवाल ने बताया कि चैपिंयंस ट्रॉफी में मेरठ के बल्ले छाए हुए हैं। शहर की कई कंपनियों ने बड़ा कारोबार किया है। एसजी, एसएस, पीआर, भल्ला इंटरनेशनल सहित खेल उपकरण और खेल उत्पाद निर्माता कंपनियों ने मेरठ के नाम को ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। आईआईए सहित अन्य औद्योगिक एसोसिएशन भी उद्योग को बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं।
पीआर कंपनी के डायरेक्टर सुमनेश अग्रवाल ने बताया कि चैपिंयंस ट्रॉफी में मेरठ के बल्ले छाए हुए हैं। शहर की कई कंपनियों ने बड़ा कारोबार किया है। एसजी, एसएस, पीआर, भल्ला इंटरनेशनल सहित खेल उपकरण और खेल उत्पाद निर्माता कंपनियों ने मेरठ के नाम को ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। आईआईए सहित अन्य औद्योगिक एसोसिएशन भी उद्योग को बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं।
15 मिनट में तैयार होता है शहर में बल्ला
बल्ला फैक्टरी संचालक क्षितिज अग्रवाल ने बताया कि जहां पहले एक बल्ले को बनाने में 2 घंटे का समय लगता था, अब 15 मिनट में बल्ला तैयार हो जाता है। फैक्टरी में सभी कार्य मशीनों से होते हैं। इसमें हैंडल कटिंग, क्लेफ्ट कटिंग, प्रेसिंग मशीन, रबिंग मशीन, हैंडल पर धागा चढ़ाने वाली मशीन आदि का प्रयोग होता है। हर कारीगर के काम भी बंटे रहते हैं। बिक्री और उत्पादन बढ़ने से मुनाफा भी बढ़ रहा है।
बल्ला फैक्टरी संचालक क्षितिज अग्रवाल ने बताया कि जहां पहले एक बल्ले को बनाने में 2 घंटे का समय लगता था, अब 15 मिनट में बल्ला तैयार हो जाता है। फैक्टरी में सभी कार्य मशीनों से होते हैं। इसमें हैंडल कटिंग, क्लेफ्ट कटिंग, प्रेसिंग मशीन, रबिंग मशीन, हैंडल पर धागा चढ़ाने वाली मशीन आदि का प्रयोग होता है। हर कारीगर के काम भी बंटे रहते हैं। बिक्री और उत्पादन बढ़ने से मुनाफा भी बढ़ रहा है।
क्लेफ्ट से बनता है 33.50 इंच का बल्ला
बल्ला फैक्टरी के मैनेजर रवि प्रभाकर ने बताया कि बल्ला बनाने के लिए लकड़ी का टुकड़ा क्लेफ्ट या बांगड़ की कटिंग की जाती है। इसके बाद इसमें हैंडल फंसाया जाता है। हैंडल सिंगापुरी केन, असम केन, अंडमान केन का होता है। सिंगापुर केन का सर्वोत्तम हैंडल होता है। तीन रबड़ या दो रबड़ हैंडल बीच लगाए जाते हैं। 33.50 इंच बल्ले की ऊंचाई होती है और सवा चार इंच चौड़ाई होती है। 11 इंच का हैंडल होता है। हैंडल की मोटाई 35 एमएम से 40 एमएम होती है।
बल्ला फैक्टरी के मैनेजर रवि प्रभाकर ने बताया कि बल्ला बनाने के लिए लकड़ी का टुकड़ा क्लेफ्ट या बांगड़ की कटिंग की जाती है। इसके बाद इसमें हैंडल फंसाया जाता है। हैंडल सिंगापुरी केन, असम केन, अंडमान केन का होता है। सिंगापुर केन का सर्वोत्तम हैंडल होता है। तीन रबड़ या दो रबड़ हैंडल बीच लगाए जाते हैं। 33.50 इंच बल्ले की ऊंचाई होती है और सवा चार इंच चौड़ाई होती है। 11 इंच का हैंडल होता है। हैंडल की मोटाई 35 एमएम से 40 एमएम होती है।
कारोबार सालाना वर्ष 2023-24 2024-25
स्पोर्ट्स कारोबार 770 करोड़ 800 करोड़
क्रिकेट खेल सामग्री 180 करोड़ 220 करोड़
फिटनेस उपकरण 300 करोड़ 350 करोड़
नोट - ये आंकड़े स्पोर्ट्स प्रमोशन काउंसिल व उद्यमियों से मिले हैं।
स्पोर्ट्स कारोबार 770 करोड़ 800 करोड़
क्रिकेट खेल सामग्री 180 करोड़ 220 करोड़
फिटनेस उपकरण 300 करोड़ 350 करोड़
नोट - ये आंकड़े स्पोर्ट्स प्रमोशन काउंसिल व उद्यमियों से मिले हैं।