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यूपी बोर्ड : 10 वीं, 12वीं के परीक्षा शुल्क के 4.86 करोड़ रुपये अटके
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यूपी बोर्ड : 10 वीं, 12वीं के परीक्षा शुल्क के 4.86 करोड़ रुपये अटके
बुलंदशहर। यूपी बोर्ड ने रिजल्ट तो घोषित कर दिया, लेकिन अभी तक छात्र-छात्राओं के परीक्षा शुल्क के बारे में कोई निर्णय नहीं लिया है। जिले के हाईस्कूल और इंटर के 88766 विद्यार्थियों ने परीक्षा शुल्क के लिए 4.86 करोड़ से अधिक की राशि जमा की थी। डीआईओएस के अनुसार अभी इस बारे में बोर्ड से कोई ऐसा आदेश प्राप्त नहीं हुआ है कि परीक्षा शुल्क वापस लिया जाएगा या नहीं।
कोरोना संक्रमण की वजह से शासन स्तर से परीक्षा को रद्द कर दिया गया था। साथ ही निर्णय लिया गया था कि अब परीक्षा नहीं होगी और छात्र-छात्राओं को बिना परीक्षा ही पास किया जाएगा। बोर्ड की परीक्षा में जनपद के 406 विद्यालयों से में 47426 और इंटर में 41340 छात्र-छात्रा रहे पंजीकृत हैं। इन सभी 88766 छात्र-छात्राओं की ओर से परीक्षा देने से पहले आवेदन करते समय परीक्षा शुल्क भी जमा करवाया गया था। परीक्षा शुल्क के तौर पर हाईस्कूल के विद्यार्थी से 501 रुपये और इंटरमीडिएट के छात्र-छात्राआें से 601 रुपये लिए थे।
हाईस्कूल के छात्रों की 23760426 रुपये और इंटर के छात्रों की 24845340 रुपये शामिल हैं। अब जबकि बिना परीक्षा कराए बोर्ड ने परीक्षा परिणाम जारी कर दिया, लेकिन अभी तक परीक्षा शुल्क वापस करने या न करने के बारे में कोई निर्णय नहीं लिया है। ऐसे में छात्र-छात्राओं के साथ उनके अभिभावकों को भी संशय बना हुआ है कि परीक्षा शुल्क वापस मिलेगा या नहीं।
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इस तरह परीक्षा शुल्क की राशि होती है खर्च
विभागीय अधिकारियों के अनुसार परीक्षा शुल्क की राशि परीक्षा के कामों में ही खर्च की जाती है। इस राशि से परीक्षाओं के लिए प्रश्नपत्र और आंसरशीट प्रिंट कराया जाता है। परीक्षा में ड्यूटी देने वाले अधीक्षक, उप अधीक्षक सहित परीक्षा पर तैनात स्टाफ को मानदेय देना होता है। पेपर चेकिंग के लिए पर्यवेक्षकों को मानदेय दिया जाता है। पेपरों को परीक्षा केंद्र पर छोड़ना और वापस लाना, रिजल्ट तैयार करने के लिए तैनात स्टाफ को मानदेय देना और इसके अलावा अन्य प्रकार के खर्च पर भी यह राशि खर्च की जाती है।
बोर्ड ही लेगा फैसला
परीक्षा शुल्क वापस होगा या नहीं। इसकी अभी मुझे जानकारी नहीं है। यह निर्णय बोर्ड की ओर से ही लिया जाएगा। इस बारे में मुझे अभी तक कोई आदेश भी प्राप्त नहीं हुआ है। जो भी आगे बोर्ड से आदेश प्राप्त होगा, उसका पालन किया जाएगा शिव कुमार ओझा, जिला विद्यालय निरीक्षक।
बोर्ड करेगा फैसला
बोर्ड की ओर से परीक्षा शुल्क परीक्षा कराने के लिए लिया जाता है। इस बार परीक्षा नहीं हुई और परीक्षा परिणाम भी घोषित हो गया। परीक्षा शुल्क वापस करने का निर्णय बोर्ड की ओर से ही लिया जाएगा। - प्रधानाचार्य, सीपी अग्रवाल।
शुल्क वापस करना चाहिए
इस बार कोरोना की वजह से परीक्षा नहीं हो सकी है। जबकि छात्र-छात्राओं से परीक्षा शुल्क लिया गया है। यदि परीक्षा शुल्क वापस कर दिया जाता है तो यह छात्र हित में रहेगा। अधिकतर छात्र गरीब परिवारों से संबंधित हैं।
- शिक्षक दिनेश कुमार।
वापस किया जाए शुल्क
इस बार कोरोना के चलते बच्चों की परीक्षा नहीं हो सकी है। जबकि परीक्षा का शुल्क लिया जा चुका है। ऐसे में बोर्ड को चाहिए कि बच्चों से लिए गए परीक्षा शुल्क को वापस किया जाए।
अभिभावक समय सिंह।
बोर्ड को शुल्क वापस करना चाहिए
जब परीक्षा ही नहीं हुई तो बोर्ड को परीक्षा शुल्क वापस करना चाहिए। इस ओर शासन को भी ध्यान देने की जरूरत है। शासन और बोर्ड को इस बारे में जल्द कोई निर्णय लेना चाहिए। - अभिभावक पिंटू चौहान।
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बुलंदशहर। यूपी बोर्ड ने रिजल्ट तो घोषित कर दिया, लेकिन अभी तक छात्र-छात्राओं के परीक्षा शुल्क के बारे में कोई निर्णय नहीं लिया है। जिले के हाईस्कूल और इंटर के 88766 विद्यार्थियों ने परीक्षा शुल्क के लिए 4.86 करोड़ से अधिक की राशि जमा की थी। डीआईओएस के अनुसार अभी इस बारे में बोर्ड से कोई ऐसा आदेश प्राप्त नहीं हुआ है कि परीक्षा शुल्क वापस लिया जाएगा या नहीं।
कोरोना संक्रमण की वजह से शासन स्तर से परीक्षा को रद्द कर दिया गया था। साथ ही निर्णय लिया गया था कि अब परीक्षा नहीं होगी और छात्र-छात्राओं को बिना परीक्षा ही पास किया जाएगा। बोर्ड की परीक्षा में जनपद के 406 विद्यालयों से में 47426 और इंटर में 41340 छात्र-छात्रा रहे पंजीकृत हैं। इन सभी 88766 छात्र-छात्राओं की ओर से परीक्षा देने से पहले आवेदन करते समय परीक्षा शुल्क भी जमा करवाया गया था। परीक्षा शुल्क के तौर पर हाईस्कूल के विद्यार्थी से 501 रुपये और इंटरमीडिएट के छात्र-छात्राआें से 601 रुपये लिए थे।
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हाईस्कूल के छात्रों की 23760426 रुपये और इंटर के छात्रों की 24845340 रुपये शामिल हैं। अब जबकि बिना परीक्षा कराए बोर्ड ने परीक्षा परिणाम जारी कर दिया, लेकिन अभी तक परीक्षा शुल्क वापस करने या न करने के बारे में कोई निर्णय नहीं लिया है। ऐसे में छात्र-छात्राओं के साथ उनके अभिभावकों को भी संशय बना हुआ है कि परीक्षा शुल्क वापस मिलेगा या नहीं।
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इस तरह परीक्षा शुल्क की राशि होती है खर्च
विभागीय अधिकारियों के अनुसार परीक्षा शुल्क की राशि परीक्षा के कामों में ही खर्च की जाती है। इस राशि से परीक्षाओं के लिए प्रश्नपत्र और आंसरशीट प्रिंट कराया जाता है। परीक्षा में ड्यूटी देने वाले अधीक्षक, उप अधीक्षक सहित परीक्षा पर तैनात स्टाफ को मानदेय देना होता है। पेपर चेकिंग के लिए पर्यवेक्षकों को मानदेय दिया जाता है। पेपरों को परीक्षा केंद्र पर छोड़ना और वापस लाना, रिजल्ट तैयार करने के लिए तैनात स्टाफ को मानदेय देना और इसके अलावा अन्य प्रकार के खर्च पर भी यह राशि खर्च की जाती है।
बोर्ड ही लेगा फैसला
परीक्षा शुल्क वापस होगा या नहीं। इसकी अभी मुझे जानकारी नहीं है। यह निर्णय बोर्ड की ओर से ही लिया जाएगा। इस बारे में मुझे अभी तक कोई आदेश भी प्राप्त नहीं हुआ है। जो भी आगे बोर्ड से आदेश प्राप्त होगा, उसका पालन किया जाएगा शिव कुमार ओझा, जिला विद्यालय निरीक्षक।
बोर्ड करेगा फैसला
बोर्ड की ओर से परीक्षा शुल्क परीक्षा कराने के लिए लिया जाता है। इस बार परीक्षा नहीं हुई और परीक्षा परिणाम भी घोषित हो गया। परीक्षा शुल्क वापस करने का निर्णय बोर्ड की ओर से ही लिया जाएगा। - प्रधानाचार्य, सीपी अग्रवाल।
शुल्क वापस करना चाहिए
इस बार कोरोना की वजह से परीक्षा नहीं हो सकी है। जबकि छात्र-छात्राओं से परीक्षा शुल्क लिया गया है। यदि परीक्षा शुल्क वापस कर दिया जाता है तो यह छात्र हित में रहेगा। अधिकतर छात्र गरीब परिवारों से संबंधित हैं।
- शिक्षक दिनेश कुमार।
वापस किया जाए शुल्क
इस बार कोरोना के चलते बच्चों की परीक्षा नहीं हो सकी है। जबकि परीक्षा का शुल्क लिया जा चुका है। ऐसे में बोर्ड को चाहिए कि बच्चों से लिए गए परीक्षा शुल्क को वापस किया जाए।
अभिभावक समय सिंह।
बोर्ड को शुल्क वापस करना चाहिए
जब परीक्षा ही नहीं हुई तो बोर्ड को परीक्षा शुल्क वापस करना चाहिए। इस ओर शासन को भी ध्यान देने की जरूरत है। शासन और बोर्ड को इस बारे में जल्द कोई निर्णय लेना चाहिए। - अभिभावक पिंटू चौहान।