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जुलाई में प्रसव होना है, अल्ट्रासाउंड के लिए अगस्त में मिल रही तारीख
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जुलाई में प्रसव होना है, अल्ट्रासाउंड के लिए अगस्त में मिल रही तारीख
बुलंदशहर। सरकारी अस्पतालों में मरीजों का समय पर अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहा है। यहां तक कि गर्भवती महिलाओं को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। एक महिला का प्रसव जुलाई में होना है और उसे अल्ट्रासाउंड कराने की तारीख अगस्त में दी गई है। पथरी, इंफेक्शन व अन्य मरीजों को भी डेढ़ महीने बाद अल्ट्रासाउंड कराने की तारीख मिल रही है।
जिला अस्पताल, जिला महिला अस्पताल, जटिया चिकित्सालय खुर्जा, संयुक्त चिकित्सालय सिकंदराबाद, 100 बेड राजकीय चिकित्सालय डिबाई और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शिकारपुर में अल्ट्रासाउंड की मशीन लगी हुई है। सिर्फ जिला महिला अस्पताल व जिला अस्पताल की मशीन ही चालू है, बाकी जगह रेडियोलॉजिस्ट न होने से मशीनें धूल फांक रही हैं। जिला अस्पताल और जिला महिला अस्पताल में भी अल्ट्रासाउंड की संख्या निर्धारित कर दी गई है। इस कारण प्रतीक्षा सूची लंबी हो गई है। इससे मरीजों का मर्ज बढ़ रहा है। पूरे जिले में छह स्वीकृत पद के सापेक्ष मात्र दो पद पर तैनाती है, दो को अटैच किया हुआ है। रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती न होने का खामियाजा मरीजों और गर्भवती महिलाओं को उठाना पड़ रहा है।
ये है स्थिति
केस-1
अगस्त की दे दी तिथि
ऊंचागांव निवासी पुष्पादेवी ने बताया कि उनकी देवरानी नीतू का प्रसव जुलाई माह में होना है। जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराने के लिए कहा गया तो चिकित्सक ने अगस्त माह की तारीख दे दी। उन्होंने बताया कि मजबूरी में अब प्राइवेट चिकित्सक के यहां पर अल्ट्रासाउंड कराएंगे। आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण सरकारी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराने के लिए गए थे।
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केस-2
मिल रही तारीख पर तारीख
कलोली गांव निवासी महिला सुमाइला ने बताया कि उनकी पुत्रवधू का अल्ट्रासाउंड होना है। वह जिला महिला अस्पताल के पिछले 15 दिनों से चक्कर लगा रही हैं, लेकिन चिकित्सक उन्हें तारीख पर तारीख दिए जा रहे हैं। उसकी तबीयत भी बिगड़ रही है। इतने पैसे नहीं हैं कि निजी चिकित्सक के यहां उपचार करा सकें।
केस-3
बिना अल्ट्रासाउंड कराए महिला को लौटाया
रबूपुरा निवासी माया देवी ने बताया कि उनके पेट में इंफेक्शन व अन्य समस्या भी है। चिकित्सक ने महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड लिखा, लेकिन वहां पर काफी इंतजार के बाद नहीं किया गया। बिना अल्ट्रासाउंड कराए ही वापस जाना पड़ा।
केस- 4
गांव सराय निवासी कुंवरपाल ने बताया कि पेटदर्द लगातार होने पर चिकित्सक ने अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी है। जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराने के लिए आया तो यहां अगस्त में आने को कहा गया है। अब मजबूरी में प्राइवेट सेंटर पर कराएंगे।
निजी सेंटरों पर कोई दर निर्धारित नहीं
सरकारी चिकित्सालयों में जहां एक रुपये के पर्चे पर अल्ट्रासाउंड निशुल्क किए जाते हैं। जिले में करीब 58 निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर है। यहां पर अल्ट्रासाउंड कराने के लिए कोई दर निर्धारित नहीं है। किसी जगह छह सौ रुपये लिए जा रहे है तो किसी जगह एक हजार रुपये। अधिकांश अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर प्रशिक्षित स्टाफ की जगह अप्रशिक्षित स्टॉफ से अल्ट्रासाउंड कराए जा रहे हैं।
जिले में रेडियोलॉजिस्ट की कमी है। इस वजह से समस्या बन रही है। यदि तारीख पर तारीख दी जा रही है तो इसकी जांच कराई जाएगी। निजी केंद्रों की भी समय-समय पर जांच की जा रही है। - डॉ. विनय कुमार सिंह, सीएमओ
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बुलंदशहर। सरकारी अस्पतालों में मरीजों का समय पर अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहा है। यहां तक कि गर्भवती महिलाओं को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। एक महिला का प्रसव जुलाई में होना है और उसे अल्ट्रासाउंड कराने की तारीख अगस्त में दी गई है। पथरी, इंफेक्शन व अन्य मरीजों को भी डेढ़ महीने बाद अल्ट्रासाउंड कराने की तारीख मिल रही है।
जिला अस्पताल, जिला महिला अस्पताल, जटिया चिकित्सालय खुर्जा, संयुक्त चिकित्सालय सिकंदराबाद, 100 बेड राजकीय चिकित्सालय डिबाई और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शिकारपुर में अल्ट्रासाउंड की मशीन लगी हुई है। सिर्फ जिला महिला अस्पताल व जिला अस्पताल की मशीन ही चालू है, बाकी जगह रेडियोलॉजिस्ट न होने से मशीनें धूल फांक रही हैं। जिला अस्पताल और जिला महिला अस्पताल में भी अल्ट्रासाउंड की संख्या निर्धारित कर दी गई है। इस कारण प्रतीक्षा सूची लंबी हो गई है। इससे मरीजों का मर्ज बढ़ रहा है। पूरे जिले में छह स्वीकृत पद के सापेक्ष मात्र दो पद पर तैनाती है, दो को अटैच किया हुआ है। रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती न होने का खामियाजा मरीजों और गर्भवती महिलाओं को उठाना पड़ रहा है।
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केस-1
अगस्त की दे दी तिथि
ऊंचागांव निवासी पुष्पादेवी ने बताया कि उनकी देवरानी नीतू का प्रसव जुलाई माह में होना है। जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराने के लिए कहा गया तो चिकित्सक ने अगस्त माह की तारीख दे दी। उन्होंने बताया कि मजबूरी में अब प्राइवेट चिकित्सक के यहां पर अल्ट्रासाउंड कराएंगे। आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण सरकारी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराने के लिए गए थे।
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केस-2
मिल रही तारीख पर तारीख
कलोली गांव निवासी महिला सुमाइला ने बताया कि उनकी पुत्रवधू का अल्ट्रासाउंड होना है। वह जिला महिला अस्पताल के पिछले 15 दिनों से चक्कर लगा रही हैं, लेकिन चिकित्सक उन्हें तारीख पर तारीख दिए जा रहे हैं। उसकी तबीयत भी बिगड़ रही है। इतने पैसे नहीं हैं कि निजी चिकित्सक के यहां उपचार करा सकें।
केस-3
बिना अल्ट्रासाउंड कराए महिला को लौटाया
रबूपुरा निवासी माया देवी ने बताया कि उनके पेट में इंफेक्शन व अन्य समस्या भी है। चिकित्सक ने महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड लिखा, लेकिन वहां पर काफी इंतजार के बाद नहीं किया गया। बिना अल्ट्रासाउंड कराए ही वापस जाना पड़ा।
केस- 4
गांव सराय निवासी कुंवरपाल ने बताया कि पेटदर्द लगातार होने पर चिकित्सक ने अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी है। जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराने के लिए आया तो यहां अगस्त में आने को कहा गया है। अब मजबूरी में प्राइवेट सेंटर पर कराएंगे।
निजी सेंटरों पर कोई दर निर्धारित नहीं
सरकारी चिकित्सालयों में जहां एक रुपये के पर्चे पर अल्ट्रासाउंड निशुल्क किए जाते हैं। जिले में करीब 58 निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर है। यहां पर अल्ट्रासाउंड कराने के लिए कोई दर निर्धारित नहीं है। किसी जगह छह सौ रुपये लिए जा रहे है तो किसी जगह एक हजार रुपये। अधिकांश अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर प्रशिक्षित स्टाफ की जगह अप्रशिक्षित स्टॉफ से अल्ट्रासाउंड कराए जा रहे हैं।
जिले में रेडियोलॉजिस्ट की कमी है। इस वजह से समस्या बन रही है। यदि तारीख पर तारीख दी जा रही है तो इसकी जांच कराई जाएगी। निजी केंद्रों की भी समय-समय पर जांच की जा रही है। - डॉ. विनय कुमार सिंह, सीएमओ