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दौका के किसान ने टमाटर की खेती से कमाया अच्छा मुनाफा
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गांव दौका स्थित किसान के पॉली हाउस में टमाटर की फसल।
- फोटो : BULANDSHAHR
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दानपुर ब्लॉक क्षेत्र के गांव दौका निवासी किसान हेम कुमार ने नए ढंग से टमाटर और खीरे की खेती करके अच्छा मुनाफा कमाया है। एक एकड़ में करीब पांच लाख खर्च करके उन्होंने औसतन दस लाख रुपये की कीमत तक का उत्पादन लिया है। इसके लिए उन्होेंने पॉली हाउस बनाया और सब्सिडी का भी लाभ उठाया।
गांव दौका निवासी किसान हेम कुमार ने बताया कि अधिक लाभ नहीं मिलता देख उनका परंपरागत खेती से मोह भी भंग होने लगा। कुछ समय पहले उन्हें पॉली हाउस में उगाई जाने वाली सब्जियों से अधिक आमदनी की जानकारी मिली। इस पर जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय से संपर्क किया और शासन से मिलने वाली सब्सिडी पर पॉली हाउस बनाकर उसमें सब्जियों की खेती करने का मन बनाया। विभागीय अफसरों की सलाह पर एक एकड़ जमीन पर पॉली हाउस तैयार किया। इस पर 50 लाख रुपये से अधिक का खर्च आया। जबकि शासन से पॉली हाउस के लिए 40 लाख रुपये पर ही 50 फीसदी सब्सिडी मिली। इसके बाद पॉली हाउस में पहले टमाटर और खीरे की फसल उगाने की शुरूआत की। साथ ही उत्पाद को दिल्ली में सप्लाई के लिए संपर्क किया।
पॉली हाउस में तीन तरह की प्रजाति के टमाटर उगाए। इनमें माईला, हेम शिखर और आरका रक्षक प्रजाति को चुना, जिसकी सबसे अधिक मांग रहती है। टमाटर और खीरे की फसल में की गई मेहनत रंग लाने लगी। फसल भी अच्छी हुई और दिल्ली में मांग भी की जाने लगी। इससे अधिक मुनाफा भी ठीक मिलने लगा। अब स्थिति यह है कि हेम सिंह टमाटर और खीरे की मांग के मुताबिक सप्लाई नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में इस टमाटर और खीरे की फसल का रकबा बढ़ाने के साथ अभी और सब्जी उगाने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पॉली हाउस में उगाई जाने वाली फसल से जहां उत्पादन अधिक होता है। वहीं, मेहनत कम और लाभ भी अधिक मिलने के साथ पानी की भी अधिक जरूरत नहीं रहती है।
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एक एकड़ में आता है पांच लाख का खर्च
किसान हेम कुमार ने बताया कि टमाटर की एक एकड़ में फसल करने पर करीब पांच लाख का खर्च आता और आठ से दस लाख का मुनाफा कमाया जा सकता है। इसी तरह खीरे की फसल को उगाने पर करीब चार लाख का खर्च आता है और यह फसल एक बार लगाने के बाद दो बार ली जाती है। एक बार की फसल में सात से आठ लाख यानि दो बार की फसल मे 15 लाख के आसपास मुनाफा लिया जा सकता है। टमाटर और खीरे के रंग को भी बरकरार रखना होता है। यदि इनमें चमक और क्वालिटी अच्छी होगी तो भी भाव अच्छा मिल पाता है। किसान के अनुसार अभी तक दोनों फसलों से लागत की राशि प्राप्त कर ली है। अब मुनाफे का पता पूरी फसल बिकने के बाद ही चलेगा।
दूसरे किसान भी कर संपर्क, जान रहे तकनीक
किसान हेम कुमार ने बताया कि मेरे द्वारा पॉली हाउस में की जा रही टमाटर और खीरे की फसल को देखकर दूसरे किसान भी संपर्क कर रहे हैं। साथ ही किसान पॉली हाउस में खेती करने की तकनीक को भी जान रहे हैं। कई ऐसे किसान भी हैं, जो अब पॉली हाउस बनाकर इसी तरह की फसल करने की तैयारी भी कर रहे हैं।
विभाग दे रहा प्रोत्साहन
किसान हेम कुमार के पॉली हाउस में टमाटर और खीरे की फसल अच्छी होने के साथ आमदनी भी दे रही है। विभाग की ओर से समय-समय पर इसका निरीक्षण किया जाता है। साथ ही किसान को और बेहतर फसल करने की जानकारी दी जा रही है। पॉली हाउस में सब्जी और फूलों आदि की खेती करना किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रही हैं। - डॉ. धीरेंद्र सिंह, जिला उद्यान अधिकारी
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गांव दौका निवासी किसान हेम कुमार ने बताया कि अधिक लाभ नहीं मिलता देख उनका परंपरागत खेती से मोह भी भंग होने लगा। कुछ समय पहले उन्हें पॉली हाउस में उगाई जाने वाली सब्जियों से अधिक आमदनी की जानकारी मिली। इस पर जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय से संपर्क किया और शासन से मिलने वाली सब्सिडी पर पॉली हाउस बनाकर उसमें सब्जियों की खेती करने का मन बनाया। विभागीय अफसरों की सलाह पर एक एकड़ जमीन पर पॉली हाउस तैयार किया। इस पर 50 लाख रुपये से अधिक का खर्च आया। जबकि शासन से पॉली हाउस के लिए 40 लाख रुपये पर ही 50 फीसदी सब्सिडी मिली। इसके बाद पॉली हाउस में पहले टमाटर और खीरे की फसल उगाने की शुरूआत की। साथ ही उत्पाद को दिल्ली में सप्लाई के लिए संपर्क किया।
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पॉली हाउस में तीन तरह की प्रजाति के टमाटर उगाए। इनमें माईला, हेम शिखर और आरका रक्षक प्रजाति को चुना, जिसकी सबसे अधिक मांग रहती है। टमाटर और खीरे की फसल में की गई मेहनत रंग लाने लगी। फसल भी अच्छी हुई और दिल्ली में मांग भी की जाने लगी। इससे अधिक मुनाफा भी ठीक मिलने लगा। अब स्थिति यह है कि हेम सिंह टमाटर और खीरे की मांग के मुताबिक सप्लाई नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में इस टमाटर और खीरे की फसल का रकबा बढ़ाने के साथ अभी और सब्जी उगाने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पॉली हाउस में उगाई जाने वाली फसल से जहां उत्पादन अधिक होता है। वहीं, मेहनत कम और लाभ भी अधिक मिलने के साथ पानी की भी अधिक जरूरत नहीं रहती है।
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एक एकड़ में आता है पांच लाख का खर्च
किसान हेम कुमार ने बताया कि टमाटर की एक एकड़ में फसल करने पर करीब पांच लाख का खर्च आता और आठ से दस लाख का मुनाफा कमाया जा सकता है। इसी तरह खीरे की फसल को उगाने पर करीब चार लाख का खर्च आता है और यह फसल एक बार लगाने के बाद दो बार ली जाती है। एक बार की फसल में सात से आठ लाख यानि दो बार की फसल मे 15 लाख के आसपास मुनाफा लिया जा सकता है। टमाटर और खीरे के रंग को भी बरकरार रखना होता है। यदि इनमें चमक और क्वालिटी अच्छी होगी तो भी भाव अच्छा मिल पाता है। किसान के अनुसार अभी तक दोनों फसलों से लागत की राशि प्राप्त कर ली है। अब मुनाफे का पता पूरी फसल बिकने के बाद ही चलेगा।
दूसरे किसान भी कर संपर्क, जान रहे तकनीक
किसान हेम कुमार ने बताया कि मेरे द्वारा पॉली हाउस में की जा रही टमाटर और खीरे की फसल को देखकर दूसरे किसान भी संपर्क कर रहे हैं। साथ ही किसान पॉली हाउस में खेती करने की तकनीक को भी जान रहे हैं। कई ऐसे किसान भी हैं, जो अब पॉली हाउस बनाकर इसी तरह की फसल करने की तैयारी भी कर रहे हैं।
विभाग दे रहा प्रोत्साहन
किसान हेम कुमार के पॉली हाउस में टमाटर और खीरे की फसल अच्छी होने के साथ आमदनी भी दे रही है। विभाग की ओर से समय-समय पर इसका निरीक्षण किया जाता है। साथ ही किसान को और बेहतर फसल करने की जानकारी दी जा रही है। पॉली हाउस में सब्जी और फूलों आदि की खेती करना किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रही हैं। - डॉ. धीरेंद्र सिंह, जिला उद्यान अधिकारी