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...तो गबन की रकम को डकारने को मिटाए गए थे साक्ष्य
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...तो गबन की रकम को डकारने को मिटाए गए थे साक्ष्य
बुलंदशहर। पावर कॉरपोरेशन के 56 लाख के गबन मामले में एक के बाद एक खुलासे होते जा रहे हैं। प्रकरण की जांच के दौरान विजिलेंस की टीम को काफी परेशानी उठानी पड़ी। अधिकारिक सूत्रों के अनुसार जांच से भटकाने के लिए दस्तावेजों को भी गायब कर दिया गया। जससे साफ होता है कि आरोपियों द्वारा गबन की रकम डकारने के लिए साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ भी की गई। आधे-अधूरे दस्तावेजों के सहारे ही विजिलेंस की टीम आरोपियों तक पहुंच सकी और कार्रवाई शुरू हुई।
पावर कॉरपोरेशन में वर्ष 2016 में घोटाले की बात सामने आने के बाद अफसरों में हड़कंप मच गया था। उस समय जनपद के अफसरों ने जांच आदि कर मामले को रफा दफा कर दिया। बाद में पूरे प्रकरण की विजिलेंस जांच शुरू हुई। अब जनपद में तैनात तत्कालीन लेखाकार संतोष कुमार का एक पत्र सामने आया है जो वर्ष 2017 में चंदंौसी में तैनाती के दौरान उन्होंने वरिष्ठ अफसरों को लिखा था। पत्र में बताया गया है कि रजिस्टर के आधार पर सभी का कैश जमा होता था। और रशीद काटी जाती थी। साथ ही पत्र में यह भी बताया गया है कि दो कर्मचारी राजकुमार टीजी-टू और अनुज वार्ष्णेय द्वारा पैसा जमा नहीं किया गया। इसके अलावा हेड कैशियर विनीत कुमार शर्मा द्वारा मनवीर सिंह को अपना चार्ज हस्तागत नहीं कराने की बात कही गई। इस बीच कमेटी गठित कर हेड कैशियर के कमरे का ताला तोड़कर मनवीर सिंह को चार्ज हस्तागत करना बताया गया। लेकिन जब भी उनसे रिकार्ड की बारे में वार्ता की जाती थी तो वह चार्ज हस्तगत न होने की बात कहते रहे। लेखाकार ने यह भी बताया कि शमन शुल्क की काफी धनराशि बैंक में जमा है। बैंक के अनुसार वह 1.80 करोड़ ऋणात्मक चल रही है। जिसका रजिस्टर, स्टेटमेंट मनवीर सिंह के पास है। पूरे मामले की जांच में सामने आया कि बैंक चालान के हिसाब से रसीद नहीं काटी गई। उन्होंने अपने चार्ज से हटने के बाद किसी को चार्ज नहीं देने की बात कही। जिससे अभिलेखों के साथ छेड़छाड़ का अंदेशा भी जताया जा रहा है।
नहीं कराई अलमारी के ताला तोड़ने की वीडियोग्राफी
विभागीय अफसरों की मानें तो विनीत कुमार शर्मा उस समय हेड कैशियर थे। इस बीच उनके भाई का एक्सीडेंट हो गया और उसकी मौत हो गई थी। जिस वजह से वह करीब 14 दिन कार्यालय में नहीं आए थे। उस समय सारे दस्तावेज वह अपनी अलमारी में रख गए थे। आरोप है कि इस बीच किसी अन्य ने चार्ज लिया और कमेटी तो बनाई थी, लेकिन अलमारी तोड़ने की वीडियोग्राफी नहीं कराई थी। जबकि वीडियोग्राफी कराना बहुत जरूरी होता है। वर्तमान में कार्यालय सहायक के रूप में हापुड़ में तैनात मनवीर सिंह ने बताया कि जांच कमेटी बनाकर ही ताला तोड़ा गया था। सभी अभिलेख अधिकारियों की देखरेख में ही निकाले गए।
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गबन के मामले में डिबाई एक्सईएन की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज हो गई है। रिपोर्ट एमडी ऑफिस भेजी जा रही है। इसके बाद आगे की जांच होगी।
आरपीएस तोमर, चीफ इंजीनियर
फाइल खंगालने में जुटे निलंबित अफसर
56 लाख रुपये के गबन के आरोपी अब अपनी फाइलें खंगालने में जुट गए हैं। मामले में मदद के लिए बिजली के आलाधिकारियों से वार्ता कर रहे है। बुधवार को निलंबित एसई आरके सिंह और तत्कालीन एसडीओ डिबाई को हाईडिल कॉलोनी स्थित बिजली अफसरों के कार्यालय में चक्कर लगाते देखा गया है। कर्मियों की मानें तो निलंबित एसई आरके सिंह चीफ इंजीनियर कार्यालय पर भी पहुंचे और वहां अपनी मदद की गुहार लगाई। लेकिन वहां से उन्हें निराश ही वापस लौटना पड़ा था। वहीं, बताया जा रहा है कि तत्कालीन डिबाई एसडीओ को भी अफसरों के कार्यालय में घूमते देखा गया है। उधर, चीफ इंजीनियर आरपीएस तोमर ने बताया कि आरके सिंह मिले थे, लेकिन उन्होंने इस मामले में बात करने के लिए स्पष्ट मना कर दिया।
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बुलंदशहर। पावर कॉरपोरेशन के 56 लाख के गबन मामले में एक के बाद एक खुलासे होते जा रहे हैं। प्रकरण की जांच के दौरान विजिलेंस की टीम को काफी परेशानी उठानी पड़ी। अधिकारिक सूत्रों के अनुसार जांच से भटकाने के लिए दस्तावेजों को भी गायब कर दिया गया। जससे साफ होता है कि आरोपियों द्वारा गबन की रकम डकारने के लिए साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ भी की गई। आधे-अधूरे दस्तावेजों के सहारे ही विजिलेंस की टीम आरोपियों तक पहुंच सकी और कार्रवाई शुरू हुई।
पावर कॉरपोरेशन में वर्ष 2016 में घोटाले की बात सामने आने के बाद अफसरों में हड़कंप मच गया था। उस समय जनपद के अफसरों ने जांच आदि कर मामले को रफा दफा कर दिया। बाद में पूरे प्रकरण की विजिलेंस जांच शुरू हुई। अब जनपद में तैनात तत्कालीन लेखाकार संतोष कुमार का एक पत्र सामने आया है जो वर्ष 2017 में चंदंौसी में तैनाती के दौरान उन्होंने वरिष्ठ अफसरों को लिखा था। पत्र में बताया गया है कि रजिस्टर के आधार पर सभी का कैश जमा होता था। और रशीद काटी जाती थी। साथ ही पत्र में यह भी बताया गया है कि दो कर्मचारी राजकुमार टीजी-टू और अनुज वार्ष्णेय द्वारा पैसा जमा नहीं किया गया। इसके अलावा हेड कैशियर विनीत कुमार शर्मा द्वारा मनवीर सिंह को अपना चार्ज हस्तागत नहीं कराने की बात कही गई। इस बीच कमेटी गठित कर हेड कैशियर के कमरे का ताला तोड़कर मनवीर सिंह को चार्ज हस्तागत करना बताया गया। लेकिन जब भी उनसे रिकार्ड की बारे में वार्ता की जाती थी तो वह चार्ज हस्तगत न होने की बात कहते रहे। लेखाकार ने यह भी बताया कि शमन शुल्क की काफी धनराशि बैंक में जमा है। बैंक के अनुसार वह 1.80 करोड़ ऋणात्मक चल रही है। जिसका रजिस्टर, स्टेटमेंट मनवीर सिंह के पास है। पूरे मामले की जांच में सामने आया कि बैंक चालान के हिसाब से रसीद नहीं काटी गई। उन्होंने अपने चार्ज से हटने के बाद किसी को चार्ज नहीं देने की बात कही। जिससे अभिलेखों के साथ छेड़छाड़ का अंदेशा भी जताया जा रहा है।
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नहीं कराई अलमारी के ताला तोड़ने की वीडियोग्राफी
विभागीय अफसरों की मानें तो विनीत कुमार शर्मा उस समय हेड कैशियर थे। इस बीच उनके भाई का एक्सीडेंट हो गया और उसकी मौत हो गई थी। जिस वजह से वह करीब 14 दिन कार्यालय में नहीं आए थे। उस समय सारे दस्तावेज वह अपनी अलमारी में रख गए थे। आरोप है कि इस बीच किसी अन्य ने चार्ज लिया और कमेटी तो बनाई थी, लेकिन अलमारी तोड़ने की वीडियोग्राफी नहीं कराई थी। जबकि वीडियोग्राफी कराना बहुत जरूरी होता है। वर्तमान में कार्यालय सहायक के रूप में हापुड़ में तैनात मनवीर सिंह ने बताया कि जांच कमेटी बनाकर ही ताला तोड़ा गया था। सभी अभिलेख अधिकारियों की देखरेख में ही निकाले गए।
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आरपीएस तोमर, चीफ इंजीनियर
फाइल खंगालने में जुटे निलंबित अफसर
56 लाख रुपये के गबन के आरोपी अब अपनी फाइलें खंगालने में जुट गए हैं। मामले में मदद के लिए बिजली के आलाधिकारियों से वार्ता कर रहे है। बुधवार को निलंबित एसई आरके सिंह और तत्कालीन एसडीओ डिबाई को हाईडिल कॉलोनी स्थित बिजली अफसरों के कार्यालय में चक्कर लगाते देखा गया है। कर्मियों की मानें तो निलंबित एसई आरके सिंह चीफ इंजीनियर कार्यालय पर भी पहुंचे और वहां अपनी मदद की गुहार लगाई। लेकिन वहां से उन्हें निराश ही वापस लौटना पड़ा था। वहीं, बताया जा रहा है कि तत्कालीन डिबाई एसडीओ को भी अफसरों के कार्यालय में घूमते देखा गया है। उधर, चीफ इंजीनियर आरपीएस तोमर ने बताया कि आरके सिंह मिले थे, लेकिन उन्होंने इस मामले में बात करने के लिए स्पष्ट मना कर दिया।