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पब्लिक ने दिए गर्म कपड़े, साहब ने फिंकवाए
अमर उजाला/बुलंदशहर
Updated Tue, 20 Dec 2016 11:37 PM IST
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नुमाइश मैदान में कपड़े बिखरे पड़े डोनेट पुराने कपड़े।
- फोटो : ब्यूरो
आम आदमी ने गरीब बच्चों को ठंड से बचाने के लिए इस उम्मीद के साथ पुराने कपड़े प्रशासन को डोनेट किए कि सर्दी में गरीब का तन ढक जाएगा। मगर सरकारी मशीनरी ने ऐसा नहीं किया। कपड़े जमा जरूर किए, मगर गरीबों को बांटने की बजाय इनको नुमाइश मैदान में फिकवा दिया।
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मशीनरी की उदासीनता से गरीब का अपमान तो हुआ ही, उन लोगों का जज्बा भी आहत हुआ, जिन्होंने कपड़े डोनेट किए थे। डीएम आंजनेय कुमार सिंह ने नगर पालिका चेयरमैन और सिटी मजिस्ट्रेट को पुराने कपड़े जमा कराने की जिम्मेदारी दी थी। नुमाइश के बैरन हॉल में कलेक्शन सेंटर बनाया गया था।
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लोगों ने सैकड़ों जोड़ी कपड़े डोनेट किए, ताकि सर्दी में गरीबों का तन ढक जाए। मगर सरकारी मशीनरी ने जो किया वह इंसानियत को शर्मसार करने वाला है। अफसर और कर्मचारियों ने गरीबों को कपड़े बांटने की बजाय नुमाइश मैदान में फेंक दिए। डीएम ने जब योजना शुरू की थी तो पुराने कपड़ों को ड्राईक्लीन कराकर गरीब बच्चों में बांटने का दावा किया गया था।
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किसी को नहीं पता था कि गरीबों के लिए शुरू की गई इस पहल का हाल ऐसा होगा। दूसरी ओर लोगों का कहना है कि गरीबों को ठंड से बचाने के लिए पुराने कपड़े डोनेट किए गए थे। कपड़े डोनेट करते समय प्रसन्नता का अनुभव हुआ था। बताया गया था कि नगर पालिका इन्हें ड्राईक्लीन कराकर गरीबों को बांटेगी।
नगर पालिका के ईओ से जवाब मांगा गया है। कपड़े क्यों फेंके गए, इसका उनको जवाब देना ही होगा। सिटी मजिस्ट्रेट के तबादले के बाद कुछ दिक्कत आई हैं, ऐसा ईओ ने मौखिक रुप से बताया भी है।-आंजनेय कुमार सिंह डीएम, बुलंदशहर