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Bulandshahar News: गर्मी से बीपी के मरीजों में बढ़ रही सांस फूलने की शिकायत
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खुर्जा। बढ़ती गर्मी से बीपी के मरीजों में सांस फूलने और चक्कर आने की शिकायत आ रही है। चिकित्सक मरीजों को दवाओं का सेवन करने के साथ दोपहर में बाहर नहीं निकलने की सलाह दे रहे हैं।
खुर्जा के जटिया अस्पताल में रोजाना बीपी के बढ़ने और कम होने की परेशानी के करीब 70-75 मरीज रोजाना आ रहे हैं। अस्पताल के फिजिशियन डॉ. दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि गर्मी में बीपी के मरीजों की परेशानी बढ़ जाती है। दो महीने पहले जहां रोजाना 20 से 30 मरीज आ रहे थे, वहीं अब यह संख्या 70 से अधिक पहुंच रही है।
बताया कि गर्मी में शरीर में पानी की कमी होने पर बीपी बढ़ने या कम होने की संभावना रहती है। इसलिए शरीर में पानी की मात्रा का संतुलित करने के लिए पेय पदार्थ का सेवन ज्यादा करना चाहिए। पिछले एक सप्ताह से बीपी के मरीजों में सांस फूलने, घबराहट या चक्कर आने और भूख नहीं लगने की शिकायत देखने को मिल रही हैं। रक्तदाब भी ऊपर-नीचे हो रहा है।
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बताया कि शरीर में रक्तदाब न्यूनतम 80 और अधिकतम 120- 130 होना चाहिए। इससे ऊपर-नीचे होने पर बीपी का खतरा बढ़ जाता है। यदि समय से उपचार नहीं दिया जाता तो हृदय घात की संभावना बढ़ जाती है। डॉ. दिनेश कुमार सिंह का कहना है कि पिछले चार दिन में लगभग 10-12 ऐसे भी मरीज आए हैं, जिनकी तबीयत ज्यादा खराब होने पर उनको अस्पताल में भर्ती कराया गया।
इसके अलावा दो मरीजों को हायर सेंटर भी रेफर किया गया। गर्मी के मौसम में बीपी के मरीजों को दवाओं के साथ परहेज का भी ध्यान रखना जरूरी है। अनावश्यक दोपहर के वक्त घर या कार्यालय से बाहर नहीं जाना चाहिए। नारियल पानी का सेवन जरूर करें।
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खुर्जा के जटिया अस्पताल में रोजाना बीपी के बढ़ने और कम होने की परेशानी के करीब 70-75 मरीज रोजाना आ रहे हैं। अस्पताल के फिजिशियन डॉ. दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि गर्मी में बीपी के मरीजों की परेशानी बढ़ जाती है। दो महीने पहले जहां रोजाना 20 से 30 मरीज आ रहे थे, वहीं अब यह संख्या 70 से अधिक पहुंच रही है।
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बताया कि गर्मी में शरीर में पानी की कमी होने पर बीपी बढ़ने या कम होने की संभावना रहती है। इसलिए शरीर में पानी की मात्रा का संतुलित करने के लिए पेय पदार्थ का सेवन ज्यादा करना चाहिए। पिछले एक सप्ताह से बीपी के मरीजों में सांस फूलने, घबराहट या चक्कर आने और भूख नहीं लगने की शिकायत देखने को मिल रही हैं। रक्तदाब भी ऊपर-नीचे हो रहा है।
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बताया कि शरीर में रक्तदाब न्यूनतम 80 और अधिकतम 120- 130 होना चाहिए। इससे ऊपर-नीचे होने पर बीपी का खतरा बढ़ जाता है। यदि समय से उपचार नहीं दिया जाता तो हृदय घात की संभावना बढ़ जाती है। डॉ. दिनेश कुमार सिंह का कहना है कि पिछले चार दिन में लगभग 10-12 ऐसे भी मरीज आए हैं, जिनकी तबीयत ज्यादा खराब होने पर उनको अस्पताल में भर्ती कराया गया।
इसके अलावा दो मरीजों को हायर सेंटर भी रेफर किया गया। गर्मी के मौसम में बीपी के मरीजों को दवाओं के साथ परहेज का भी ध्यान रखना जरूरी है। अनावश्यक दोपहर के वक्त घर या कार्यालय से बाहर नहीं जाना चाहिए। नारियल पानी का सेवन जरूर करें।