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Bulandshahar News: जलवायु परिवर्तन पर गाजियाबाद व गुरुग्राम में होगा अध्ययन
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गाजियाबाद। जलवायु परिवर्तन पर अध्ययन के लिए देश के दो जिलों गाजियाबाद और गुरुग्राम में केंद्र सरकार की तरफ से प्रदूषण से हो रही बीमारियों की निगरानी शुरू की जाएगी। नेशनल प्रोग्राम ऑन क्लाइमेट चेंज एंड ह्यूमन हेल्थ (एनपीसीसीएचएच) के तहत वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार की तरफ से उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद व हरियाणा में गुरुग्राम से नए कार्य का प्रारंभिक प्रयोग (पॉयलट प्रोजेक्ट) शुरू किया जाएगा। दोनों जिलों में एक्यूआई बढ़ने पर केंद्र सरकार की ओर से अलर्ट जारी किया जाएगा। प्रोजेक्ट सफल होने पर देश के अन्य जिलों में भी योजना लागू की जाएगी।
सोमवार को केंद्र सरकार की टीम ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ सीएमओ कार्यालय में बैठक की। जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. आरके गुप्ता ने बताया कि मौसम में परिवर्तन और जलवायु प्रदूषण को लेकर केंद्र सरकार की ओर से देशभर में कार्यक्रम शुरू किया जाना है। देश में एनसीआर सबसे ज्यादा वायु प्रदूषण वाला क्षेत्र है। बैठक में शामिल गोरखपुर एम्स के शोध अधिकारी डॉ. आनंद दीक्षित ने बताया कि वायु प्रदूषण बढ़ने पर कुछ बीमारियां भी बढ़ती हैं। जिनमें सांस, आंख और दिल की बीमारियां मुख्य हैं। प्रदूषण बढ़ने पर इन मरीजों की संख्या बढ़ने की निगरानी की जाएगी।
इसके लिए गाजियाबाद के तीनों बड़े अस्पतालों के साथ ही सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और ईएसआई अस्पताल में प्रदूषण बढ़ने के दौरान उससे प्रभावित होकर भर्ती होने वाले मरीजों की निगरानी की जाएगी। दिल्ली स्थित राष्ट्रीय गैर संचारी रोग विभाग के डॉ. अनिकेत ने बताया कि इसके लिए केंद्र स्तर पर पोर्टल भी बनाया जा रहा है। मरीजों की सूचना पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा, इससे डाटा बैंक तैयार किया जाएगा कि वायु प्रदूषण से कितने प्रतिशत लोग प्रभावित हो रहे हैं। इसके साथ ही दोनों जिलों में वायु प्रदूषण बढ़ने पर उसकी रोकथाम के लिए भी व्यवस्था करने के निर्देश दिए जाएंगे। इसकी जिम्मेदारी प्रशासन और स्थानीय निकायों की होगी।
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केंद्र सरकार से मिलेगा अलर्ट
डीएसओ ने बताया कि गाजियाबाद में वायु की गुणवत्ता खराब होने पर केंद्र सरकार की ओर से प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट भेजा जाएगा। इस अलर्ट के बाद जिले में वायु की गुणवत्ता के सुधार के लिए सभी तरह के प्रयास किए जाएंगे। वायु की गुणवत्ता का मानक क्या होगा, यह भी केंद्र की ओर से निर्धारित किया जाएगा। जिले में चार स्थानों पर एक्यूआई की मॉनीटरिंग की जा रही है। बैठक में राज्य मुख्यालय परामर्शदाता अमित गिरी, एसीएमओ डॉ. अमित विक्रम व डॉ. चरण सिंह, सीएमएस डॉ. मनोज कुमार चतुर्वेदी, डॉ. विनोद चंद्र पांडेय सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
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सोमवार को केंद्र सरकार की टीम ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ सीएमओ कार्यालय में बैठक की। जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. आरके गुप्ता ने बताया कि मौसम में परिवर्तन और जलवायु प्रदूषण को लेकर केंद्र सरकार की ओर से देशभर में कार्यक्रम शुरू किया जाना है। देश में एनसीआर सबसे ज्यादा वायु प्रदूषण वाला क्षेत्र है। बैठक में शामिल गोरखपुर एम्स के शोध अधिकारी डॉ. आनंद दीक्षित ने बताया कि वायु प्रदूषण बढ़ने पर कुछ बीमारियां भी बढ़ती हैं। जिनमें सांस, आंख और दिल की बीमारियां मुख्य हैं। प्रदूषण बढ़ने पर इन मरीजों की संख्या बढ़ने की निगरानी की जाएगी।
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इसके लिए गाजियाबाद के तीनों बड़े अस्पतालों के साथ ही सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और ईएसआई अस्पताल में प्रदूषण बढ़ने के दौरान उससे प्रभावित होकर भर्ती होने वाले मरीजों की निगरानी की जाएगी। दिल्ली स्थित राष्ट्रीय गैर संचारी रोग विभाग के डॉ. अनिकेत ने बताया कि इसके लिए केंद्र स्तर पर पोर्टल भी बनाया जा रहा है। मरीजों की सूचना पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा, इससे डाटा बैंक तैयार किया जाएगा कि वायु प्रदूषण से कितने प्रतिशत लोग प्रभावित हो रहे हैं। इसके साथ ही दोनों जिलों में वायु प्रदूषण बढ़ने पर उसकी रोकथाम के लिए भी व्यवस्था करने के निर्देश दिए जाएंगे। इसकी जिम्मेदारी प्रशासन और स्थानीय निकायों की होगी।
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केंद्र सरकार से मिलेगा अलर्ट
डीएसओ ने बताया कि गाजियाबाद में वायु की गुणवत्ता खराब होने पर केंद्र सरकार की ओर से प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट भेजा जाएगा। इस अलर्ट के बाद जिले में वायु की गुणवत्ता के सुधार के लिए सभी तरह के प्रयास किए जाएंगे। वायु की गुणवत्ता का मानक क्या होगा, यह भी केंद्र की ओर से निर्धारित किया जाएगा। जिले में चार स्थानों पर एक्यूआई की मॉनीटरिंग की जा रही है। बैठक में राज्य मुख्यालय परामर्शदाता अमित गिरी, एसीएमओ डॉ. अमित विक्रम व डॉ. चरण सिंह, सीएमएस डॉ. मनोज कुमार चतुर्वेदी, डॉ. विनोद चंद्र पांडेय सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।