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ग्रामीणों के ताने पर मां-बाप ने घर से निकाला, बेटी ने राष्ट्रीय खेल में किया नाम रोशन

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 09 Oct 2022 10:18 PM IST
सार

ग्रामीणों के ताने पर मां-बाप ने घर से निकाला, बेटी ने राष्ट्रीय खेल में किया नाम रोशनबुलंदशहर।वर्ष 2018 में ठीक होने के बाद फिर से बॉक्सिंग में हाथ आजमाने लगीं।आर्थिक स्थिति ठीक न होने के बावजूद वह हालातों से जूझती रही और अपनी प्रैक्टिस जारी रखी।

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विस्तार

ग्रामीणों के ताने पर मां-बाप ने घर से निकाला, बेटी ने राष्ट्रीय खेल में किया नाम रोशन
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बुलंदशहर। जो लोग सफर में अकेले चलने का हौसला रखते हैं एक दिन काफिला उनके पीछे चलता है। यह शायरी सदर तहसील क्षेत्र निवासी बॉक्सर रिंकी शर्मा पर सटीक बैठती है। जिसका खेलकूद में मन होने पर गांव के लोग स्पोर्ट्स ड्रेस पहनने पर ताना मारते थे। माता-पिता द्वारा रिश्ता तोड़े जाने पर रिंकी ने हार नहीं मानी और तहेरे भाई-बहनों की मदद से अपना खेल जारी रखा। बीते दिन रिंकी ने 36वें राष्ट्रीय खेल में बीमार होने के बावजूद प्रतिस्पर्धा खेल विश्व चैंपियन पदक विजेता से तीनों राउंड खेला। हालांकि पदक जीतने से चूक गईं।
सदर तहसील क्षेत्र के गांव गिनोरा जननादार निवासी राम कुमार शर्मा की पुत्री रिंकी शर्मा को आठ वर्ष की उम्र से खेलने का शौक था और शुरुआत में कुश्ती खेलती थीं। इसके बाद उनकी दिलचस्पी बॉक्सिंग में बढ़ गई। उन्होंने कुश्ती खेलना छोड़ दिया और बॉक्सिंग सीखने के लिए बुलंदशहर के स्टेडियम में आना शुरू कर दिया। गांव से स्टेडियम आने-जाने के दौरान करीब 60 किमी का सफर वह प्रतिदिन साइकिल से करती थीं। इस दौरान स्पोर्ट्स ड्रेस (लोवर-टीशर्ट) पहने जाने पर गांव के लोग उन्हें ताना देते थे जो उसे नागवार गुजरता था। उन्होंने ग्रामीणों के ताना मारने को दरकिनार करते हुए प्रैक्टिस जारी रखी और वर्ष 2014 में राज्य स्तर बॉक्सिंग में छह स्वर्ण पदक जीते। वर्ष 2016 में रिंकी को ब्रेन हेमरेज हो गया और दो वर्ष तक वह अपना इलाज कराती रहीं। वर्ष 2018 में ठीक होने के बाद फिर से बॉक्सिंग में हाथ आजमाने लगीं। ग्रामीणों द्वारा ताना मारना बंद नहीं किया और माता-पिता से शिकायत किए जाने पर माता-पिता ने रिंकी से नाता तोड़ दिया। आज वह राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभाग करके जिले का नाम रोशन करने का प्रयास कर रही हैं। दो दिन पूर्व अहमदाबाद में आयोजित हो रहे 36वें राष्ट्रीय खेल के दौरान क्वाटर फाइनल में रिंकी का मुकाबला विश्व चैंपियन पदक विजेता सिमरनजीत कौर से हुआ। इस दौरान बीमार रहने के बावजूद रिंकी ने तीनों राउंड खेले। यहां तक के सफर को पार करने पर तहेरे भाई-बहनों ने रिंकी की हौसलाअफजाई की है।
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2019 में छोड़ा था गांव
बॉक्सर रिंकी शर्मा के तहेरे भाई कपिल शर्मा ने बताया कि माता-पिता के ठुकराने के बाद रिंकी द्वारा कोई गलत कदम नहीं उठा लिया जाए, इसके लिए उसकी मदद करना शुरू किया। बताया कि बहन नीलम शर्मा और भाई रविंद्र शर्मा के सहयोग से उसे अलीगढ़ में एक कमरा दिलवाने के साथ प्रशिक्षण दिलवाना शुरू किया। आर्थिक स्थिति ठीक न होने के बावजूद वह हालातों से जूझती रही और अपनी प्रैक्टिस जारी रखी। हालांकि रिंकी ने आर्थिक मदद के लिए जिलाधिकारी से लेकर बॉक्सिंग एसोसिएशन के पदाधिकारियों से मदद की गुहार लगाई लेकिन कोई आगे नहीं आया। ऐसे में हम तीन भाई-बहनों की मदद से उसका बॉक्सिंग में सफर जारी है। बताया कि राष्ट्रीय खेल में प्रतिभाग करने से पूर्व वह बीमार हो गई थी।
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माता-पिता द्वारा नाता तोड़े जाने का आज भी है दुख
अहमदाबाद में प्रतिभाग करने के दौरान बॉक्सर खिलाड़ी रिंकी शर्मा ने मोबाइल पर बातचीत के दौरान बताया कि उन्हें आज भी अपने माता-पिता द्वारा महज स्पोर्ट्स ड्रेस पहने जाने पर नाता तोड़े जाने का दुख है। उन्होंने कुश्ती के बाद बॉक्सिंग में अपना करियर दिखा। जिसे पूरा करने में जुट गईं। बताया कि दिसंबर माह में होने वाली सीनियर बॉक्सिंग चैंपियनशिप में चयन हो गया है। इसके लिए वह तैयारियां कर रही हैं।
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