{"_id":"ac617e7a3e10cebc47e64e01b65fd092","slug":"sp-made-the-former-minister-narendra-bhati-candidate-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुलायम ने दोस्ती को दी अहमियत ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मुलायम ने दोस्ती को दी अहमियत
अमर उजाला, बुलंदशहर
Updated Tue, 02 Feb 2016 11:39 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बुलंदशहर-गौतमबुद्धनगर स्थानीय निकाय विधान परिषद चुनाव में समाजवादी पार्टी से टिकट हासिल करने में कई दिग्गजों को मायूसी मिली है।
सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने दोस्ती को अहमियत दी है और अपने साथी पूर्व मंत्री नरेंद्र भाटी को टिकट दिया है। दिलचस्प बात यह है कि नेताजी ने संबंधों के आगे संगठन की तरफ से भेजे गए पैनल को भी दरकिनार कर दिया।
सदस्य विधान परिषद (एमएलसी) का यह चुनाव तीन मार्च को होगा। इसके लिए चुनाव आयोग ने कार्यक्रम घोषित कर दिया है। सत्ताबल और धनबल के नाम से जाने 3वाले इस चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी में टिकट हासिल करने की होड़ थी।
लंबे वक्त से जोरआजमाइश चल रही थी। दावेदारों के साक्षात्कार हुए थे। 2010 में हुए चुनाव में बसपा की सरकार के रहते अनिल अवाना ने ठाकुर सुनील सिंह को परजित किया था।
विज्ञापन
इस बार ठाकुर सुनील सिंह के अलावा जिलाध्यक्ष दिनेश गुर्जर, सुजात आलम, हरेंद्र यादव, बलबीर भाटी, ठाकुर महेश, फकीरचंद नागर, ऋषिपाल अवाना आदि कई दूसरे दावेदार थे।
ठाकुर सुनील सिंह को प्रमुख दावेदार माना जा रहा था। पूर्व मंत्री नरेंद्र भाटी अपने बेटे के लिए भी टिकट मांग रहे थे। लेकिन मंगलवार पूर्व मंत्री नरेंद्र भाटी का नाम ऐेलान कर दिया गया।
हरेंद्र यादव के जिला पंचायत अध्यक्ष बनने और एमएलसी के लिए दावेदारी खत्म होने के कारण भी नरेंद्र भाटी की राह ज्यादा आसान हो गई।
जिलाध्यक्ष दिनेश गुर्जर को कई गुर्जर नेता ही नहीं प्रत्याशी बनता देखना नहीं चाह रहे थे। 2011 में विधान परिषद का चुनाव लड़े ठाकुर सुनील सिंह खुद को टिकट नहीं मिलने से खफा नजर आए। उन्होंने तल्ख लहजे में कहा कि बुलंदशहर का इस सीट पर हक था।
टिकट मांगने का हक हर कार्यकर्ता का है। हाईकमान किसी एक को ही प्रत्याशी बना सकता है। अधिकृत प्रत्याशी को जिताने के लिए संगठन काम करेगा। -दिनेश गुर्जर, जिलाध्यक्ष, सपा
विज्ञापन
सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने दोस्ती को अहमियत दी है और अपने साथी पूर्व मंत्री नरेंद्र भाटी को टिकट दिया है। दिलचस्प बात यह है कि नेताजी ने संबंधों के आगे संगठन की तरफ से भेजे गए पैनल को भी दरकिनार कर दिया।
सदस्य विधान परिषद (एमएलसी) का यह चुनाव तीन मार्च को होगा। इसके लिए चुनाव आयोग ने कार्यक्रम घोषित कर दिया है। सत्ताबल और धनबल के नाम से जाने 3वाले इस चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी में टिकट हासिल करने की होड़ थी।
विज्ञापन
लंबे वक्त से जोरआजमाइश चल रही थी। दावेदारों के साक्षात्कार हुए थे। 2010 में हुए चुनाव में बसपा की सरकार के रहते अनिल अवाना ने ठाकुर सुनील सिंह को परजित किया था।
विज्ञापन
इस बार ठाकुर सुनील सिंह के अलावा जिलाध्यक्ष दिनेश गुर्जर, सुजात आलम, हरेंद्र यादव, बलबीर भाटी, ठाकुर महेश, फकीरचंद नागर, ऋषिपाल अवाना आदि कई दूसरे दावेदार थे।
ठाकुर सुनील सिंह को प्रमुख दावेदार माना जा रहा था। पूर्व मंत्री नरेंद्र भाटी अपने बेटे के लिए भी टिकट मांग रहे थे। लेकिन मंगलवार पूर्व मंत्री नरेंद्र भाटी का नाम ऐेलान कर दिया गया।
हरेंद्र यादव के जिला पंचायत अध्यक्ष बनने और एमएलसी के लिए दावेदारी खत्म होने के कारण भी नरेंद्र भाटी की राह ज्यादा आसान हो गई।
जिलाध्यक्ष दिनेश गुर्जर को कई गुर्जर नेता ही नहीं प्रत्याशी बनता देखना नहीं चाह रहे थे। 2011 में विधान परिषद का चुनाव लड़े ठाकुर सुनील सिंह खुद को टिकट नहीं मिलने से खफा नजर आए। उन्होंने तल्ख लहजे में कहा कि बुलंदशहर का इस सीट पर हक था।
टिकट मांगने का हक हर कार्यकर्ता का है। हाईकमान किसी एक को ही प्रत्याशी बना सकता है। अधिकृत प्रत्याशी को जिताने के लिए संगठन काम करेगा। -दिनेश गुर्जर, जिलाध्यक्ष, सपा