{"_id":"6856e8173ac4524bd703a851","slug":"solar-panels-damaged-in-a-storm-a-month-ago-still-not-repaired-bulandshahr-news-c-133-1-bul1006-135973-2025-06-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bulandshahar News: एक माह पहले आंधी में टूटे सोलर पैनल, अब तक नहीं हुई मरम्मत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bulandshahar News: एक माह पहले आंधी में टूटे सोलर पैनल, अब तक नहीं हुई मरम्मत
विज्ञापन
ऊर्जा निगम के तृतीय परिक्षण खंड और हाईडिल बिजलीघर की छत पर टूटे पड़े सोलर पैनल
बुलंदशहर। बिजली उत्पादन को बढ़ावा देने और सरकारी कार्यालयों में अधिक से अधिक यूनिट उत्पादन के लिए लगाए गए सोलर पैनल करीब एक माह पहले आंधी में क्षतिग्रस्त हो गए। इनकी अब तक मरम्मत नहीं कराई गई है।
अधिकारियों की लापरवाही का आलम यह है कि करीब पांच करोड़ रुपये खर्च कर लगाए गए सोलर पैनल के लिए जीआई सामग्री लगाई जानी थी लेकिन इसे लोहे की पतली एंगल पर लगा दिया गया। आंधी में एंगल के साथ पैनल भी टूट गए। अब बिजलीघरों के साथ अन्य कार्यालयों पर लगे सोलर पैनल से बिजली उत्पादन ठप है। पैनल से प्रतिदिन औसतन दो हजार से अधिक यूनिट का बिजली उत्पादन होना था।
पिछले माह जिले में आई तेज आंधी से ऊर्जा निगम के अधिकारियों के कार्यालय के साथ बिजलीघरों की छतों पर लगे सोलर पैनल को उखाड़ दिया। पैनल के टूटने से न केवल जिले में करीब पांच करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, बल्कि बिजली उत्पादन को भी झटका लगा है।
विज्ञापन
राधानगर निवासी धर्मेंद्र ने बताया कि घरों पर लगाए गए सोलर पैनल को आंधी से कोई नुकसान नहीं हुआ, लेकिन सरकारी कार्यालय पर लगे पैनल बिखर गए। इससे साफ है कि पैनल लगाने के दौरान गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया। बुगरासी निवासी जावेद ने बताया कि जितनी धनराशि से एक घर में पैनल लगता है, उतनी ही धनराशि से सरकारी कार्यालय में पैनल लगाए गए। इसके बाद भी गुणवत्ता इतनी खराब है कि पैनल एक साल भी ठीक से नहीं चल पाए।
विभिन्न स्थानों पर लगाए गए थे सोलर पैनल : बिजलीघर, अधिकारियों के कार्यालय पर बिजली के खर्च के लिए ऑनग्रिड सोलर पैनल लगाए गए थे। इन पैनल से उत्पादित बिजली का कार्यालयों में प्रयोग किया जाना था। इस दौरान नगर के हाइडिल कालोनी स्थित मुख्य अभियंता कार्यालय, अधीक्षण अभियंता कार्यालय, अधिशासी अभियंता कार्यालय, हाईडिल काॅलोनी बिजलीघर, वलीपुरा बिजलीघर समेत शहर के अन्य बिजलीघरों के साथ चोला, खानपुर, औरंगाबाद, बुगरासी, शिकारपुर, डिबाई, नरौरा, खुर्जा, सिकंदराबाद समेत जिले के करीब 100 बिजलीघर पर सोलर पैनल लगाए गए थे।
वर्तमान में स्थिति यह है कि मुख्य अभियंता कार्यालय पर तो सोलर पैनल ठीक स्थिति में हैं, लेकिन अन्य स्थानों पर पैनल टूटे पड़े हैं। गुणवत्ता का दावा करने वाले अधिकारियों ने कहीं लोहे की एंगल तो कहीं पतले स्ट्रक्चर पर ही पैनल रखवा दिए। जिसके चलते आंधी के मौसम में यह पूरी तरह बिखर गए।
विज्ञापन
अधिकारियों की लापरवाही का आलम यह है कि करीब पांच करोड़ रुपये खर्च कर लगाए गए सोलर पैनल के लिए जीआई सामग्री लगाई जानी थी लेकिन इसे लोहे की पतली एंगल पर लगा दिया गया। आंधी में एंगल के साथ पैनल भी टूट गए। अब बिजलीघरों के साथ अन्य कार्यालयों पर लगे सोलर पैनल से बिजली उत्पादन ठप है। पैनल से प्रतिदिन औसतन दो हजार से अधिक यूनिट का बिजली उत्पादन होना था।
विज्ञापन
पिछले माह जिले में आई तेज आंधी से ऊर्जा निगम के अधिकारियों के कार्यालय के साथ बिजलीघरों की छतों पर लगे सोलर पैनल को उखाड़ दिया। पैनल के टूटने से न केवल जिले में करीब पांच करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, बल्कि बिजली उत्पादन को भी झटका लगा है।
विज्ञापन
राधानगर निवासी धर्मेंद्र ने बताया कि घरों पर लगाए गए सोलर पैनल को आंधी से कोई नुकसान नहीं हुआ, लेकिन सरकारी कार्यालय पर लगे पैनल बिखर गए। इससे साफ है कि पैनल लगाने के दौरान गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया। बुगरासी निवासी जावेद ने बताया कि जितनी धनराशि से एक घर में पैनल लगता है, उतनी ही धनराशि से सरकारी कार्यालय में पैनल लगाए गए। इसके बाद भी गुणवत्ता इतनी खराब है कि पैनल एक साल भी ठीक से नहीं चल पाए।
विभिन्न स्थानों पर लगाए गए थे सोलर पैनल : बिजलीघर, अधिकारियों के कार्यालय पर बिजली के खर्च के लिए ऑनग्रिड सोलर पैनल लगाए गए थे। इन पैनल से उत्पादित बिजली का कार्यालयों में प्रयोग किया जाना था। इस दौरान नगर के हाइडिल कालोनी स्थित मुख्य अभियंता कार्यालय, अधीक्षण अभियंता कार्यालय, अधिशासी अभियंता कार्यालय, हाईडिल काॅलोनी बिजलीघर, वलीपुरा बिजलीघर समेत शहर के अन्य बिजलीघरों के साथ चोला, खानपुर, औरंगाबाद, बुगरासी, शिकारपुर, डिबाई, नरौरा, खुर्जा, सिकंदराबाद समेत जिले के करीब 100 बिजलीघर पर सोलर पैनल लगाए गए थे।
वर्तमान में स्थिति यह है कि मुख्य अभियंता कार्यालय पर तो सोलर पैनल ठीक स्थिति में हैं, लेकिन अन्य स्थानों पर पैनल टूटे पड़े हैं। गुणवत्ता का दावा करने वाले अधिकारियों ने कहीं लोहे की एंगल तो कहीं पतले स्ट्रक्चर पर ही पैनल रखवा दिए। जिसके चलते आंधी के मौसम में यह पूरी तरह बिखर गए।