{"_id":"5883a3e64f1c1bfa7aeffa12","slug":"singh-reached-the-pinnacle-of-power-simplicity-religion","type":"story","status":"publish","title_hn":"सादगी से पहुंच गए सत्ता के शिखर तक धर्म सिंह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सादगी से पहुंच गए सत्ता के शिखर तक धर्म सिंह
ब्यूरो/अमर उजाला, बुलंदशहर
Updated Sat, 21 Jan 2017 11:39 PM IST
विज्ञापन
राजनीति
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
जिले में ऐसे भी नेता रहे जो सादगी से सत्ता के शिखर तक पहुंच गए। आजादी के बाद पहली विधानसभा के सदस्य रहे चौधरी धर्म सिंह 30 साल तक विधायक बने रहे। प्रदेश सरकार में तमाम मंत्रालय संभाल चुके चौधरी धर्म सिंह स्पीकर के पद पर भी आसीन हुए। सत्ता के शिखर तक पहुंचे चौधरी धर्म सिंह हमेशा सादगी की मिसाल बने रहे।
उन्होंने आजादी की लड़ाई में भी भाग लिया और कई माह तक जेल में भी बंद रहे। बुलंदशहर के मोहल्ला साठा में चार जनवरी 1924 को किसान चौधरी दुल्लीचंद के घर जन्मे चौधरी धर्म सिंह ने बीए की पढ़ाई की। पढ़ाई करते समय ही वह राजनीति में कूद गए और आजादी की लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाई।
विज्ञापन
आजादी के बाद गठित पहली विधानसभा में वह छतारी सीट से कांग्रेस के टिकट पर लड़कर विधायक बने। उनकी योग्यता को देखते हुए पहली सरकार में ही उन्हें सभा सचिव बनाने के अलावा बिजली, वित्त, वन एवं उद्योग तथा सहकारिका जैसे अहम मंत्रालय सौंपे गए। 1957 में वह दूसरी बार छतारी सीट से चुनाव जीते।
विज्ञापन
इस बार उन्हें स्वास्थ्य मंत्रालय का पदभार दिया गया। 1962 में वह लगातार तीसरी बार छतारी सीट से चुनाव जीते। 1967 में छतारी सीट से चौथी बार विधायक बने। 1969 में हुए मध्यावधि चुनाव में वह चौधरी चरण सिंह की भारतीय क्रांति दल से जेवर सीट से विधायक चुने गए।
चौधरी चरण सिंह की सरकार में उन्हें सार्वजनिक निर्माण, परिवहन और पर्यटन जैसे अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी दी गई। 1974 में उन्होंने लगातार छठी बार विधानसभा पहुंचने का रिकॉर्ड बनाते हुए शिकारपुर सीट पर कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीता। 1977 में हुआ सातवां चुनाव वह शिकारपुर सीट पर जनता पार्टी के प्रत्याशी त्रिलोक चंद्र से हार गए।
1980 का चुनाव उन्होंने फिर शिकारपुर सीट से जीता। इस बार उन्हें उत्तर प्रदेश विधानसभा का अध्यक्ष बनाया गया। 12 जनवरी 1989 को उनका देहवासान हो गया।