{"_id":"578a84cf4f1c1ba64e13fcab","slug":"shaking-hand-guarantee-of-employment","type":"story","status":"publish","title_hn":"कांपते हाथों में गारंटी का ‘रोजगार’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कांपते हाथों में गारंटी का ‘रोजगार’
शाहनवाज चौधरी/ बुलंदशहर
Updated Sun, 17 Jul 2016 12:32 AM IST
विज्ञापन
बुजुर्ग आदमी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
बुलंदशहर। लड़खड़ाते कदम और कांपते हाथ यही है जनपद में मनरेगा मजदूरों का सच। दरअसल, ग्राम्य विकास विभाग के अफसरों ने लक्ष्य पूरा करने के चक्कर में ऐसे 1565 बुजुर्गों के हाथों में फावड़ा-कुदाल थमा दिए, जिनके हाथों में लाठी उठाने की ताकतनहीं। ऐसा परोपकार की दृष्टि से नहीं, बल्कि लक्ष्य पूराने के मकसद से साहब ने किया।
इस साल अब तक डिबाई में सर्वाधिक बुजुर्गों को काम दिया गया। दानपुर और पहासू में 80 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों को भी मनरेगा के तहत काम दिया गया। मनरेगा के तहत जिले में 1.81 लाख मजदूर पंजीकृत हैं। इनमें 51 से 60 वर्ष आयु वर्ग के मजदूर 1352 हैं।
विज्ञापन
209 मजदूरों की आयु 60 साल से 80 साल के बीच है। 80 साल से अधिक आयु वर्ग के दो मजदूर भी मनरेगा में मजदूरी कर रहे हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार 60 साल पार कर चुके जॉब कार्ड धारक मजदूरों की हालत स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद खस्ता है।
विज्ञापन
ऐसे में आप खुद अंदाजा लगा सकते हैं कि 80 प्लस आयु वर्ग के मजदूरोें की स्थति क्या होगी। यदि आप मान रहे हैं कि सरकारी मशीनरी ने हमदर्दी बतौर बूढ़े हाथों को रोजगार दिया है तो आपकी सोच गलत हैं। बुजुर्गों को जॉब कार्ड सिर्फ टारगेट पूरा करने की मंशा से जारी किए गए हैं। इसका अंदाजा बुजुर्ग जॉब कार्ड धारकाें की संख्या और काम पाने वालों की तादाद के अंतर से लगा सकते हैं।