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Bulandshahar News: 16 हजार छात्रों का डाटा संदिग्ध, नहीं मिलेगी छात्रवृत्ति
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संवाद न्यूज एजेंसी
बुलंदशहर। सरकार की ओर से चलाई जा रही दशमोत्तर छात्रवृत्ति के 16672 विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति का डाटा संदिग्ध पाया गया है। समाज कल्याण निदेशालय ने डाटा वापस भेजते हुए सत्यापन के लिए एक और मौका दिया है। इसके निर्देश मिलते ही पूरा डाटा संबंधित शिक्षण संस्थानों को भेज दिया गया है। डाटा का सत्यापन न होने की स्थिति में यह विद्यार्थी छात्रवृत्ति से वंचित रह जाएंगे।
चालू शिक्षण सत्र में कक्षा 11 से पोस्ट ग्रेजुएट, आईटीआई समेत अन्य कक्षाओं में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं ने दशमोत्तर छात्रवृत्ति के लिए आवेदन किया था। इसमें व्यावसायिक कक्षाओं के विद्यार्थी भी शामिल हैं। जिला स्तर से संस्तुति के साथ छात्रवृत्ति का ब्योरा समाज कल्याण निदेशालय भेजा गया। निदेशालय स्तर से की गई जांच में 16672 विद्यार्थियों डेटा संदिग्ध पाया गया है। इनमें सामान्य और एससी के 9925 और ओबीसी के 6747 छात्र-छात्रा शामिल हैं। इसमें अधिकांश विद्यार्थियों के हाईस्कूल के प्रमाणपत्रों का ब्योरा संदिग्ध पाया गया है। छात्रों की ओर से आवेदन में दिए गए हाईस्कूल के प्राप्तांक, अनुक्रमांक के साथ अन्य जानकारियां सत्यापन में सही नहीं पाई गई हैं। इसके अलावा आधार कार्ड नंबर और बैंक खाता संख्या का विवरण आवेदन के मुताबिक सही नहीं मिला है। जांच में विद्यार्थियों का डेटा संदिग्ध पाए जाने पर समाज कल्याण निदेशालय ने विभाग को वापस भेज दिया है।
प्रभारी समाज कल्याण अधिकारी विनीत कुमार तिवारी ने बताया कि निदेशालय ने छात्रों को एक और मौका देते हुए डेटा को संशोधित करने के साथ सत्यापित रिपोर्ट मांगी है। डेटा संदिग्ध पाए जाने पर दशमोत्तर छात्रवृत्ति के 16672 छात्र-छात्राओं का डाटा सत्यापित व संशोधित नहीं होने की स्थिति में ये विद्यार्थी छात्रवृत्ति से वंचित हो जाएंगे। विभाग ने संबंधित विद्यालयों के प्रबंधक व प्रधानाचार्य को डेटा वापस करते हुए संशोधित करने का निर्देश दिया है। जल्द संशोधित डेटा नहीं मिलने पर उसकी संस्तुति विभाग की ओर से नहीं की जा सकेगी।
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प्रभारी जिला समाज कल्याण अधिकारी विनीत कुमार तिवारी ने बताया कि छात्र अपने मोबाइल से विभाग की लॉगिंग पर डाटा संशोधित कर सकते हैं। दूसरी स्थिति में छात्र-छात्रा अपने विद्यालय से डाटा संशोधित करवाते हुए विभाग को भिजवा सकते हैं। छात्रों का विभाग में दिया गया संशोधन प्रार्थना पत्र स्वीकार नहीं किया जाएगा।
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बुलंदशहर। सरकार की ओर से चलाई जा रही दशमोत्तर छात्रवृत्ति के 16672 विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति का डाटा संदिग्ध पाया गया है। समाज कल्याण निदेशालय ने डाटा वापस भेजते हुए सत्यापन के लिए एक और मौका दिया है। इसके निर्देश मिलते ही पूरा डाटा संबंधित शिक्षण संस्थानों को भेज दिया गया है। डाटा का सत्यापन न होने की स्थिति में यह विद्यार्थी छात्रवृत्ति से वंचित रह जाएंगे।
चालू शिक्षण सत्र में कक्षा 11 से पोस्ट ग्रेजुएट, आईटीआई समेत अन्य कक्षाओं में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं ने दशमोत्तर छात्रवृत्ति के लिए आवेदन किया था। इसमें व्यावसायिक कक्षाओं के विद्यार्थी भी शामिल हैं। जिला स्तर से संस्तुति के साथ छात्रवृत्ति का ब्योरा समाज कल्याण निदेशालय भेजा गया। निदेशालय स्तर से की गई जांच में 16672 विद्यार्थियों डेटा संदिग्ध पाया गया है। इनमें सामान्य और एससी के 9925 और ओबीसी के 6747 छात्र-छात्रा शामिल हैं। इसमें अधिकांश विद्यार्थियों के हाईस्कूल के प्रमाणपत्रों का ब्योरा संदिग्ध पाया गया है। छात्रों की ओर से आवेदन में दिए गए हाईस्कूल के प्राप्तांक, अनुक्रमांक के साथ अन्य जानकारियां सत्यापन में सही नहीं पाई गई हैं। इसके अलावा आधार कार्ड नंबर और बैंक खाता संख्या का विवरण आवेदन के मुताबिक सही नहीं मिला है। जांच में विद्यार्थियों का डेटा संदिग्ध पाए जाने पर समाज कल्याण निदेशालय ने विभाग को वापस भेज दिया है।
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प्रभारी समाज कल्याण अधिकारी विनीत कुमार तिवारी ने बताया कि निदेशालय ने छात्रों को एक और मौका देते हुए डेटा को संशोधित करने के साथ सत्यापित रिपोर्ट मांगी है। डेटा संदिग्ध पाए जाने पर दशमोत्तर छात्रवृत्ति के 16672 छात्र-छात्राओं का डाटा सत्यापित व संशोधित नहीं होने की स्थिति में ये विद्यार्थी छात्रवृत्ति से वंचित हो जाएंगे। विभाग ने संबंधित विद्यालयों के प्रबंधक व प्रधानाचार्य को डेटा वापस करते हुए संशोधित करने का निर्देश दिया है। जल्द संशोधित डेटा नहीं मिलने पर उसकी संस्तुति विभाग की ओर से नहीं की जा सकेगी।
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प्रभारी जिला समाज कल्याण अधिकारी विनीत कुमार तिवारी ने बताया कि छात्र अपने मोबाइल से विभाग की लॉगिंग पर डाटा संशोधित कर सकते हैं। दूसरी स्थिति में छात्र-छात्रा अपने विद्यालय से डाटा संशोधित करवाते हुए विभाग को भिजवा सकते हैं। छात्रों का विभाग में दिया गया संशोधन प्रार्थना पत्र स्वीकार नहीं किया जाएगा।