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यूरिया घोटाला: सूची में शामिल अधिकतर के पास नहीं है जमीन
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यूरिया घोटाला : सूची में शामिल अधिकतर के पास नहीं है जमीन
बुलंदशहर। जनपद की समितियों ने जिन 20 किसानों को 8709 यूरिया के कट्टे बेचे थे, उनमें से अधिकतर के पास जमीन ही नहीं है। इसका खुलासा चल रही जांच में हुआ है। इसमें समिति के सचिवों की भी मिलीभगत लगातार सामने आ रही है। अफसरों का कहना है कि जांच अंतिम चरण में है और जल्द ही आगामी कार्रवाई होगी।
गत दिनाें केंद्र सरकार से 20 किसानों की सूची जारी की गई थी। इन किसानों को जनपद की समितियाें द्वारा 8709 यूरिया के कट्टे बेचने का खुलासा करते हुए डीएम को जांच कर कार्रवाई के आदेश दिए गए थे। डीएम रविंद्र कुमार के आदेश पर जब जांच शुरू हुई तो इस पूरे मामले से पर्दा उठना शुरू हो गया। शुरूआती जांच में खुलासा हुआ कि इस सूची में शामिल अधिकतर नाम किसानों के न होकर समिति के चौकीदार, चपरासी और पल्लेदार के पाए गए और इन्हीं के नाम पर यूरिया बेचा गया। एक समिति ने अलीगढ़ निवासी किसान के नाम पर यूरिया बेचा। सूची में शामिल महिला के नाम की जगह किसी दूसरे किसान का नाम सामने आने पर यूरिया का बिक्री दूसरों के नाम व पते पर बेचने का भी खुलासा हो चुका है। अब खुलासा हुआ है कि सूची में शामिल अधिकतर के पास जमीन ही नहीं है। ऐसे 10 से अधिक लोग बताए जा रहे हैं। इतना ही नहीं इनका नाम भी समिति में दर्ज नहीं है। अफसरों का कहना है कि जांच में समिति के सचिवों की मिलीभगत भी सामने आ रही है। जांच अंतिम चरण में है और जल्द ही आगामी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, दूसरी ओर जैसे-जैसे जांच का अंतिम चरण चल रहा है तो संबंधित समितियों के सचिव आदि कर्मचारियों की होने वाली कार्रवाई के डर से परेशानी भी बढ़ती जा रही है। जिला कृषि अधिकारी अश्विनी कुमार सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार से प्राप्त हुई सूची में शामिल सभी की गहनता से जांच की जा रही है। जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच अंतिम चरण में है और जल्द ही आगामी कार्रवाई के लिए डीएम को सौंप दी जाएगी।
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बुलंदशहर। जनपद की समितियों ने जिन 20 किसानों को 8709 यूरिया के कट्टे बेचे थे, उनमें से अधिकतर के पास जमीन ही नहीं है। इसका खुलासा चल रही जांच में हुआ है। इसमें समिति के सचिवों की भी मिलीभगत लगातार सामने आ रही है। अफसरों का कहना है कि जांच अंतिम चरण में है और जल्द ही आगामी कार्रवाई होगी।
गत दिनाें केंद्र सरकार से 20 किसानों की सूची जारी की गई थी। इन किसानों को जनपद की समितियाें द्वारा 8709 यूरिया के कट्टे बेचने का खुलासा करते हुए डीएम को जांच कर कार्रवाई के आदेश दिए गए थे। डीएम रविंद्र कुमार के आदेश पर जब जांच शुरू हुई तो इस पूरे मामले से पर्दा उठना शुरू हो गया। शुरूआती जांच में खुलासा हुआ कि इस सूची में शामिल अधिकतर नाम किसानों के न होकर समिति के चौकीदार, चपरासी और पल्लेदार के पाए गए और इन्हीं के नाम पर यूरिया बेचा गया। एक समिति ने अलीगढ़ निवासी किसान के नाम पर यूरिया बेचा। सूची में शामिल महिला के नाम की जगह किसी दूसरे किसान का नाम सामने आने पर यूरिया का बिक्री दूसरों के नाम व पते पर बेचने का भी खुलासा हो चुका है। अब खुलासा हुआ है कि सूची में शामिल अधिकतर के पास जमीन ही नहीं है। ऐसे 10 से अधिक लोग बताए जा रहे हैं। इतना ही नहीं इनका नाम भी समिति में दर्ज नहीं है। अफसरों का कहना है कि जांच में समिति के सचिवों की मिलीभगत भी सामने आ रही है। जांच अंतिम चरण में है और जल्द ही आगामी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, दूसरी ओर जैसे-जैसे जांच का अंतिम चरण चल रहा है तो संबंधित समितियों के सचिव आदि कर्मचारियों की होने वाली कार्रवाई के डर से परेशानी भी बढ़ती जा रही है। जिला कृषि अधिकारी अश्विनी कुमार सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार से प्राप्त हुई सूची में शामिल सभी की गहनता से जांच की जा रही है। जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच अंतिम चरण में है और जल्द ही आगामी कार्रवाई के लिए डीएम को सौंप दी जाएगी।
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