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Bulandshahar News: गन्ने की 0238 किस्म में लगा लाल सड़न रोग
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बुलंदशहर। किसानों की पहली पसंद गन्ने की अगेती किस्म 0238 में लाल सड़न रोग लग गया है। फसल खराब होने से किसान चिंतित हैं। कृषि अधिकारी और वैज्ञानिक अब किसानों को गन्ने की नई किस्म उगाने की सलाह दे रहे हैं।
जिले में इस बार गन्ने की फसल का रकबा 74 हजार हेक्टेयर है। यहां गन्ने की किस्म 0238 की पैदावार बड़े पैमाने पर होती है। पिछले कई साल से इस प्रजाति के गन्ने में लाल सड़न रोग लग रहा है। इस रोग के लगने से किसान बचाव के लिए भी उपाय कर रहे हैं। बावजूद इसके उपचार नहीं हो रहा है। गन्ना उत्पादक किसान सत्तन सिंह, भूरा सिंह, राजीव कुमार और प्रवीन का कहना है कि इस रोग के लगने से फसल को काफी नुकसान हुआ है। रोग रोकने के लिए किए गए उपाय भी काम नहीं आ रहे हैं।
जिला गन्ना अधिकारी ब्रजेश कुमार पटेल और जिला कृषि अधिकारी राहुल सिंह तेवतिया ने बताया कि गन्ने की इस बीमारी का नाम रेड रॉट है, जो कि कोलेट्रोट्राईकम फलकेटम नामक फफूंद से फैली है। रोग की रोकथाम के लिए बीज उपचार ही प्रमुख प्रभावी तरीका है। कृषि वैज्ञानिक डाॅ. विवेकराज ने बताया कि किसान लगातार एक ही प्रजाति का गन्ना खेत में बार-बार बोते हैं। इसलिए यह बीमारी तेजी से फैली है। इस रोग के लगने पर गन्ने की प्रारंभिक अवस्था में अगोले की तीसरी और चौथी पत्ती किनारे से सूखने लगती है। गन्ने की पत्तियों की मध्यशिरा पर लाल धब्बे दिखाई देते हैं। धीरे-धीरे गन्ने का पूरा अगोला सूख जाता है और गन्ने का गूदा लाल रंग का दिखाई देता है। रोग से प्रभावित गन्ने के तने पर एल्कोहल/सिरके जैसी गंध आती है। फसल को रोग से बचाव के लिए गन्ना बीज को गर्म वायु या गर्म पानी का उपचार दें। इससे जीवाणु मर जाते हैं। जमीन शोधित करने के लिए ट्राइकोडर्मा का छिड़काव करें। स्वस्थ पौधों पर सिस्टमिक फफूंदीनाशक का छिड़काव कर दें। लाल सड़न के लक्षण दिखने पर प्रभावित गन्ने को जड़ सहित उखाड़कर उसे खेत से बाहर लाकर नष्ट कर दें।
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जिले में इस बार गन्ने की फसल का रकबा 74 हजार हेक्टेयर है। यहां गन्ने की किस्म 0238 की पैदावार बड़े पैमाने पर होती है। पिछले कई साल से इस प्रजाति के गन्ने में लाल सड़न रोग लग रहा है। इस रोग के लगने से किसान बचाव के लिए भी उपाय कर रहे हैं। बावजूद इसके उपचार नहीं हो रहा है। गन्ना उत्पादक किसान सत्तन सिंह, भूरा सिंह, राजीव कुमार और प्रवीन का कहना है कि इस रोग के लगने से फसल को काफी नुकसान हुआ है। रोग रोकने के लिए किए गए उपाय भी काम नहीं आ रहे हैं।
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जिला गन्ना अधिकारी ब्रजेश कुमार पटेल और जिला कृषि अधिकारी राहुल सिंह तेवतिया ने बताया कि गन्ने की इस बीमारी का नाम रेड रॉट है, जो कि कोलेट्रोट्राईकम फलकेटम नामक फफूंद से फैली है। रोग की रोकथाम के लिए बीज उपचार ही प्रमुख प्रभावी तरीका है। कृषि वैज्ञानिक डाॅ. विवेकराज ने बताया कि किसान लगातार एक ही प्रजाति का गन्ना खेत में बार-बार बोते हैं। इसलिए यह बीमारी तेजी से फैली है। इस रोग के लगने पर गन्ने की प्रारंभिक अवस्था में अगोले की तीसरी और चौथी पत्ती किनारे से सूखने लगती है। गन्ने की पत्तियों की मध्यशिरा पर लाल धब्बे दिखाई देते हैं। धीरे-धीरे गन्ने का पूरा अगोला सूख जाता है और गन्ने का गूदा लाल रंग का दिखाई देता है। रोग से प्रभावित गन्ने के तने पर एल्कोहल/सिरके जैसी गंध आती है। फसल को रोग से बचाव के लिए गन्ना बीज को गर्म वायु या गर्म पानी का उपचार दें। इससे जीवाणु मर जाते हैं। जमीन शोधित करने के लिए ट्राइकोडर्मा का छिड़काव करें। स्वस्थ पौधों पर सिस्टमिक फफूंदीनाशक का छिड़काव कर दें। लाल सड़न के लक्षण दिखने पर प्रभावित गन्ने को जड़ सहित उखाड़कर उसे खेत से बाहर लाकर नष्ट कर दें।
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