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रज्जी हत्याकांड : 20 वर्ष बाद बाल अपचारी दोषी करार
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ककोड़ थाना क्षेत्र में वर्ष 2005 में यानी करीब 20 साल पुराने बहुचर्चित रज्जी हत्याकांड में किशोर न्याय बोर्ड ने सोमवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। बोर्ड ने मामले में दोषी पाए गए बाल अपचारी को तीन वर्ष की सुधारात्मक सजा सुनाई है।
12 जनवरी 2005 को ककोड़ थाना क्षेत्र निवासी राजा पुत्र रज्जी ने अपने पिता रज्जी की हत्या के संबंध में पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसमें उसने बताया था कि, गांव के ही एक किशोर का उनके पिता रज्जी से रास्ता रोकने को लेकर विवाद हो गया था। इस तुच्छ विवाद से खफा होकर किशोर ने आवेश में आकर रज्जी पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। रज्जी को गंभीर चोटें आईं और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी।
वारदात के समय आरोपी की उम्र 18 वर्ष से कम थी, इसलिए मामला जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में विचाराधीन रहा। पिछले दो दशकों से यह हाई-प्रोफाइल मामला कोर्ट में लंबित था। इस दौरान वर्षों तक सुनवाई चली, जिसमें साक्ष्य परीक्षण किए गए और गवाहों के विस्तृत बयान दर्ज किए गए। सोमवार को किशोर न्याय बोर्ड के प्रधान न्यायाधीश देवेंद्र कुमार की कोर्ट ने सभी सबूतों और बयानों को ध्यान में रखते हुए अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने किशोर को हत्या का दोषी ठहराया। हालांकि, उसकी किशोर अवस्था को ध्यान में रखते हुए, कोर्ट ने उसे तीन साल की सुधारात्मक अवधि की सजा सुनाई है।
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12 जनवरी 2005 को ककोड़ थाना क्षेत्र निवासी राजा पुत्र रज्जी ने अपने पिता रज्जी की हत्या के संबंध में पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसमें उसने बताया था कि, गांव के ही एक किशोर का उनके पिता रज्जी से रास्ता रोकने को लेकर विवाद हो गया था। इस तुच्छ विवाद से खफा होकर किशोर ने आवेश में आकर रज्जी पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। रज्जी को गंभीर चोटें आईं और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी।
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वारदात के समय आरोपी की उम्र 18 वर्ष से कम थी, इसलिए मामला जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में विचाराधीन रहा। पिछले दो दशकों से यह हाई-प्रोफाइल मामला कोर्ट में लंबित था। इस दौरान वर्षों तक सुनवाई चली, जिसमें साक्ष्य परीक्षण किए गए और गवाहों के विस्तृत बयान दर्ज किए गए। सोमवार को किशोर न्याय बोर्ड के प्रधान न्यायाधीश देवेंद्र कुमार की कोर्ट ने सभी सबूतों और बयानों को ध्यान में रखते हुए अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने किशोर को हत्या का दोषी ठहराया। हालांकि, उसकी किशोर अवस्था को ध्यान में रखते हुए, कोर्ट ने उसे तीन साल की सुधारात्मक अवधि की सजा सुनाई है।
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