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Bulandshahar News: लगातार हो रही बारिश से पॉटरी कारोबारी चिंतित, लाखों रुपये का कारोबार ठप
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खुर्जा के मुंडाखेड़ा मार्ग स्थित पॉटरी में बारिश के पानी में भीगे रखे मिट्टी के कट्टे । संवाद
खुर्जा। लगातार हो रही बारिश के कारण पॉटरी फैक्टरी में उत्पाद और उनके मोल्ड नहीं सूख पा रहे हैं। ऐसे में चार दिन में तैयार होने वाले उत्पाद को आठ से दस दिन का समय लग रहा है। ऐसे मे आगामी त्योहार को लेकर आने वाले ऑर्डर के निरस्त होने की आशंका से कारोबारी परेशान हैं।
खुर्जा में लगभग 400 पॉटरी इकाइयां है, जो एक साल में लगभग 125 करोड़ रुपये का कारोबार करती हैं। पॉटरी कारोबार के लिए सितंबर से दिसंबर माह सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। सिरेमिक से तैयार होने वाली क्रॉकरी, गमले और सजावटी उत्पाद त्योहारी सीजन में ज्यादा खरीदे जाते हैं। इसके लिए उद्यमियों के पास सितंबर और अगस्त महीने में ही ऑर्डर आने शुरू हो जाते हैं। वहीं बीते चार दिनों से हो रही लगातार बारिश से उत्पाद तैयार होने में उद्यमियों को काफी दिक्कत हो रही है। कई पॉटरी इकाइयां में पानी भर गया तो कुछ जगह उत्पाद सुखाने के लिए जगह नहीं है।
खुर्जा पॉटरी उद्यमी जाेनू चौहान ने बताया कि सिरेमिक से तैयार होने वाले गमले, आचार दानी, कप-प्लेट और अन्य उत्पाद को तैयार करने के लिए धूप की जरूरत होती है। बड़े उत्पाद को ज्यादा क्षेत्रफल चाहिए होता है, जिसमें धूप और हवा दोनों मिल सके। वहीं, उत्पाद को तैयार करने वाले सांचे अर्थात मोल्ड को सुखाने के लिए भी धूप चाहिए होती है।
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वहीं उद्यमी शलभ सिंघानिया ने बताया कि तीन दिनों से हो रही बारिश से फैक्टरी में पानी भर गया है। इससे उत्पाद भी नहीं सूख पा रहे हैं। ऐसे में जो उत्पाद तीन से चार दिन में तैयार होते हैं। उनको तैयार होने पर सात से आठ दिन का समय लग रहा है।
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सप्लाई में भी हो रही परेशानी
पॉटरी उद्यमी अनुज गोयल ने बताया कि बारिश में कच्चा माल (मिट्टी) आने और तैयार माल की सप्लाई में भी परेशानी हो रही है। ऐसे में माल खराब होने का डर है। वहीं फैक्टरी परिसर में पानी भरने से उत्पाद, मोल्ड, पैकिंग गत्ते, मिट्टी और अन्य सामान रखने की परेशानी है। ऑर्डर देरी से पहुंचने पर कारोबार पर प्रभाव पड़ रहा है।
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खुर्जा में लगभग 400 पॉटरी इकाइयां है, जो एक साल में लगभग 125 करोड़ रुपये का कारोबार करती हैं। पॉटरी कारोबार के लिए सितंबर से दिसंबर माह सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। सिरेमिक से तैयार होने वाली क्रॉकरी, गमले और सजावटी उत्पाद त्योहारी सीजन में ज्यादा खरीदे जाते हैं। इसके लिए उद्यमियों के पास सितंबर और अगस्त महीने में ही ऑर्डर आने शुरू हो जाते हैं। वहीं बीते चार दिनों से हो रही लगातार बारिश से उत्पाद तैयार होने में उद्यमियों को काफी दिक्कत हो रही है। कई पॉटरी इकाइयां में पानी भर गया तो कुछ जगह उत्पाद सुखाने के लिए जगह नहीं है।
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खुर्जा पॉटरी उद्यमी जाेनू चौहान ने बताया कि सिरेमिक से तैयार होने वाले गमले, आचार दानी, कप-प्लेट और अन्य उत्पाद को तैयार करने के लिए धूप की जरूरत होती है। बड़े उत्पाद को ज्यादा क्षेत्रफल चाहिए होता है, जिसमें धूप और हवा दोनों मिल सके। वहीं, उत्पाद को तैयार करने वाले सांचे अर्थात मोल्ड को सुखाने के लिए भी धूप चाहिए होती है।
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वहीं उद्यमी शलभ सिंघानिया ने बताया कि तीन दिनों से हो रही बारिश से फैक्टरी में पानी भर गया है। इससे उत्पाद भी नहीं सूख पा रहे हैं। ऐसे में जो उत्पाद तीन से चार दिन में तैयार होते हैं। उनको तैयार होने पर सात से आठ दिन का समय लग रहा है।
सप्लाई में भी हो रही परेशानी
पॉटरी उद्यमी अनुज गोयल ने बताया कि बारिश में कच्चा माल (मिट्टी) आने और तैयार माल की सप्लाई में भी परेशानी हो रही है। ऐसे में माल खराब होने का डर है। वहीं फैक्टरी परिसर में पानी भरने से उत्पाद, मोल्ड, पैकिंग गत्ते, मिट्टी और अन्य सामान रखने की परेशानी है। ऑर्डर देरी से पहुंचने पर कारोबार पर प्रभाव पड़ रहा है।

खुर्जा के मुंडाखेड़ा मार्ग स्थित पॉटरी में बारिश के पानी में भीगे रखे मिट्टी के कट्टे । संवाद