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परम डेयरी का मानचित्र सही, प्राधिकरण बदले अपना मास्टर प्लान : मुख्य सचिव
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खुर्जा क्षेत्र के जीटी मार्ग स्थित औद्योगिक पार्क के निरीक्षण के दौरान अधिकारियों से वार्ता करत
खुर्जा। नेशनल हाईवे 34 स्थित परम डेयरी के मानचित्र को मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने सही ठहराते हुए बुलंदशहर विकास प्राधिकरण को मास्टर प्लान में बदलाव करने के निर्देश दिए हैं। परम डेयरी परिसर में शुक्रवार के हुई बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने कहा कि ग्रीन बेल्ट के लिए प्राधिकरण अपने मास्टर प्लान बदलाव करे।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के मानक के अनुसार नेशनल हाईवे से 60 मीटर की दूरी को ग्रीन बेल्ट में शामिल किया जाएगा। इसी नियम के तहत बुलंदशहर-खुर्जा विकास प्राधिकरण (बीकेडीए) ने नेशनल हाईवे 34 (बुलंदशहर-अलीगढ़) पर स्थित परम डेयरी के निर्माण पर आपत्ति की थी। बीकेडीए ने 11 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र को ग्रीन बेल्ट बताते हुए डेयरी संचालक को नोटिस जारी कर दिया था। दो दशक से यह विवाद चल रहा था। इसी विवाद के निस्तारण के लिए शुक्रवार को मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह परम डेयरी पहुंचे।
दोपहर करीब डेढ़ बजे वह फैक्टरी परिसर में मुख्य सचिव ने मंडलायुक्त आर. भास्कर यशोद, डीएम श्रुति, बीकेडीए उपाध्यक्ष डा. अंकुर लाठर, एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के अधिकारी, एसएसपी दिनेश कुमार सिंह व परम डेयरी प्रबंध समिति के साथ करीब 40 मिनट तक समीक्षा बैठक की। फैक्टरी परिसर का दौरा कर मानचित्र व अन्य दस्तावेजों की जांच की। बैठक के बाद मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने कहा कि वर्ष 1995 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 1997 में परम डेयरी खुर्जा क्षेत्र में आई थी। डेयरी करीब 16 हेक्टेयर क्षेत्रफल में तैयार हुई थी। एनसीआर प्लानिंग बोर्ड ने इसे औद्योगिक क्षेत्र में चिन्हित किया था। तब विकास प्राधिकरण से कहा गया था कि इस 16 हेक्टेयर क्षेत्रफल को औद्योगिक क्षेत्र में शामिल किया जाए। इसके बावजूद विकास प्राधिकरण ने अपने मास्टर प्लान में बदलाव नहीं किया।
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मुख्य सचिव ने बताया कि फैक्टरी ने प्राधिकरण से अपना मानचित्र वर्ष 1997, 2000, 2013 समेत कई बार स्वीकृत कराया। इसी बीच एक नियम जारी हुआ कि हाईवे से 60 मीटर दूरी का क्षेत्र ग्रीन बेल्ट में शामिल किया जाएगा लेकिन यह आदेश 1997 के बाद आया। जो फैक्टरी बनने के बाद है। ऐसे में 16 हेक्टेयर जमीन फैक्टरी की ही है। उन्होंने कहा कि यदि प्राधिकरण को आपत्ति है तो वह ग्रीन बेल्ट कहीं अन्य जगह आगे या पीछे बनाए। अपने मास्टर प्लान को बदले। फैक्टरी अपनी जगह पर ही रहेगी। उन्होंने कहा कि शासन का स्पष्ट निर्देश है कि उद्योग सुचारू रूप से चलते रहें। यदि प्राधिकरण को फैक्टरी के मानचित्र से आपत्ति है तो 16 हेक्टेयर जमीन फैक्टरी को और 100 हेक्टेयर अन्य औद्योगिक क्षेत्र की जमीन यूपीसीडा को स्थानांतरित कर दें। यूपीसीडा अपनी तरह से क्षेत्र को विकसित करेगा।
औद्योगिक पार्क का किया भ्रमण
परम डेयरी में समीक्षा बैठक के बाद मुख्य सचिव किर्रा गांव में बनाए जा रहे बीकेडीए के औद्योगिक पार्क परियोजना का निरीक्षण किया। बीकेडीए उपाध्यक्ष डा. अंकुर लाठर ने मुख्य सचिव को बताया कि 81 एकड़ जमीन पर तैयार औद्योगिक क्षेत्र में 82 औद्योगिक स्थान, नौ वेयर हाउस और 12 व्यावसायिक भूखंड हैँ। जमीन की कीमत 18 हजार वर्ग मीटर तय की गई थी, प्रथम चरण की बोली 33 हजार वर्ग मीटर तक पहुंची। इस पर मुख्य सचिव ने जमीन के दाम कम करने के निर्देश दिए। बीकेडीए उपाध्यक्ष ने कालिंदी कुंज कॉलोनी में बनाए गए सिरेमिक पार्क की तस्वीर भी दिखाई।
सभी गांवों में लागू हो स्वच्छता और अपशिष्ट केंद्र प्रणाली
मुख्य सचिव ने खुर्जा के शहजादपुर कनैनी गांव में ठोस व तरल अपशिष्ट प्रबंधन, मॉडल ग्राम एवं स्वच्छता, नवाचार प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन केंद्र का निरीक्षण किया। उन्होंने प्रदर्शनी में लगाए गए जल शोधन, जल संरक्षण, मृदा संरक्षण, गोबर गैस प्लांट, अपशिष्ट प्रबंधन के लिए बनाए मॉडल को देखा। अधिकारियों को निर्देश दिए कि यह प्रक्रिया सभी गांवों में लागू की जाए। क्षेत्र की उपलब्धि का लाभ सभी ग्राम पंचायतों को मिलना चाहिए।
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के मानक के अनुसार नेशनल हाईवे से 60 मीटर की दूरी को ग्रीन बेल्ट में शामिल किया जाएगा। इसी नियम के तहत बुलंदशहर-खुर्जा विकास प्राधिकरण (बीकेडीए) ने नेशनल हाईवे 34 (बुलंदशहर-अलीगढ़) पर स्थित परम डेयरी के निर्माण पर आपत्ति की थी। बीकेडीए ने 11 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र को ग्रीन बेल्ट बताते हुए डेयरी संचालक को नोटिस जारी कर दिया था। दो दशक से यह विवाद चल रहा था। इसी विवाद के निस्तारण के लिए शुक्रवार को मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह परम डेयरी पहुंचे।
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दोपहर करीब डेढ़ बजे वह फैक्टरी परिसर में मुख्य सचिव ने मंडलायुक्त आर. भास्कर यशोद, डीएम श्रुति, बीकेडीए उपाध्यक्ष डा. अंकुर लाठर, एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के अधिकारी, एसएसपी दिनेश कुमार सिंह व परम डेयरी प्रबंध समिति के साथ करीब 40 मिनट तक समीक्षा बैठक की। फैक्टरी परिसर का दौरा कर मानचित्र व अन्य दस्तावेजों की जांच की। बैठक के बाद मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने कहा कि वर्ष 1995 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 1997 में परम डेयरी खुर्जा क्षेत्र में आई थी। डेयरी करीब 16 हेक्टेयर क्षेत्रफल में तैयार हुई थी। एनसीआर प्लानिंग बोर्ड ने इसे औद्योगिक क्षेत्र में चिन्हित किया था। तब विकास प्राधिकरण से कहा गया था कि इस 16 हेक्टेयर क्षेत्रफल को औद्योगिक क्षेत्र में शामिल किया जाए। इसके बावजूद विकास प्राधिकरण ने अपने मास्टर प्लान में बदलाव नहीं किया।
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मुख्य सचिव ने बताया कि फैक्टरी ने प्राधिकरण से अपना मानचित्र वर्ष 1997, 2000, 2013 समेत कई बार स्वीकृत कराया। इसी बीच एक नियम जारी हुआ कि हाईवे से 60 मीटर दूरी का क्षेत्र ग्रीन बेल्ट में शामिल किया जाएगा लेकिन यह आदेश 1997 के बाद आया। जो फैक्टरी बनने के बाद है। ऐसे में 16 हेक्टेयर जमीन फैक्टरी की ही है। उन्होंने कहा कि यदि प्राधिकरण को आपत्ति है तो वह ग्रीन बेल्ट कहीं अन्य जगह आगे या पीछे बनाए। अपने मास्टर प्लान को बदले। फैक्टरी अपनी जगह पर ही रहेगी। उन्होंने कहा कि शासन का स्पष्ट निर्देश है कि उद्योग सुचारू रूप से चलते रहें। यदि प्राधिकरण को फैक्टरी के मानचित्र से आपत्ति है तो 16 हेक्टेयर जमीन फैक्टरी को और 100 हेक्टेयर अन्य औद्योगिक क्षेत्र की जमीन यूपीसीडा को स्थानांतरित कर दें। यूपीसीडा अपनी तरह से क्षेत्र को विकसित करेगा।
औद्योगिक पार्क का किया भ्रमण
परम डेयरी में समीक्षा बैठक के बाद मुख्य सचिव किर्रा गांव में बनाए जा रहे बीकेडीए के औद्योगिक पार्क परियोजना का निरीक्षण किया। बीकेडीए उपाध्यक्ष डा. अंकुर लाठर ने मुख्य सचिव को बताया कि 81 एकड़ जमीन पर तैयार औद्योगिक क्षेत्र में 82 औद्योगिक स्थान, नौ वेयर हाउस और 12 व्यावसायिक भूखंड हैँ। जमीन की कीमत 18 हजार वर्ग मीटर तय की गई थी, प्रथम चरण की बोली 33 हजार वर्ग मीटर तक पहुंची। इस पर मुख्य सचिव ने जमीन के दाम कम करने के निर्देश दिए। बीकेडीए उपाध्यक्ष ने कालिंदी कुंज कॉलोनी में बनाए गए सिरेमिक पार्क की तस्वीर भी दिखाई।
सभी गांवों में लागू हो स्वच्छता और अपशिष्ट केंद्र प्रणाली
मुख्य सचिव ने खुर्जा के शहजादपुर कनैनी गांव में ठोस व तरल अपशिष्ट प्रबंधन, मॉडल ग्राम एवं स्वच्छता, नवाचार प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन केंद्र का निरीक्षण किया। उन्होंने प्रदर्शनी में लगाए गए जल शोधन, जल संरक्षण, मृदा संरक्षण, गोबर गैस प्लांट, अपशिष्ट प्रबंधन के लिए बनाए मॉडल को देखा। अधिकारियों को निर्देश दिए कि यह प्रक्रिया सभी गांवों में लागू की जाए। क्षेत्र की उपलब्धि का लाभ सभी ग्राम पंचायतों को मिलना चाहिए।