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आठ बार महिलाओं के हाथ में रही जिला पंचायत की बागडोर
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जिला पंचायत कार्यालय।
- फोटो : BULANDSHAHR
आठ बार महिलाओं के हाथ में रही जिला पंचायत की बागडोर
बुलंदशहर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का बिगुल बज चुका है। चार पदों के लिए होने वाले चुनाव में प्रधानी पद के अलावा सबसे ज्यादा रोचक चुनाव जिला पंचायत सदस्यों का होता है। क्योंकि, यह 52 जिपं सदस्य जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव करते हैं। जिसके हाथों में जनपद भर के विकास कार्यों की कमान होती है। आजादी से पूर्व 1923 से अब तक आठ बार महिलाओं के हाथ में जिपं की बागडोर रही है।
जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर आजादी से पूर्व से निर्वाचन होता रहा है। इस बार जिपं अध्यक्ष की सीट महिला के लिए आरक्षित है। 23 अप्रैल 1995 में पहली बार जिपं अध्यक्ष पद पर किसी महिला ने कार्यभार संभाला। विमला सोलंकी ने करीब 72 साल बाद इस सीट पर परचम लहराया। वह इस पद पर 14 जनवरी 1997 तक रहीं। इसके बाद दोबारा विमला सोलंकी 22 मार्च 1997 को इस पद पर आसीन हुईं। करीब 40 माह तक वह इस पद पर 10 जुलाई 2000 तक बनीं रहीं। वर्तमान में विमला सोलंकी सिकंदराबाद विधानसभा से भाजपा की विधायक भी हैं। विमला सोलंकी का विधानसभा का भी दूसरा कार्यकाल है।
10 अगस्त 2000 को राजकुमारी गिरि ने कार्यभार संभाला। उन्होंने अपना पूरा कार्यकाल बिना किसी बाधा के पूरा किया। नौ अक्तूबर 2005 को इनका कार्यकाल समाप्त हुआ। मुमरेजपुर निवासी सविता सिंह ने 14 जनवरी 2006 को कार्यभार संभाला। 13 जनवरी 2011 तक पंचवर्षीय योजना तक पद पर बनीं रहीं। इसके बाद सनौटा निवासी आशा यादव ने जिपं का कार्यभार 14 जनवरी 2011 को संभाला। इन्होंने भी 13 जनवरी 2016 तक अपना पूरा कार्यकाल निर्बाध रूप से पूरा किया।
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तीन बार महिला जिला अधिकारियों के हाथ में रही है कमान
जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर आसीन रहीं कुल आठ महिलाओं में से तीन बार कार्यकाल महिला जिलाधिकारी के हाथ में रही है। पहली बार तत्कालीन जिलाधिकारी डिंपल वर्मा 15 जुलाई 2000 से नौ अगस्त 2000 तक कार्यकाल रहा। इसके बाद 10 अक्तूबर 2005 से 13 जनवरी 2006 तक तत्कालीन जिलाधिकारी नीना शर्मा के हाथ में जिपं की कमान रही। उसके बाद 25 मई 2017 से 28 अगस्त 2017 तक तत्कालीन जिलाधिकारी डॉ. रोशन जैकब ने जिपं की बागडोर संभाला था।
सात लोगों ने संभाला पिछला जिपं का कार्यकाल
14 जनवरी 2016 में पिछला जिला पंचायत का कार्यकाल शुरू हुआ था। इस दौरान प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी। इस समय सपा समर्थित हरेंद्र यादव ने कार्यभार संभाला था। सूबे में सत्ता परिवर्तन होने के बाद हरेंद्र यादव ने 22 मई 2017 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया, दो दिन तक यह पद रिक्त रहा। 25 मई को तत्कालीन डीएम ने कार्यभार संभाला और 28 अगस्त तक वह पद पर बनीं रहीं। इसके बाद 29 अगस्त 2017 को भाजपा समर्थित प्रदीप चौधरी ने कार्यभार संभाला। 18 फरवरी तक यह पद पर बने रहे। अविश्वास प्रस्ताव आने के बाद कुछ दिन यह पद रिक्त रहा फिर तत्कालीन डीएम अभय सिंह ने दो मार्च 2019 को कार्यभार संभाला। अभय सिंह के तबादले के बाद 11 जुलाई 2019 को तत्कालीन डीएम रविंद्र कुमार के पास प्रभार आया, जो चार अगस्त 2019 तक रहा। पांच अगस्त को निर्दलीय के रूप में चौधरी ओमवीर सिंह ने कार्यभार संभाला। इसके बाद जिपं का कार्यकाल समाप्त हो गया और 14 जनवरी से एक बार फिर कार्यकाल डीएम रविंद्र कुमार के हाथ आ गई।
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बुलंदशहर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का बिगुल बज चुका है। चार पदों के लिए होने वाले चुनाव में प्रधानी पद के अलावा सबसे ज्यादा रोचक चुनाव जिला पंचायत सदस्यों का होता है। क्योंकि, यह 52 जिपं सदस्य जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव करते हैं। जिसके हाथों में जनपद भर के विकास कार्यों की कमान होती है। आजादी से पूर्व 1923 से अब तक आठ बार महिलाओं के हाथ में जिपं की बागडोर रही है।
जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर आजादी से पूर्व से निर्वाचन होता रहा है। इस बार जिपं अध्यक्ष की सीट महिला के लिए आरक्षित है। 23 अप्रैल 1995 में पहली बार जिपं अध्यक्ष पद पर किसी महिला ने कार्यभार संभाला। विमला सोलंकी ने करीब 72 साल बाद इस सीट पर परचम लहराया। वह इस पद पर 14 जनवरी 1997 तक रहीं। इसके बाद दोबारा विमला सोलंकी 22 मार्च 1997 को इस पद पर आसीन हुईं। करीब 40 माह तक वह इस पद पर 10 जुलाई 2000 तक बनीं रहीं। वर्तमान में विमला सोलंकी सिकंदराबाद विधानसभा से भाजपा की विधायक भी हैं। विमला सोलंकी का विधानसभा का भी दूसरा कार्यकाल है।
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10 अगस्त 2000 को राजकुमारी गिरि ने कार्यभार संभाला। उन्होंने अपना पूरा कार्यकाल बिना किसी बाधा के पूरा किया। नौ अक्तूबर 2005 को इनका कार्यकाल समाप्त हुआ। मुमरेजपुर निवासी सविता सिंह ने 14 जनवरी 2006 को कार्यभार संभाला। 13 जनवरी 2011 तक पंचवर्षीय योजना तक पद पर बनीं रहीं। इसके बाद सनौटा निवासी आशा यादव ने जिपं का कार्यभार 14 जनवरी 2011 को संभाला। इन्होंने भी 13 जनवरी 2016 तक अपना पूरा कार्यकाल निर्बाध रूप से पूरा किया।
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तीन बार महिला जिला अधिकारियों के हाथ में रही है कमान
जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर आसीन रहीं कुल आठ महिलाओं में से तीन बार कार्यकाल महिला जिलाधिकारी के हाथ में रही है। पहली बार तत्कालीन जिलाधिकारी डिंपल वर्मा 15 जुलाई 2000 से नौ अगस्त 2000 तक कार्यकाल रहा। इसके बाद 10 अक्तूबर 2005 से 13 जनवरी 2006 तक तत्कालीन जिलाधिकारी नीना शर्मा के हाथ में जिपं की कमान रही। उसके बाद 25 मई 2017 से 28 अगस्त 2017 तक तत्कालीन जिलाधिकारी डॉ. रोशन जैकब ने जिपं की बागडोर संभाला था।
सात लोगों ने संभाला पिछला जिपं का कार्यकाल
14 जनवरी 2016 में पिछला जिला पंचायत का कार्यकाल शुरू हुआ था। इस दौरान प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी। इस समय सपा समर्थित हरेंद्र यादव ने कार्यभार संभाला था। सूबे में सत्ता परिवर्तन होने के बाद हरेंद्र यादव ने 22 मई 2017 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया, दो दिन तक यह पद रिक्त रहा। 25 मई को तत्कालीन डीएम ने कार्यभार संभाला और 28 अगस्त तक वह पद पर बनीं रहीं। इसके बाद 29 अगस्त 2017 को भाजपा समर्थित प्रदीप चौधरी ने कार्यभार संभाला। 18 फरवरी तक यह पद पर बने रहे। अविश्वास प्रस्ताव आने के बाद कुछ दिन यह पद रिक्त रहा फिर तत्कालीन डीएम अभय सिंह ने दो मार्च 2019 को कार्यभार संभाला। अभय सिंह के तबादले के बाद 11 जुलाई 2019 को तत्कालीन डीएम रविंद्र कुमार के पास प्रभार आया, जो चार अगस्त 2019 तक रहा। पांच अगस्त को निर्दलीय के रूप में चौधरी ओमवीर सिंह ने कार्यभार संभाला। इसके बाद जिपं का कार्यकाल समाप्त हो गया और 14 जनवरी से एक बार फिर कार्यकाल डीएम रविंद्र कुमार के हाथ आ गई।