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Bulandshahar News: डेंगू की फर्जी रिपोर्ट पर माइक्रो पैथ लैब का पंजीकरण निरस्त करने का आदेश
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बुलंदशहर। निजी पैथोलॉजी लैब पर जांच के दौरान मरीज को डेंगू घोषित करने और दहशत में मरीज की मौत के मामले में अब माइक्रो पैथ लैब का पंजीकरण रद्द करने के आदेश उपभोक्ता आयोग ने दिए हैं। साथ ही पीड़ित को पांच लाख रुपये क्षतिपूर्ति और वाद व्यय के पांच हजार रुपये देने के निर्देश दिए हैं।
जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष के पीए शेखर वर्मा ने बताया कि नगर के मोहल्ला प्रेम नगर निवासी ज्ञान प्रकाश गौड़ ने शिकायत देकर बताया था कि अक्टूबर 2020 में उसकी पत्नी अर्चना को बुखार के बाद ममता अस्पताल में भर्ती किया था। जहां पर चिकित्सकों ने दो अक्टूबर 2020 को मरीज के डेंगू की जांच के लिए माइक्रो पैथ लैब पर भेजा। आरोप है कि माइक्रो पैथ लैब पर जांच के लिए 2460 रुपये लिए और जांच में डेंगू होने की पुष्टि की। जिसके चलते अर्चना को दहशत बन गई। जबकि तीन अक्टूबर 2020 को पैथ काइंड पैथोलॉजी लैब पर जांच कराई तो उसमें डेंगू की पुष्टि नहीं हुई, लेकिन मरीज के दिल में पहली जांच रिपोर्ट से दहशत बैठ गई और उपचार के दौरान मरीज की मौत हो गई। जिसके चलते पीड़ित ने पैथोलॉजी लैब संचालक और बीमा कंपनी के खिलाफ क्षतिपूर्ति के लिए वाद दायर किया। उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष चंद्रपाल सिंह और महिला सदस्य नीलम कुमारी ने तीनों पक्षों को सुना। इस दौरान बीमा कंपनी को क्लीन चिट दे दी, लेकिन फर्जी जांच रिपोर्ट देने और जांच की धनराशि की रसीद न देने के मामले में दोषी पाया। आयोग के अध्यक्ष ने माइक्रो पैथ लैब संचालक को निर्देश दिए हैं कि 45 दिन के अंदर पीड़ित को पांच लाख रुपये क्षतिपूर्ति और पांच हजार रुपये वाद व्यय देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही मंडलायुक्त, डीएम और सीएमओ को पत्र लिखे हैं, कि माइक्रो पैथ लैब का पंजीकरण निरस्त किया जाए। साथ ही डीएम को पत्र लिखा है कि लैब और क्लीनिक संचालकों को निर्देशित किया जाए कि जांच व उपचार के लिए ली गई धनराशि का बिल बनाकर अवश्य दें।
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जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष के पीए शेखर वर्मा ने बताया कि नगर के मोहल्ला प्रेम नगर निवासी ज्ञान प्रकाश गौड़ ने शिकायत देकर बताया था कि अक्टूबर 2020 में उसकी पत्नी अर्चना को बुखार के बाद ममता अस्पताल में भर्ती किया था। जहां पर चिकित्सकों ने दो अक्टूबर 2020 को मरीज के डेंगू की जांच के लिए माइक्रो पैथ लैब पर भेजा। आरोप है कि माइक्रो पैथ लैब पर जांच के लिए 2460 रुपये लिए और जांच में डेंगू होने की पुष्टि की। जिसके चलते अर्चना को दहशत बन गई। जबकि तीन अक्टूबर 2020 को पैथ काइंड पैथोलॉजी लैब पर जांच कराई तो उसमें डेंगू की पुष्टि नहीं हुई, लेकिन मरीज के दिल में पहली जांच रिपोर्ट से दहशत बैठ गई और उपचार के दौरान मरीज की मौत हो गई। जिसके चलते पीड़ित ने पैथोलॉजी लैब संचालक और बीमा कंपनी के खिलाफ क्षतिपूर्ति के लिए वाद दायर किया। उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष चंद्रपाल सिंह और महिला सदस्य नीलम कुमारी ने तीनों पक्षों को सुना। इस दौरान बीमा कंपनी को क्लीन चिट दे दी, लेकिन फर्जी जांच रिपोर्ट देने और जांच की धनराशि की रसीद न देने के मामले में दोषी पाया। आयोग के अध्यक्ष ने माइक्रो पैथ लैब संचालक को निर्देश दिए हैं कि 45 दिन के अंदर पीड़ित को पांच लाख रुपये क्षतिपूर्ति और पांच हजार रुपये वाद व्यय देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही मंडलायुक्त, डीएम और सीएमओ को पत्र लिखे हैं, कि माइक्रो पैथ लैब का पंजीकरण निरस्त किया जाए। साथ ही डीएम को पत्र लिखा है कि लैब और क्लीनिक संचालकों को निर्देशित किया जाए कि जांच व उपचार के लिए ली गई धनराशि का बिल बनाकर अवश्य दें।
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