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Bulandshahar News: एक रुपये के पर्चे पर सिर्फ परामर्श, दवाएं मिल रहीं अस्पताल से बाहर की
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जिला अस्पताल की ओपीडी को लाइन में लग पंजीकरण कराते मरीज। संवाद
बुलंदशहर। जिला अस्पताल में इलाज के लिए एक रुपये में पंजीकरण होता है लेकिन अधिकांश मरीजों को बाहर से 500 से 2000 रुपये की दवाई खरीदनी पड़ रही है। अस्पताल के चिकित्सक एलर्जी, पेट दर्द, हाई ब्लड प्रेशर और मानसिक रोग की दवाएं बाहर से लिख रही हैं। मरीजों का कहना है कि सरकारी पर्चे के साथ एक छोटी पर्ची पकड़ा दी जाती है। मजबूरन बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ती हैं।
कल्याण सिंह राजकीय मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में दूर-दराज से प्रतिदिन 1500 से दो हजार के करीब मरीज ओपीडी में प्राथमिक उपचार कराने आते हैं। इनमें काफी संख्या में गरीब तबके के लोग होते हैं। वह किसी तरह किराए भाड़े का इंतजाम कर अस्पताल तो आ जाते हैं लेकिन उन्हें यहां आकर बाहर की दवा लेने के लिए मजबूर होना पड़ जाता है। चिकित्सकों का तर्क होता है कि अस्पताल में मौजूद दवाइयां व जेनरिक दवाएं असरदार नहीं होती हैं, अगर जल्दी स्वास्थ्य होना है तो पेटेंट दवाएं लें। जबकि शासन ने बाहर की दवाएं लिखने पर कुछ माह पूर्व ही पाबंदी लगाई थी।
मरीज ने सीएमओ से की शिकायत
जिला अस्पताल के चिकित्सक द्वारा बाहर की दवाएं लिखने पर किरनपाल सिंह ने सीएमओ ने शिकायत की। शुरखुरु निवासी मरीज किरनपाल सिंह ने बताया कि उसका इलाज अभी तक दिल्ली चल रहा था। दिल्ली से वापस गांव आ गया। चिकित्सक को पुराने इलाज के पर्चे दिखाए तो उन्होंने दवा लिखकर दी है। कहा कि यह दवाएं बाहर मेडिकल स्टोर से ले लो। सही हो जाओगे।
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बोले मरीज
पांच में तीन दवाएं मिलती है बाहर से
काफी समय से मनोचिकित्सक से इलाज करवा रहा हूं। पांच से छह तरह की दवाएं लिखकर देते हैं। इसमें दो दवाएं अस्पताल से तो शेष तीन से चार दवाएं बाहर सिर्फ एक ही मेडिकल स्टोर पर मिलती हैं। पांच दिन की दवा 444 रुपये की मिली हैं। - सुभाष, मरीज
2200 रुपये की मिलती है दवा
मनोचिकित्सक से इलाज करवा रहा हूं। चिकित्सक यहां पर दवाएं न होने की हर बार बात कहते हैं। मजबूरन बाहर से दवा लेनी पड़ती हैं। एक सप्ताह की दवा करीब 2200 रुपये की मिलती हैं। - आमिर, तीमारदार
अस्पताल के गेट के बाहर से लेनी पड़ी दवा
एलर्जी होने पर चिकित्सक को दिखाया। महिला चिकित्सक ने कुछ दवाएं लिखकर दी। इसमें दो दवाएं बाहर के एक मेडिकल स्टोर से लेने को कहा। जिसने प्रिंट रेट पर दवा दी हैं। - मोहम्मद जैद, मरीज
पेटदर्द होने की बाहर से मंगवाई दवा
पिछले कई दिनों से पेट में दर्द हो रहा है। चिकित्सक को दिखाया तो उन्होंने अस्पताल की दवा के साथ एक दवा बाहर के मेडिकल स्टोर से लेने को कहा। - आतिफ, मरीज
जिला अस्पताल से एक मरीज ने बाहर की दवा लिखने की शिकायत की। मामला जिला अस्पताल से जुड़ा होने पर मरीज को सीएमएस के पास भेज दिया गया। - डॉ. विनय कुमार सिंह, सीएमओ
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सभी चिकित्सकों को बाहर की दवा न लिखने के निर्देश दिए हैं। यदि कोई दवा लिख रहा है तो संबंधित पर कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. मनीषा जिंदल, प्रधानाचार्य कल्याण सिंह राजकीय मेडिकल कॉलेज
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कल्याण सिंह राजकीय मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में दूर-दराज से प्रतिदिन 1500 से दो हजार के करीब मरीज ओपीडी में प्राथमिक उपचार कराने आते हैं। इनमें काफी संख्या में गरीब तबके के लोग होते हैं। वह किसी तरह किराए भाड़े का इंतजाम कर अस्पताल तो आ जाते हैं लेकिन उन्हें यहां आकर बाहर की दवा लेने के लिए मजबूर होना पड़ जाता है। चिकित्सकों का तर्क होता है कि अस्पताल में मौजूद दवाइयां व जेनरिक दवाएं असरदार नहीं होती हैं, अगर जल्दी स्वास्थ्य होना है तो पेटेंट दवाएं लें। जबकि शासन ने बाहर की दवाएं लिखने पर कुछ माह पूर्व ही पाबंदी लगाई थी।
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मरीज ने सीएमओ से की शिकायत
जिला अस्पताल के चिकित्सक द्वारा बाहर की दवाएं लिखने पर किरनपाल सिंह ने सीएमओ ने शिकायत की। शुरखुरु निवासी मरीज किरनपाल सिंह ने बताया कि उसका इलाज अभी तक दिल्ली चल रहा था। दिल्ली से वापस गांव आ गया। चिकित्सक को पुराने इलाज के पर्चे दिखाए तो उन्होंने दवा लिखकर दी है। कहा कि यह दवाएं बाहर मेडिकल स्टोर से ले लो। सही हो जाओगे।
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बोले मरीज
पांच में तीन दवाएं मिलती है बाहर से
काफी समय से मनोचिकित्सक से इलाज करवा रहा हूं। पांच से छह तरह की दवाएं लिखकर देते हैं। इसमें दो दवाएं अस्पताल से तो शेष तीन से चार दवाएं बाहर सिर्फ एक ही मेडिकल स्टोर पर मिलती हैं। पांच दिन की दवा 444 रुपये की मिली हैं। - सुभाष, मरीज
2200 रुपये की मिलती है दवा
मनोचिकित्सक से इलाज करवा रहा हूं। चिकित्सक यहां पर दवाएं न होने की हर बार बात कहते हैं। मजबूरन बाहर से दवा लेनी पड़ती हैं। एक सप्ताह की दवा करीब 2200 रुपये की मिलती हैं। - आमिर, तीमारदार
अस्पताल के गेट के बाहर से लेनी पड़ी दवा
एलर्जी होने पर चिकित्सक को दिखाया। महिला चिकित्सक ने कुछ दवाएं लिखकर दी। इसमें दो दवाएं बाहर के एक मेडिकल स्टोर से लेने को कहा। जिसने प्रिंट रेट पर दवा दी हैं। - मोहम्मद जैद, मरीज
पेटदर्द होने की बाहर से मंगवाई दवा
पिछले कई दिनों से पेट में दर्द हो रहा है। चिकित्सक को दिखाया तो उन्होंने अस्पताल की दवा के साथ एक दवा बाहर के मेडिकल स्टोर से लेने को कहा। - आतिफ, मरीज
जिला अस्पताल से एक मरीज ने बाहर की दवा लिखने की शिकायत की। मामला जिला अस्पताल से जुड़ा होने पर मरीज को सीएमएस के पास भेज दिया गया। - डॉ. विनय कुमार सिंह, सीएमओ
सभी चिकित्सकों को बाहर की दवा न लिखने के निर्देश दिए हैं। यदि कोई दवा लिख रहा है तो संबंधित पर कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. मनीषा जिंदल, प्रधानाचार्य कल्याण सिंह राजकीय मेडिकल कॉलेज