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Bulandshahar News: एमएमआर मॉल और नर्सिंग होम संचालक डिफाल्टर घोषित
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एमएमआर मॉल और नर्सिंग होम संचालक डिफाल्टर घोषित
बुलंदशहर। बुलंदशहर विकास प्राधिकरण (बीडीए) ने भुगतान न करने पर गंगानगर स्थित एक नर्सिंग होम और एमएमआर मॉल संचालक को डिफाल्टर घोषित कर दिया है। भुगतान करने के लिए एक सप्ताह का समय और दिया है। इसके बाद दोनों के भूखंड का आवंटन निरस्त कर दिया जाएगा।
बीडीए उपाध्यक्ष डॉ. अंकुर लाठर ने बताया कि वर्ष 2011 में गंगानगर योजना के तहत एमएमआर मॉल को 7610.50 वर्ग मीटर और नर्सिंग होम संचालन के लिए 1205.05 वर्ग मीटर का क्षेत्रफल आवंटित किया था। दोनों आवंटियों ने समय पर भुगतान नहीं किया। इसके बाद एक मुश्त समाधान (ओटीएस) योजना के तहत भुगतान करने की छूट दी गई। इस समय अवधि पर भी दोनों आवंटियों भुगतान नहीं किया। बीडीए उपाध्यक्ष के मुताबिक दोनों आवंटियों को ब्याज समेत समस्त धनराशि एक सप्ताह में जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। एक सप्ताह में समस्त धनराशि जमा न करने पर भूखंड को निरस्त कर दिया जाएगा।
2013 में भी हुए थे डिफाल्टर
बीडीए उपाध्यक्ष के अनुसार एमएमआर मॉल संचालक को भूखंड की धनराशि जमा न करने पर वर्ष 2013 में भी डिफाल्टर की सूची में डाला गया था। इसके बाद संचालक ने दो वर्ष में शेष धनराशि को जमा करने के लिए प्रार्थना पत्र दिया था, लेकिन अप्रैल 2022 तक भुगतान नहीं किया गया।
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बुलंदशहर। बुलंदशहर विकास प्राधिकरण (बीडीए) ने भुगतान न करने पर गंगानगर स्थित एक नर्सिंग होम और एमएमआर मॉल संचालक को डिफाल्टर घोषित कर दिया है। भुगतान करने के लिए एक सप्ताह का समय और दिया है। इसके बाद दोनों के भूखंड का आवंटन निरस्त कर दिया जाएगा।
बीडीए उपाध्यक्ष डॉ. अंकुर लाठर ने बताया कि वर्ष 2011 में गंगानगर योजना के तहत एमएमआर मॉल को 7610.50 वर्ग मीटर और नर्सिंग होम संचालन के लिए 1205.05 वर्ग मीटर का क्षेत्रफल आवंटित किया था। दोनों आवंटियों ने समय पर भुगतान नहीं किया। इसके बाद एक मुश्त समाधान (ओटीएस) योजना के तहत भुगतान करने की छूट दी गई। इस समय अवधि पर भी दोनों आवंटियों भुगतान नहीं किया। बीडीए उपाध्यक्ष के मुताबिक दोनों आवंटियों को ब्याज समेत समस्त धनराशि एक सप्ताह में जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। एक सप्ताह में समस्त धनराशि जमा न करने पर भूखंड को निरस्त कर दिया जाएगा।
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2013 में भी हुए थे डिफाल्टर
बीडीए उपाध्यक्ष के अनुसार एमएमआर मॉल संचालक को भूखंड की धनराशि जमा न करने पर वर्ष 2013 में भी डिफाल्टर की सूची में डाला गया था। इसके बाद संचालक ने दो वर्ष में शेष धनराशि को जमा करने के लिए प्रार्थना पत्र दिया था, लेकिन अप्रैल 2022 तक भुगतान नहीं किया गया।
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