फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bulandshahar News ›   medicine

पांच महीने में 1500 से अधिक मरीजों को बांट दी खराब दवा

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 02 Mar 2022 10:14 PM IST
विज्ञापन
medicine
जिला अस्पताल में खराब दवा। - फोटो : BULANDSHAHR
पांच महीने में 1500 से अधिक मरीजों को बांट दी खराब दवा
विज्ञापन

बुलंदशहर। जिला अस्पताल में सील बंद पत्ते में टूटी और गीली टेबलेट निकलने के बाद भी 1500 से अधिक मरीजों को करीब 14 हजार टेबलेट वितरित कर दी गई। दवा खाने से आराम न मिलने पर मरीजों ने अस्पताल प्रशासन से शिकायत की और टेबलेट की स्थिति के बारे में अवगत कराया। इसके बाद दवा का वितरण बंद कराया गया।
मानसिक रोग में काम आने वाली सोडियम वल्प्रोएट दवा अक्तूबर में लखनऊ कारपोरेशन से जिला अस्पताल को मिली थी। इन 20 हजार टेबलेट को समय-समय पर औषधि भंडार से मानसिक रोग विभाग में भेजा गया। अक्तूबर से लगातार मरीजों को दवाओं का वितरण किया जा रहा था। मरीजों की शिकायत के बाद आनन-फानन में दवा को वितरण कक्ष से हटाकर अलग स्थान पर रखवा दिया गया है। वितरण पर रोक लगने से पूर्व 14 हजार से अधिक टेबलेट मरीजों को वितरित हो चुकी थी। जिला अस्पताल के औषधि भंडार के चीफ फार्मासिस्ट मदन लाल ने बताया कि अस्पताल में उप्र कारपोरेशन से दवाओं की आपूर्ति प्राप्त होती है। वर्तमान में 5500 टेबलेट बची हैं, इन्हें वापस भेजा जाएगी।
विज्ञापन

पिछले दिनों से लगातार आ रहे थे मरीज दवा बदलने
जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. धीरेंद्र प्रताप ने बताया कि ओपीडी में सप्ताह में तीन दिन बैठते हैं। कुछ दिनों से मरीज सोडियम वल्प्रोएट दवा बदलने आ रहे थे। चेक किया तो दवा सील बंद पत्ते में टूटी और गीली मिली। इसके बाद दवा स्टोर संचालक को जानकारी दी गई।
विज्ञापन
विज्ञापन

बोले मरीज
बहन का इलाज चल रहा है। अस्पताल से जो दवाएं दी गईं वह खराब निकल रही हैं। संबंधित दवाओं को अस्पताल में वापस करने आया हूं। - रिहान, तीमारदार
जिला अस्पताल अस्पताल से दी गई दवाएं खराब निकलने पर वापस कर दी। बाजार से संबंधित दवाएं महंगी दर पर मिल रही है।
- जीशान, मरीज
संबंधित दवाओं को वापस कराया जा रहा है। फिलहाल सोडियम वल्प्रोएट के वितरण पर रोक लगा दी गई है। दवा उप्र कारपोरेशन के माध्यम से आई है। - डॉ. राजीव प्रसाद, सीएमएस
मामले की जानकारी नहीं है। सीएमएसडी में संबंधित दवा के बारें में जानकारी ली जाएगी। यदि सीएमएसडी में भी दवाएं खराब मिलती हैं तो कारपोरेशन को वापस भेजकर बदलवा दिया जाएगा। - डॉ. विनय कुमार सिंह, सीएमओ

नहीं करना चाहिए गीली दवा का प्रयोग
आइएमए के अध्यक्ष डॉ. संजीव अग्रवाल ने बताया कि गीली और टूटी दवा का असर बहुत कम हो जाता है। टूटी दवा प्रयोग में आ भी सकती है, लेकिन गीली दवा का सेवन नहीं करना चाहिए। बुलंदशहर जिला औषधि विक्रेता समिति के कोषाध्यक्ष अनिल गोयल ने बताया कि उचित रखरखाव न होने के कारण दवा में सीलन पहुंच जाती है। सील बंद पत्ते में सीलन पहुंच गई है और दवा टूट गई है तो उसकी गुणवत्ता पर संदेह है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed