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बुलंदशहर: तीन साल की प्रतिनियुक्ति पर जाएंगे विशेषज्ञ और कर्मी
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तीन साल की प्रतिनियुक्ति पर जाएंगे विशेषज्ञ और कर्मी
बुलंदशहर। प्रदेश सरकार ने जिला अस्पताल और जिला महिला अस्पताल को उच्चीकृत करते हुए मेडिकल कॉलेज में विलय कर दिया है। जल्द ही यहां अन्य मेडिकल कॉलेज की तर्ज पर मरीजों को बेहतर इलाज की सुविधाएं मिलनी शुरू हो जाएंगी। दोनों अस्पतालों में तैनात विशेषज्ञ चिकित्सक और अन्य स्टाफ को न्यूनतम तीन साल की प्रतिनियुक्ति पर भेजा जाएगा। एक अप्रैल से दोनों अस्पताल के चिकित्सक, विशेषज्ञ और स्टाफ का मेडिकल कॉलेज में विलय होने के साथ प्रतिनियुक्ति शुरू हो जाएगी। इस संबंध में चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव ने आदेश जारी कर दिया है।
जिला अस्पताल में निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज को जल्द मान्यता मिलने वाली है। इसके बाद यहां के विशेषज्ञ चिकित्सक (एमडी-एमएस) मेडिकल छात्रों को पढ़ाने के साथ ही मरीजों का इलाज भी करेंगे। इससे जिले के मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलेगा। मेडिकल कॉलेज की वजह से यहां पर कई चिकित्सकों की तैनाती भी होगा। इसके अलावा जांच की भी सुविधा बढ़ेगी। इसके लिए जिला महिला व पुरुष अस्पताल को अप्रैल 2023 में मेडिकल कॉलेज में समायोजित कर दिया जाएगा। इन अस्पतालों में कार्यरत चिकित्सा कर्मियों को भी तीन साल के लिए प्रतिनियुक्ति पर मेडिकल कॉलेज में तैनात किया जाएगा। तीन साल का कार्यकाल पूरा होने के दौरान इनका कार्यकाल दो साल के लिए बढ़ाया जा सकता है। इसके बाद प्रतिनियुक्ति पर भेजे जा रहे चिकित्सक व अन्य कर्मी गैर जिलों को स्थानांतरित किए जा सकते हैं या मुख्य चिकित्सा अधिकारी के अधीन काम कर सकते हैं।
इन्हें प्रतिनियुक्ति पर मिलेगी तैनाती
जिला महिला-पुरुष अस्पताल से पूर्व में शासन को समस्त स्टाफ का डाटा भेजा गया था। विभागीय अफसरों के अनुसार जिला अस्पताल में तैनात सीएमएस समेत 15 चिकित्सक, छह फार्मासिस्ट, एक ऑप्टोमेट्रिस्ट, चार टेक्नीशियन, 12 स्टाफ नर्स, 18 वार्ड ब्वॉय, तीन वार्ड आया, सात यूनीसेफ कर्मी और अधिकारी, 47 संविदा और अस्पताल से संबंध चिकित्सक और कर्मी व 25 अन्य कर्मी आदि का डाटा भेजा गया था। जिला महिला अस्पताल से सीएमएस व चार स्त्री रोग विशेषज्ञ, तीन बाल रोग विशेषज्ञ, दो रेडियोलॉजिस्ट, दो पैथोलॉजिस्ट, एक निश्चेतक समेत करीब 100 नियमित, संविदा और संबंध चिकित्सक, कर्मी आदि का डाटा भेजा गया है। अब इन दोनों अस्पतालों का स्टाफ 31 मार्च से चिकित्सा एवं शिक्षा विभाग के अधीन हो जाएगा। एक अप्रैल से इनकी प्रतिनियुक्ति शुरू हो जाएगी।
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अभी नहीं मिलती हैं ये सुविधाएं
जिला अस्पताल में अभी तक एमआरआई, ईको, सीटी स्कैन, ईसीजी जैसी जांच की सुविधा नहीं है। इसके अलावा हृदय रोग, ईएनटी रोगी, अस्थि रोग से गंभीर मरीजों को हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है। साथ ही कैंसर के इलाज व काउंसिलिंग की भी सुविधा नहीं है। वहीं, डिजीटल एक्सरे की मशीन काफी समय से खराब पड़ी हुई है तो बर्न वार्ड के लिए स्टाफ नहीं है। मेडिकल कॉलेज में यह सारी सुविधाएं होंगी। मेडिकल कॉलेज शुरू होने पर मरीज को हायर सेंटर रेफर नहीं किया जाएगा। गंभीर रोगियों को चिकित्सक अगर जरूरी समझेंगे तो ही हायर सेंटर रेफर करेंगे।
जिला महिला-पुरुष अस्पताल में पहले से नियुक्त चिकित्सक समेत समस्त स्टाफ मेडिकल कॉलेज में मर्ज कर दिए जाएंगे। मेडिकल कॉलेज में चिकित्सकों की देखरेख में मेडिकल छात्र भी मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण करेंगे। इससे अस्पताल में चिकित्सकों की कमी दूर हो जाएगी। - डॉ. मनीषा जिंदल, प्राचार्या मेडिकल कॉलेज
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बुलंदशहर। प्रदेश सरकार ने जिला अस्पताल और जिला महिला अस्पताल को उच्चीकृत करते हुए मेडिकल कॉलेज में विलय कर दिया है। जल्द ही यहां अन्य मेडिकल कॉलेज की तर्ज पर मरीजों को बेहतर इलाज की सुविधाएं मिलनी शुरू हो जाएंगी। दोनों अस्पतालों में तैनात विशेषज्ञ चिकित्सक और अन्य स्टाफ को न्यूनतम तीन साल की प्रतिनियुक्ति पर भेजा जाएगा। एक अप्रैल से दोनों अस्पताल के चिकित्सक, विशेषज्ञ और स्टाफ का मेडिकल कॉलेज में विलय होने के साथ प्रतिनियुक्ति शुरू हो जाएगी। इस संबंध में चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव ने आदेश जारी कर दिया है।
जिला अस्पताल में निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज को जल्द मान्यता मिलने वाली है। इसके बाद यहां के विशेषज्ञ चिकित्सक (एमडी-एमएस) मेडिकल छात्रों को पढ़ाने के साथ ही मरीजों का इलाज भी करेंगे। इससे जिले के मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलेगा। मेडिकल कॉलेज की वजह से यहां पर कई चिकित्सकों की तैनाती भी होगा। इसके अलावा जांच की भी सुविधा बढ़ेगी। इसके लिए जिला महिला व पुरुष अस्पताल को अप्रैल 2023 में मेडिकल कॉलेज में समायोजित कर दिया जाएगा। इन अस्पतालों में कार्यरत चिकित्सा कर्मियों को भी तीन साल के लिए प्रतिनियुक्ति पर मेडिकल कॉलेज में तैनात किया जाएगा। तीन साल का कार्यकाल पूरा होने के दौरान इनका कार्यकाल दो साल के लिए बढ़ाया जा सकता है। इसके बाद प्रतिनियुक्ति पर भेजे जा रहे चिकित्सक व अन्य कर्मी गैर जिलों को स्थानांतरित किए जा सकते हैं या मुख्य चिकित्सा अधिकारी के अधीन काम कर सकते हैं।
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इन्हें प्रतिनियुक्ति पर मिलेगी तैनाती
जिला महिला-पुरुष अस्पताल से पूर्व में शासन को समस्त स्टाफ का डाटा भेजा गया था। विभागीय अफसरों के अनुसार जिला अस्पताल में तैनात सीएमएस समेत 15 चिकित्सक, छह फार्मासिस्ट, एक ऑप्टोमेट्रिस्ट, चार टेक्नीशियन, 12 स्टाफ नर्स, 18 वार्ड ब्वॉय, तीन वार्ड आया, सात यूनीसेफ कर्मी और अधिकारी, 47 संविदा और अस्पताल से संबंध चिकित्सक और कर्मी व 25 अन्य कर्मी आदि का डाटा भेजा गया था। जिला महिला अस्पताल से सीएमएस व चार स्त्री रोग विशेषज्ञ, तीन बाल रोग विशेषज्ञ, दो रेडियोलॉजिस्ट, दो पैथोलॉजिस्ट, एक निश्चेतक समेत करीब 100 नियमित, संविदा और संबंध चिकित्सक, कर्मी आदि का डाटा भेजा गया है। अब इन दोनों अस्पतालों का स्टाफ 31 मार्च से चिकित्सा एवं शिक्षा विभाग के अधीन हो जाएगा। एक अप्रैल से इनकी प्रतिनियुक्ति शुरू हो जाएगी।
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अभी नहीं मिलती हैं ये सुविधाएं
जिला अस्पताल में अभी तक एमआरआई, ईको, सीटी स्कैन, ईसीजी जैसी जांच की सुविधा नहीं है। इसके अलावा हृदय रोग, ईएनटी रोगी, अस्थि रोग से गंभीर मरीजों को हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है। साथ ही कैंसर के इलाज व काउंसिलिंग की भी सुविधा नहीं है। वहीं, डिजीटल एक्सरे की मशीन काफी समय से खराब पड़ी हुई है तो बर्न वार्ड के लिए स्टाफ नहीं है। मेडिकल कॉलेज में यह सारी सुविधाएं होंगी। मेडिकल कॉलेज शुरू होने पर मरीज को हायर सेंटर रेफर नहीं किया जाएगा। गंभीर रोगियों को चिकित्सक अगर जरूरी समझेंगे तो ही हायर सेंटर रेफर करेंगे।
जिला महिला-पुरुष अस्पताल में पहले से नियुक्त चिकित्सक समेत समस्त स्टाफ मेडिकल कॉलेज में मर्ज कर दिए जाएंगे। मेडिकल कॉलेज में चिकित्सकों की देखरेख में मेडिकल छात्र भी मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण करेंगे। इससे अस्पताल में चिकित्सकों की कमी दूर हो जाएगी। - डॉ. मनीषा जिंदल, प्राचार्या मेडिकल कॉलेज