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ममता हत्याकांड : हत्या के दोषी पति को आजीवन कारावास

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 07 Nov 2024 10:29 PM IST
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Mamta murder case: Life imprisonment to husband convicted of murder
बुलंदशहर। नगर कोतवाली क्षेत्र में दिसंबर 2022 को हुए ममता हत्याकांड में बृहस्पतिवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश न्याय कक्ष संख्या प्रथम के न्यायाधीश विजयपाल ने हत्यारोपी पति कमल को दोषी करार दिया है। साथ ही अभियुक्त को आजीवन कारावास व दस हजार रुपये का अर्थदंड सुनाया है।
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नगर कोतवाली में 19 दिसंबर 2022 को गांव पहाड़पुर निवासी वादी प्रमोद कुमार सिंह ने तहरीर दी थी। इसमें उन्होंने बताया था कि उनकी बहन ममता देवी की शादी वर्ष 2007 में नगर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला राधानगर निवासी युवक कमल से हुई थी। शादी के कुछ माह बाद से ही आरोपी पति उनकी बहन को परेशान करने लगा। कई बार आरोपी को मायके पक्ष ने समझाने का प्रयास भी किया। लेकिन, अपनी हरकतों से बाज नहीं आया। आरोप है कि नौ दिसंबर 2022 को उनकी बहन के किसी पड़ोसी ने फोन कर ममता की मौत की जानकारी दी। जब पीड़ित पक्ष मौके पर पहुंचे तो मृतका ममता के गले में साड़ी का फंदा पड़ा था। चेहरे पर खून के निशान थे। कोतवाली पुलिस ने मामले में रिपोर्ट दर्जकर जांच शुरू कर दी। जांच कर आरोपी पति कमल के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया गया। मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश न्याय कक्ष संख्या प्रथम के न्यायाधीश विजयपाल के न्यायालय में हुई। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों के गवाहों के बयान, साक्ष्यों का अवलोकनकर आरोपी पति कमल को दोषी करार दिया है। साथ ही बृहस्पतिवार को न्यायाधीश विजयपाल ने अभियुक्त कमल को आजीवन कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड सुनाया है।
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दुष्कर्म में दस वर्ष कारावास, 30 हजार का अर्थदंड
बुलंदशहर। थाना रामघाट क्षेत्र में वर्ष 2021 में एक किशोरी के साथ कस्बा निवासी युवक महाराज सिंह ने दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया था। इस मामले में पीड़िता के परिजनों ने नामजद आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने आरोपी को उसी दौरान गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। साथ ही 14 सितंबर 2021 को रामघाट थाना पुलिस ने मामले की जांच पूरी कर आरोपी के खिलाफ चार्जशीट तैयार कर न्यायालय में दाखिल कर दी थी। मामला एडीजे अनूपशहर विनीत चौधरी के न्यायालय में विचाराधीन था। जिस पर अब बृहस्पतिवार को न्यायालय ने दोनों पक्षों के गवाहों के बयानों और साक्ष्यों का अवलोकन कर अभियुक्त महाराज सिंह को दोषी करार दिया है। साथ ही उसे दस वर्ष का कारावास व 30 हजार रुपये का अर्थदंड सुनाया है।
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