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पांच सेवाएं, जिले में फिर भी 13 हजार बच्चे कुपोषित
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पांच सेवाएं, जिले में फिर भी 13 हजार बच्चे कुपोषित
बुलंदशहर। शासन की ओर से बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से बच्चों को कुपोषण से निजात दिलाने के लिए पांच सेवाएं चल रही हैं। यह सभी सेवाएं दिखावे के लिए चल रही हैं। एक माह में दिए जाने वाला आधा-आधा किलो दलिया, चना और चावल से कुपोषण दूर किया जा रहा है। जिले में वर्तमान में 13,696 कुपोषित बच्चे हैं। इनमें अति कुपोषित लाल श्रेणी वाले बच्चों की संख्या 3797 हैं जबकि कुपोषित पीली श्रेणी वाले बच्चों 9939 हैं। अफसर दावा कर रहे हैं कि जिला जल्द कुपोषण से मुक्त होगा। अभिभावकों का कहना है कि मासिक अनुपूरक पुष्टाहार भी समय पर नहीं मिल रहा है।
जिले में मंगलवार से राष्ट्रीय पोषण माह की की शुरुआत हो गई है। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग द्वारा अनुपूरक पोषाहार, स्वास्थ्य प्रतिरक्षण (टीकाकरण), स्वास्थ्य जांच, पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा, पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा आदि योजनाएं चलाई जा रही हैं। विभाग के नेतृत्व में संचालित योजनाओं का लाभ बच्चों और उनके परिवार को दिलवाया जा रहा है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से गेहूं, चावल, दाल और खाद्य तेल भी वितरित किया जा रहा है। हालांकि, तेल हर माह नहीं मिल पाता है, लेकिन बाकी अनुपूरक आहार वितरित किया जाता है। हर माह लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद बच्चों पर कुपोषण का दंश हावी है। पिछले तीन सालों में कुपोषित बच्चों की संख्या में कमी आई, लेकिन पैदा होने के साथ ही बच्चे कुपोषित हो रहे हैं। इसके लिए गर्भवती महिलाओं को भी पोषाहार दिया जाता है, लेकिन उसके बावजूद कुपोषण दंश झेलने को बच्चे मजबूर हैं। एक गांव की महिला चंद्रवती और एक अन्य गांव की महिला राजेश व गीता ने बताया कि उनके बच्चों को समय पर पोषाहार नहीं मिलता है। बता दें कि जिले में 3967 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। जहां से बच्चों और अन्य लाभार्थियों को मासिक अनुपूरक पुष्टाहार उपलब्ध करवाया जाता है। जबकि स्वस्थ्य विभाग की ओर से पांच तरह की दवाई कुपोषण से निजात दिलाने के लिए दी जाती हैं।
छह माह से तीन वर्ष आयु के बच्चे को एक किलो गेहूं का दलिया, एक किलो चावल, एक किलो चना की दाल और 455 ग्राम खाद्य तेल।
- तीन वर्ष से छह वर्ष तक आयु के बच्चे को 500 ग्राम गेहूं का दलिया, 500 ग्राम चावल, 500 ग्राम चना की दाल।
- छह माह से छह वर्ष आयु के अति कुपोषित बच्चों को 1.5 किलो गेहूं का दलिया, 1.5 किलो चावल, दो किलो चना की दाल और 455 ग्राम खाद्य तेल।
- स्वास्थ्य विभाग की ओर से कुपोषित बच्चों को कीड़े मारने की दवा, आयरन व विटामिन आदि पांच तरह की दवाएं दी जाती हैं। पोषण पुनर्वास भी है, जहां पर 10 बेड की सुविधा है। जहां पर गंभीर बच्चों का इलाज किया जाता है।
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अफसरों का दावा है पोषण पुनर्वास मेरठ मंडल में पहले स्थान पर है।
पिछले तीन साल में कुपोषित बच्चों की संख्या
वर्ष - कुल कुपोषित बच्चों की संख्या
2020- 15, 620
2021- 14, 970
2022- 13,696
202 आंगनबाड़ी केंद्र और 300 बच्चों को लिया है गोद
विभागीय अधिकारियों ने जिले को कुपोषण से मुक्त करवाने के लिए एक पहल शुरू की है। इसके तहत 202 आंगनबाड़ी को प्रशासनिक अधिकारियों ने गोद लिया है। जबकि विभागीय अधिकारियों ने 300 बच्चों को गोद लिया हुआ है। फिर भी कुपोषण से निजात मिलने की संभावना दिखाई नहीं दे रही है।
कुपोषण के लक्षण
- बच्चे का वजन नहीं बढ़ता है। जन्म के समय दो किलो से कम बचन वाला बच्चा कुपोषण की श्रेणी में आता है।
- उम्र बढ़ने के साथ ही बच्चे की लंबाई न बढ़ना।
- बच्चे में सुस्ती और चिड़चिड़ापन रहना।
- अति कुपोषित बच्चे बैठ नहीं पाते हैं। खेलकूद में भी उनकी रुचि नहीं होती है।
- बार-बार कई प्रकार की बीमारियों से बच्चे का ग्रसित होना।
- जन्म से लेकर दो साल तक बच्चे को रोज तीन कप दूध पिलाएं।
- छह माह की आयु तक बच्चे को मां अपना दूध पिलाए।
- रोजाना डेढ़ से दो कटोरी दाल व दलिया दिया जाए।
- मिलाजुला अनाज की रोटी बनाकर खिलानी चाहिए।
- बच्चे को उबला हुआ पानी देना चाहिए। ताकि किसी तरह संक्रमण न फैले।
- बच्चे को मौसमी फल का सेवन जरूर कराना चाहिए।
कुपोषित बच्चों की संख्या में कमी आई है, लेकिन वर्तमान में भी काफी बच्चे कुपोषित और अति कुपोषित हैं, जिनको कुपोषण से बाहर लाने के लिए तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। - दीप्ति त्रिपाठी, जिला कार्यक्रम अधिकारी।
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बुलंदशहर। शासन की ओर से बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से बच्चों को कुपोषण से निजात दिलाने के लिए पांच सेवाएं चल रही हैं। यह सभी सेवाएं दिखावे के लिए चल रही हैं। एक माह में दिए जाने वाला आधा-आधा किलो दलिया, चना और चावल से कुपोषण दूर किया जा रहा है। जिले में वर्तमान में 13,696 कुपोषित बच्चे हैं। इनमें अति कुपोषित लाल श्रेणी वाले बच्चों की संख्या 3797 हैं जबकि कुपोषित पीली श्रेणी वाले बच्चों 9939 हैं। अफसर दावा कर रहे हैं कि जिला जल्द कुपोषण से मुक्त होगा। अभिभावकों का कहना है कि मासिक अनुपूरक पुष्टाहार भी समय पर नहीं मिल रहा है।
जिले में मंगलवार से राष्ट्रीय पोषण माह की की शुरुआत हो गई है। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग द्वारा अनुपूरक पोषाहार, स्वास्थ्य प्रतिरक्षण (टीकाकरण), स्वास्थ्य जांच, पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा, पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा आदि योजनाएं चलाई जा रही हैं। विभाग के नेतृत्व में संचालित योजनाओं का लाभ बच्चों और उनके परिवार को दिलवाया जा रहा है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से गेहूं, चावल, दाल और खाद्य तेल भी वितरित किया जा रहा है। हालांकि, तेल हर माह नहीं मिल पाता है, लेकिन बाकी अनुपूरक आहार वितरित किया जाता है। हर माह लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद बच्चों पर कुपोषण का दंश हावी है। पिछले तीन सालों में कुपोषित बच्चों की संख्या में कमी आई, लेकिन पैदा होने के साथ ही बच्चे कुपोषित हो रहे हैं। इसके लिए गर्भवती महिलाओं को भी पोषाहार दिया जाता है, लेकिन उसके बावजूद कुपोषण दंश झेलने को बच्चे मजबूर हैं। एक गांव की महिला चंद्रवती और एक अन्य गांव की महिला राजेश व गीता ने बताया कि उनके बच्चों को समय पर पोषाहार नहीं मिलता है। बता दें कि जिले में 3967 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। जहां से बच्चों और अन्य लाभार्थियों को मासिक अनुपूरक पुष्टाहार उपलब्ध करवाया जाता है। जबकि स्वस्थ्य विभाग की ओर से पांच तरह की दवाई कुपोषण से निजात दिलाने के लिए दी जाती हैं।
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छह माह से तीन वर्ष आयु के बच्चे को एक किलो गेहूं का दलिया, एक किलो चावल, एक किलो चना की दाल और 455 ग्राम खाद्य तेल।
- तीन वर्ष से छह वर्ष तक आयु के बच्चे को 500 ग्राम गेहूं का दलिया, 500 ग्राम चावल, 500 ग्राम चना की दाल।
- छह माह से छह वर्ष आयु के अति कुपोषित बच्चों को 1.5 किलो गेहूं का दलिया, 1.5 किलो चावल, दो किलो चना की दाल और 455 ग्राम खाद्य तेल।
- स्वास्थ्य विभाग की ओर से कुपोषित बच्चों को कीड़े मारने की दवा, आयरन व विटामिन आदि पांच तरह की दवाएं दी जाती हैं। पोषण पुनर्वास भी है, जहां पर 10 बेड की सुविधा है। जहां पर गंभीर बच्चों का इलाज किया जाता है।
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अफसरों का दावा है पोषण पुनर्वास मेरठ मंडल में पहले स्थान पर है।
पिछले तीन साल में कुपोषित बच्चों की संख्या
वर्ष - कुल कुपोषित बच्चों की संख्या
2020- 15, 620
2021- 14, 970
2022- 13,696
202 आंगनबाड़ी केंद्र और 300 बच्चों को लिया है गोद
विभागीय अधिकारियों ने जिले को कुपोषण से मुक्त करवाने के लिए एक पहल शुरू की है। इसके तहत 202 आंगनबाड़ी को प्रशासनिक अधिकारियों ने गोद लिया है। जबकि विभागीय अधिकारियों ने 300 बच्चों को गोद लिया हुआ है। फिर भी कुपोषण से निजात मिलने की संभावना दिखाई नहीं दे रही है।
कुपोषण के लक्षण
- बच्चे का वजन नहीं बढ़ता है। जन्म के समय दो किलो से कम बचन वाला बच्चा कुपोषण की श्रेणी में आता है।
- उम्र बढ़ने के साथ ही बच्चे की लंबाई न बढ़ना।
- बच्चे में सुस्ती और चिड़चिड़ापन रहना।
- अति कुपोषित बच्चे बैठ नहीं पाते हैं। खेलकूद में भी उनकी रुचि नहीं होती है।
- बार-बार कई प्रकार की बीमारियों से बच्चे का ग्रसित होना।
- जन्म से लेकर दो साल तक बच्चे को रोज तीन कप दूध पिलाएं।
- छह माह की आयु तक बच्चे को मां अपना दूध पिलाए।
- रोजाना डेढ़ से दो कटोरी दाल व दलिया दिया जाए।
- मिलाजुला अनाज की रोटी बनाकर खिलानी चाहिए।
- बच्चे को उबला हुआ पानी देना चाहिए। ताकि किसी तरह संक्रमण न फैले।
- बच्चे को मौसमी फल का सेवन जरूर कराना चाहिए।
कुपोषित बच्चों की संख्या में कमी आई है, लेकिन वर्तमान में भी काफी बच्चे कुपोषित और अति कुपोषित हैं, जिनको कुपोषण से बाहर लाने के लिए तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। - दीप्ति त्रिपाठी, जिला कार्यक्रम अधिकारी।