फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bulandshahar News ›   kali river polution

सरकारी फाइलों में ही दबकर रह गई ‘काली की किस्मत’

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 04 Jun 2021 11:32 PM IST
विज्ञापन
kali river polution
कालीनदी में शहर के गंदे पानी का नाला गिरता हुआ। - फोटो : BULANDSHAHR
सरकारी फाइलों में ही दबकर रह गई ‘काली की किस्मत’
विज्ञापन

बुलंदशहर। काली नदी को स्वच्छ करने के दावे जब से शुरू हुए हैं तब से न जाने कितने राजनेता और कितने अधिकारी आए और गए। इसके बाद भी जिले में कभी अविरल और स्वच्छ बहने वाली काली की सेहत को सुधारने के लिए कागजी घोड़े ही दौड़ सके हैं। यदा-कदा एनजीटी के आदेश पर खानापूर्ति भी की गई।
जपनद में काली नदी गुलावठी की सीमा से लगती है और अलीगढ़ सीमा पर समाप्त होती है। गंगा से निकलने वाली काली 1980 के दशक में इतनी अविरल और स्वच्छ थी कि वहां से कोई भी व्यक्ति सीधे पानी पी सकता था। अब 40 साल बाद हालात यह हुए कि वहां से पानी पीना तो दूर की बात है, वहां पर लोग बिना मुंह ढके खड़े भी नहीं हो सकते। शहर की विभिन्न कॉलोनियों से निकलने वाले गंदे नालों को नगर पालिका ने काली में ले जाकर छोड़ दिया है। जबकि जानवरों की मौत और कटान के बाद उनके अवशेष भी काली में डाले जाने की खबरें भी समय-समय पर सामने आती रहीं हैं।
विज्ञापन

चार साल पहले नालों से कूड़ा गिरने पर रोकने के हुए थे प्रयास
करीब चार साल पहले तत्कालीन नगर पालिकाध्यक्ष पिंकी गर्ग ने शहर के सभी नालों के मुख पर लोहे की जाली लगवाई थी, ताकि कूड़ा कचरा काली नदी में न गिरे, लेकिन जाली के गलने के बाद दोबारा से न तो नालों के मुख पर जाली लगाई गई और न ही अधिकारियों ने कोई और कदम उठाने के लिए प्रयास किया।
विज्ञापन
विज्ञापन

पुल पर बने गुंबद और पुल का नक्शा दिलाता है मुगलकाल की याद
काली नदी पर बना पुराना पुल और लाल पत्थरों से निर्मित गुंबद आज भी मुगलकाल की याद ताजा करते हैं। यूं तो प्रदेश में इस प्रकार की सैकड़ों धरोहर को संजो कर रखा गया है, लेकिन यहां देखने के लिए तो जिले के मुखिया समेत अन्य अधिकारियों और नेताओं के पास समय ही नहीं है। अपने शासन काल में मुगल जब अवध की ओर जाते थे तो दिल्ली से बुलंदशहर, अनूपशहर, संभल होते हुए अवध पहुंचते थे।
ढाई वर्ष पूर्व बीडीए ने बनाया था नो कंस्ट्रक्शन जोन
बुलंदशहर विकास प्राधिकरण ने एनजीटी के निर्देश पर काली नदी के दोनों ओर 200-200 मीटर जगह को नो कंस्ट्रक्शन जोन बनाया था। इस दौरान किनारे पर बने करीब 200 घरों के वजूद पर संकट आ गया था। बाद में न तो कभी बीडीए के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर देखा कि निर्माण हुआ है या नहीं और न ही जिला प्रशासन ने इस ओर कोई निर्देश जारी किए, जिससे अवैध निर्माण को रोका जा सके। जिसके चलते लोगों ने काली नदी के किनारों पर अवैध रूप से निर्माण कर अपने धंधे शुरू कर दिए हैं।
सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने लोकसभा में उठाया मुद्दा
हापुड़ लोकसभा सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने काली नदी की स्वच्छता को लेकर लोकसभा में मुद्दा उठाया। उन्होंने जल शक्ति मंत्री रतनलाल कटारिया से सवाल किया कि नमामि गंगे योजना के तहत अभी तक गंगा की सहायक नदी काली की सेहत क्यों नहीं सुधारी गई। इस पर जल शक्ति मंत्री ने जवाब दिया कि वर्ल्ड बैंक की सहायता से काली नदी की सेहत सुधारने के लिए योजना बनाई जा रही है। जल्द ही इस पर कार्य किया जाएगा।

काली नदी में जाल आदि जो टूटे पड़े हैं, उन्हें चेक करवाया जाएगा। साथ ही नगर पालिका अफसरों को उसे ठीक कराने के लिए निर्देश दिए जाएंगे। नदी में कूड़ा कचरा न डाले जाएं इसके लिए भी निर्देशित किया जाएगा। - रवींद्र कुमार, एडीएम प्रशासन/प्रभारी अधिकारी नगर निकाय।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed