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Bulandshahar News: श्रीराम कथा शुरू होने से पहले निकाली कलश यात्रा
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कथा में मौजूद श्रद्धालु।
- फोटो : संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
अहार। गांव बामनपुर में श्रीराम कथा शुरू होने से पहले शुक्रवार कलश यात्रा धूमधाम से निकाली गई। वहीं, दूसरी ओर कथा व्यास अमित महाराज ने कथा सुनाकर भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। आयोजकों के अनुसार कथा शनिवार को भी जारी रहेगी।
गांव बामनपुर में ग्राम सेवा समिति के तत्वावधान में स्थित मां वैष्णो धाम से कलश यात्रा शुरू हुई। जो गांव के मुख्य मार्गों और चौराहों से होती हुई मां वैष्णो धाम पर आकर संपन्न हुई। इस दौरान डीजे की धुन पर भक्ति गीतों से क्षेत्र भक्तिमय हो गया। कलश यात्रा का जगह-जगह स्वागत हुआ। वहीं, दूसरी ओर कथावाचक व्यास अमित महाराज ने कहा कि जिस समय नारद हिमगिरी गुफा में बैठकर के भगवान का ध्यान कर रहे थे। उसे समय देवराज इंद्र का सिंहासन हिल गया।
देवराज ने कामदेव को नारद की तपस्या भंग करने के लिए भेजा, लेकिन कामदेव खुद ही परास्त हो गए। कामदेव का प्रभाव नारद के ऊपर नहीं पड़ा। क्योंकि नारद एक योगी हैं। जब नारद को यह ज्ञान हुआ कि उन्होंने काम को जीत लिया तो उनके मन में अहंकार हो गया। जिस मनुष्य के हृदय में अहंकार उत्पन्न हो जाए तो उसका इस संसार में उधर नहीं हो सकता। उन्होंने नारद की मोह माया से संबंधित आगे की कथा सुनाकर भक्तों का मार्गदर्शन किया। इस दौरान धनेश्वरी देवी, रघुनंदन शर्मा, सोनपाल, ललित राजपूत, कृष्ण शर्मा, रिंकू कुमार, टेकचंद सिंह, राजकुमार, तेजवीर सिंह और विपिन लोधी आदि मौजूद रहे।
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अहार। गांव बामनपुर में श्रीराम कथा शुरू होने से पहले शुक्रवार कलश यात्रा धूमधाम से निकाली गई। वहीं, दूसरी ओर कथा व्यास अमित महाराज ने कथा सुनाकर भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। आयोजकों के अनुसार कथा शनिवार को भी जारी रहेगी।
गांव बामनपुर में ग्राम सेवा समिति के तत्वावधान में स्थित मां वैष्णो धाम से कलश यात्रा शुरू हुई। जो गांव के मुख्य मार्गों और चौराहों से होती हुई मां वैष्णो धाम पर आकर संपन्न हुई। इस दौरान डीजे की धुन पर भक्ति गीतों से क्षेत्र भक्तिमय हो गया। कलश यात्रा का जगह-जगह स्वागत हुआ। वहीं, दूसरी ओर कथावाचक व्यास अमित महाराज ने कहा कि जिस समय नारद हिमगिरी गुफा में बैठकर के भगवान का ध्यान कर रहे थे। उसे समय देवराज इंद्र का सिंहासन हिल गया।
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देवराज ने कामदेव को नारद की तपस्या भंग करने के लिए भेजा, लेकिन कामदेव खुद ही परास्त हो गए। कामदेव का प्रभाव नारद के ऊपर नहीं पड़ा। क्योंकि नारद एक योगी हैं। जब नारद को यह ज्ञान हुआ कि उन्होंने काम को जीत लिया तो उनके मन में अहंकार हो गया। जिस मनुष्य के हृदय में अहंकार उत्पन्न हो जाए तो उसका इस संसार में उधर नहीं हो सकता। उन्होंने नारद की मोह माया से संबंधित आगे की कथा सुनाकर भक्तों का मार्गदर्शन किया। इस दौरान धनेश्वरी देवी, रघुनंदन शर्मा, सोनपाल, ललित राजपूत, कृष्ण शर्मा, रिंकू कुमार, टेकचंद सिंह, राजकुमार, तेजवीर सिंह और विपिन लोधी आदि मौजूद रहे।
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