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Bulandshahar News: छात्र की बाइक गिरवी रखने के मामले की एसडीएम करेंगी जांच
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स्याना। क्षेत्र के मैपल ग्रोव स्कूल में कक्षा 12वीं के छात्र की ओर से फीस न जमा करने पर बाइक गिरवी रखने के मामले में अब एसडीएम स्याना जांच करेंगी। डीएम सीपी सिंह ने एसडीएम मधुमिता को निर्देश दिए हैं। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद स्कूल प्रबंधन पर कार्रवाई होगी।
गांव बरहाना निवासी ज्ञानेंद्र वशिष्ठ मैपल ग्रोव स्कूल में कक्षा 12वीं का छात्र है। वह अपना प्रवेश पत्र लेने के लिए स्कूल गया था। जितेंद्र ने जब विद्यालय में प्रवेश पत्र मांगा तो विद्यालय ने बिना फीस जमा किए प्रवेश पत्र देने से इंकार कर दिया। कक्षा 12 की फीस 49,900 रुपये है। 34500 रुपये जमा किए जा चुके थे। शेष 15400 रुपये के लिए जितेंद्र ने कुछ समय मांगा था, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने प्रवेश पत्र देने से स्पष्ट रूप से इन्कार कर दिया। परीक्षा में नहीं बैठने के डर से जितेंद्र ने मजबूरी में अपनी बाइक पैसे देने तक के लिए स्कूल को देने की बात कही। यह मामला डीएम तक भी पहुंच गया। इसे डीएम सीपी सिंह ने गंभीरता से लेते हुए एसडीएम स्याना को जांच के निर्देश जारी कर दिए हैं। उन्होंने बताया कि यह मामला गंभीर है और इसकी जांच के लिए एसडीएम को कहा गया है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद आगामी कार्रवाई होगी। संवाद
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फीस जमा करने के बाद छात्र को दी बाइक
छात्र को प्रवेश पत्र के बदले बाइक गिरवी रखने का मामला सुर्खियों में आने के बाद भी स्कूल प्रबंधन ने छात्र की बाइक वापस करने की पहल नहीं की। इतना ही नहीं छात्र के परिजनों से भी संपर्क नहीं किया कि वह अपनी बाइक ले जाए। वहीं, दूसरी ओर एक मीडियाकर्मी ने छात्र की स्कूल में फीस जमा कराने के बाद ही स्कूल प्रबंधन ने गिरवी रखी छात्र की बाइक शनिवार को वापस की है। छात्र जितेंद्र ने बताया कि रविवार को बहन की शादी है और स्कूल प्रबंधन ने इतना भी नहीं सोचा कि इस समय बाइक की सबसे ज्यादा जरूरत है। फीस जमा करने के बाद ही बाइक वापस करने का संदेश आया।
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स्कूल प्रबंधन की निंदा, कई ने बढ़ाया मदद का हाथ
फीस कम रह जाने पर मैपल ग्रोव वर्ल्ड स्कूल द्वारा छात्र की बाइक गिरवी रखने की चहुओर निंदा हो रही है। परिजनों ने स्कूल प्रबंधन पर कार्रवाई की मांग की है। कई लोग मदद के लिए भी आगे आए हैं। अखिल भारतीय हिंदू महासभा के प्रदेश अध्यक्ष अनुराग नागर ने कहा स्कूल प्रबंधन ने संकुचित सोच का परिचय दिया है। शिक्षा व शिक्षा के मंदिर को व्यापार बनाकर रख दिया है। पढ़ाई हो या न हो बस कमाई की ओर ही स्कूल प्रबंधन आकर्षित रहते हैं। समाजसेवी मृदुल भारद्वाज के अनुसार मोटी कमीशनखोरी के चक्कर में अधिकांश स्कूल खुद ही किताब बेचते हैं। इतनी कमाई के बाद भी एक स्कूल की ओर से फीस कम रहने पर समय देने के स्थान पर बाइक गिरवी रखना शर्मसार करने वाली घटना है। एलआईसी एडवाइजर नीरज शर्मा का कहना है कि स्कूल प्रबंधन को अपने कृत्य की माफी मांगनी चाहिए। इस कृत्य से गुरु और शिष्य के बीच का रिश्ता भी धूमिल है। छात्र को समय दिया जाना था। बाइक गिरवीं रखना गलत है। निषाद पार्टी के प्रदेश महासचिव शिखर अग्रवाल ने कहा कि स्कूल प्रबंधन ने बाइक गिरवीं रख अपने शुद्ध व्यापारी होने का सबूत दिया है। संबंधित अधिकारियों को ऐसे स्कूल की मान्यता रद्द कर देनी चाहिए। जो शिक्षा के नाम पर गिरवी का काम करे ऐसे लोगों से स्कूल संचालन का अधिकार छीन लेना चाहिए।
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गांव बरहाना निवासी ज्ञानेंद्र वशिष्ठ मैपल ग्रोव स्कूल में कक्षा 12वीं का छात्र है। वह अपना प्रवेश पत्र लेने के लिए स्कूल गया था। जितेंद्र ने जब विद्यालय में प्रवेश पत्र मांगा तो विद्यालय ने बिना फीस जमा किए प्रवेश पत्र देने से इंकार कर दिया। कक्षा 12 की फीस 49,900 रुपये है। 34500 रुपये जमा किए जा चुके थे। शेष 15400 रुपये के लिए जितेंद्र ने कुछ समय मांगा था, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने प्रवेश पत्र देने से स्पष्ट रूप से इन्कार कर दिया। परीक्षा में नहीं बैठने के डर से जितेंद्र ने मजबूरी में अपनी बाइक पैसे देने तक के लिए स्कूल को देने की बात कही। यह मामला डीएम तक भी पहुंच गया। इसे डीएम सीपी सिंह ने गंभीरता से लेते हुए एसडीएम स्याना को जांच के निर्देश जारी कर दिए हैं। उन्होंने बताया कि यह मामला गंभीर है और इसकी जांच के लिए एसडीएम को कहा गया है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद आगामी कार्रवाई होगी। संवाद
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फीस जमा करने के बाद छात्र को दी बाइक
छात्र को प्रवेश पत्र के बदले बाइक गिरवी रखने का मामला सुर्खियों में आने के बाद भी स्कूल प्रबंधन ने छात्र की बाइक वापस करने की पहल नहीं की। इतना ही नहीं छात्र के परिजनों से भी संपर्क नहीं किया कि वह अपनी बाइक ले जाए। वहीं, दूसरी ओर एक मीडियाकर्मी ने छात्र की स्कूल में फीस जमा कराने के बाद ही स्कूल प्रबंधन ने गिरवी रखी छात्र की बाइक शनिवार को वापस की है। छात्र जितेंद्र ने बताया कि रविवार को बहन की शादी है और स्कूल प्रबंधन ने इतना भी नहीं सोचा कि इस समय बाइक की सबसे ज्यादा जरूरत है। फीस जमा करने के बाद ही बाइक वापस करने का संदेश आया।
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स्कूल प्रबंधन की निंदा, कई ने बढ़ाया मदद का हाथ
फीस कम रह जाने पर मैपल ग्रोव वर्ल्ड स्कूल द्वारा छात्र की बाइक गिरवी रखने की चहुओर निंदा हो रही है। परिजनों ने स्कूल प्रबंधन पर कार्रवाई की मांग की है। कई लोग मदद के लिए भी आगे आए हैं। अखिल भारतीय हिंदू महासभा के प्रदेश अध्यक्ष अनुराग नागर ने कहा स्कूल प्रबंधन ने संकुचित सोच का परिचय दिया है। शिक्षा व शिक्षा के मंदिर को व्यापार बनाकर रख दिया है। पढ़ाई हो या न हो बस कमाई की ओर ही स्कूल प्रबंधन आकर्षित रहते हैं। समाजसेवी मृदुल भारद्वाज के अनुसार मोटी कमीशनखोरी के चक्कर में अधिकांश स्कूल खुद ही किताब बेचते हैं। इतनी कमाई के बाद भी एक स्कूल की ओर से फीस कम रहने पर समय देने के स्थान पर बाइक गिरवी रखना शर्मसार करने वाली घटना है। एलआईसी एडवाइजर नीरज शर्मा का कहना है कि स्कूल प्रबंधन को अपने कृत्य की माफी मांगनी चाहिए। इस कृत्य से गुरु और शिष्य के बीच का रिश्ता भी धूमिल है। छात्र को समय दिया जाना था। बाइक गिरवीं रखना गलत है। निषाद पार्टी के प्रदेश महासचिव शिखर अग्रवाल ने कहा कि स्कूल प्रबंधन ने बाइक गिरवीं रख अपने शुद्ध व्यापारी होने का सबूत दिया है। संबंधित अधिकारियों को ऐसे स्कूल की मान्यता रद्द कर देनी चाहिए। जो शिक्षा के नाम पर गिरवी का काम करे ऐसे लोगों से स्कूल संचालन का अधिकार छीन लेना चाहिए।