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10 फीसदी आम को चट कर गया फल मक्खी कीट
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10 फीसदी आम को चट कर गया फल मक्खी कीट
बुलंदशहर। जनपद में आजकल फल मक्खी कीट आम की फसल को चट कर रहा है। यह कीट अभी तक करीब 10 फीसदी आम की फसल को नुकसान पहुंचा चुका है। अभी इस कीट की शुरूआत है और बारिश होने पर कीट की संख्या बढ़ जाएगी। यह कीट आम को काना कर देता है। इसे देखते हुए किसानों को बड़ा नुकसान होने की चिंता सता रही है।
एक बार में एक हजार अंडे होते हैं तैयार
कृषि विज्ञान केंद्र की वैज्ञानिक डॉ. रीशू सिंह ने बताया कि फल मक्खी कीट आम और बेल वाली फसलों का प्रमुख कीट है। यह कीट ततैया जैसे आकार का होता है और इसकी मादा एक बार में एक हजार तक अंडे देती है। इस समय जनपद के फल पट्टी क्षेत्र में आम की फसल पर इसका अत्यधिक असर देखा जा रहा है। आम की फसल को बचाने के लिए इस कीट की रोकथाम जरूरी है।
फल के गूदे को खाता है कीट
यह कीट फल के गूदे को खाता है और इससे आम की फसल में कीड़े (सूंडी) पड़ने की समस्या भी बढ़ जाती है। इससे फल काना होने लगता है और उत्पादकता पर भी असर पड़ता है।
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बचाव के लिए यह करें किसान
इस कीट से निजात पाने के लिए आम उत्पादक किसान मिथाइल यूजीनॉल ट्रैप को 20 ट्रैप प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करके फसल को बचा सकते हैं। इसके अलावा किसान 50 एमएल मैलाथियान और 500 ग्राम गुड़ या चीनी मिलाकर 50 लीटर पानी में घोलकर प्रत्येक सप्ताह एक बार छिड़काव करें तो इस कीट से निजात पाई जा सकती है। उन्होंने किसानों को आम काना होने पर उसे बाग में खुला न छोड़कर उसे गड्ढा खोदकर दबाने की भी सलाह दी है। अभी इस कीट से करीब 10 फीसदी आम को नुकसान हो चुका है।
14 हजार हेक्टेयर में होती है आम की बागवानी
जनपद में 14 हजार हेक्टेयर में आम के बाग हैं। हर वर्ष 250 लाख मीट्रिक टन आम का उत्पादन होता है। अभी तक किसानों को कोरोना कर्फ्यू की चिंता थी और अब जब कुछ छूट मिली तो अब इस कीट के हमले ने आम उत्पादक किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
आम के निर्यात पर कीट के अंडे देखकर लौटा दिया जाएगा
वैज्ञानिक रीशू सिंह ने बताया कि जनपद से आम का निर्यात विदेशों में भी किया जाता है। यदि इस कीट से लगे आम को किसान या फिर व्यापारी विदेश में भेजते हैं और वहां पर आम में इस कीट के अंडे पाए जाते हैं तो उसे वापस कर दिया जाता है। हालांकि अभी आम देश में भी भेजा जा रहा है, लेकिन विदेश में पहुंचा तो और इससे पहले कीट से निजात नहीं मिली तो निर्यात करने वाले किसान और व्यापारियों को बड़ा नुकसान होगा।
पिछले साल कोरोना, इस साल कीट कर रहा नुकसान
गत वर्ष लॉकडाउन ने बड़ा नुकसान कर दिया था और अब फल मक्खी कीट आम की फसल में लग चुका है। इससे निजात पाने के लिए हरसंभव प्रयास किया जा रहा है। यदि बारिश हुई तो इसका असर बढ़ जाएगा और आम काना होने पर बेकार हो जाएगा। इससे बड़ा नुकसान होने की चिंता सता रही है।
बागान किसान गोपी सैनी।
लॉकडाउन हटा तो कीट की चिंता
अभी तक यह चिंता बनी थी कि आम कैसे बिकेगा। अब कुछ छूट मिली है तो आम पकने पर उसे बेचने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों के अलावा विदेश में भी भेजने की तैयारी की जा रही है। लेकिन फल मक्खी कीट लगने से आम काना होने लगा है। इससे काफी नुकसान हो रहा है और इसका अभी अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता।
बागान किसान आस मोहम्मद।
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बुलंदशहर। जनपद में आजकल फल मक्खी कीट आम की फसल को चट कर रहा है। यह कीट अभी तक करीब 10 फीसदी आम की फसल को नुकसान पहुंचा चुका है। अभी इस कीट की शुरूआत है और बारिश होने पर कीट की संख्या बढ़ जाएगी। यह कीट आम को काना कर देता है। इसे देखते हुए किसानों को बड़ा नुकसान होने की चिंता सता रही है।
एक बार में एक हजार अंडे होते हैं तैयार
कृषि विज्ञान केंद्र की वैज्ञानिक डॉ. रीशू सिंह ने बताया कि फल मक्खी कीट आम और बेल वाली फसलों का प्रमुख कीट है। यह कीट ततैया जैसे आकार का होता है और इसकी मादा एक बार में एक हजार तक अंडे देती है। इस समय जनपद के फल पट्टी क्षेत्र में आम की फसल पर इसका अत्यधिक असर देखा जा रहा है। आम की फसल को बचाने के लिए इस कीट की रोकथाम जरूरी है।
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फल के गूदे को खाता है कीट
यह कीट फल के गूदे को खाता है और इससे आम की फसल में कीड़े (सूंडी) पड़ने की समस्या भी बढ़ जाती है। इससे फल काना होने लगता है और उत्पादकता पर भी असर पड़ता है।
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बचाव के लिए यह करें किसान
इस कीट से निजात पाने के लिए आम उत्पादक किसान मिथाइल यूजीनॉल ट्रैप को 20 ट्रैप प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करके फसल को बचा सकते हैं। इसके अलावा किसान 50 एमएल मैलाथियान और 500 ग्राम गुड़ या चीनी मिलाकर 50 लीटर पानी में घोलकर प्रत्येक सप्ताह एक बार छिड़काव करें तो इस कीट से निजात पाई जा सकती है। उन्होंने किसानों को आम काना होने पर उसे बाग में खुला न छोड़कर उसे गड्ढा खोदकर दबाने की भी सलाह दी है। अभी इस कीट से करीब 10 फीसदी आम को नुकसान हो चुका है।
14 हजार हेक्टेयर में होती है आम की बागवानी
जनपद में 14 हजार हेक्टेयर में आम के बाग हैं। हर वर्ष 250 लाख मीट्रिक टन आम का उत्पादन होता है। अभी तक किसानों को कोरोना कर्फ्यू की चिंता थी और अब जब कुछ छूट मिली तो अब इस कीट के हमले ने आम उत्पादक किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
आम के निर्यात पर कीट के अंडे देखकर लौटा दिया जाएगा
वैज्ञानिक रीशू सिंह ने बताया कि जनपद से आम का निर्यात विदेशों में भी किया जाता है। यदि इस कीट से लगे आम को किसान या फिर व्यापारी विदेश में भेजते हैं और वहां पर आम में इस कीट के अंडे पाए जाते हैं तो उसे वापस कर दिया जाता है। हालांकि अभी आम देश में भी भेजा जा रहा है, लेकिन विदेश में पहुंचा तो और इससे पहले कीट से निजात नहीं मिली तो निर्यात करने वाले किसान और व्यापारियों को बड़ा नुकसान होगा।
पिछले साल कोरोना, इस साल कीट कर रहा नुकसान
गत वर्ष लॉकडाउन ने बड़ा नुकसान कर दिया था और अब फल मक्खी कीट आम की फसल में लग चुका है। इससे निजात पाने के लिए हरसंभव प्रयास किया जा रहा है। यदि बारिश हुई तो इसका असर बढ़ जाएगा और आम काना होने पर बेकार हो जाएगा। इससे बड़ा नुकसान होने की चिंता सता रही है।
बागान किसान गोपी सैनी।
लॉकडाउन हटा तो कीट की चिंता
अभी तक यह चिंता बनी थी कि आम कैसे बिकेगा। अब कुछ छूट मिली है तो आम पकने पर उसे बेचने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों के अलावा विदेश में भी भेजने की तैयारी की जा रही है। लेकिन फल मक्खी कीट लगने से आम काना होने लगा है। इससे काफी नुकसान हो रहा है और इसका अभी अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता।
बागान किसान आस मोहम्मद।