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Bulandshahar News: बुखार, सर्दी और जुकाम के साथ टायफाइड के बढ़े मरीज
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संवाद न्यूज एजेंसी
बुलंदशहर। मौसम में आए बदलाव के चलते लोग बुखार, सर्दी, जुकाम के साथ अब टायफाइड की चपेट में आने लगे हैं। बीते कई दिनों से जिला अस्पताल की पैथोलॉजी लैब में 20 से 30 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आ रही है। वहीं, अन्य सरकारी चिकित्सालय और निजी अस्पताल में भी टायफाइड, डायरिया और ड्रिहाइडेशन के मरीज उपचार कराने के लिए पहुंच रहे हैं। टायफाइड होने की प्रमुख वजह दूषित खानपान सामने आ रहा है। जिन्हें चिकित्सक बीमारी से बचने के लिए स्वच्छ पानी पीने के साथ खानपान में सफाई बरतने की सलाह दे रहे हैं। टायफाइड बुखार, पीलिया और डायरिया जलजनित बीमारी हैं। गर्मियों में इसका प्रकोप अधिक बढ़ जाता है। लेकिन लोगों द्वारा गंदे पेय पदार्थों का सेवन करने पर इसकी चपेट में आ जाते हैं। वहीं, तापमान बढ़ने के साथ शरीर की ऊष्णता भी बढ़ जाती है। ऐसे में गंदे पेय पदार्थ पाचन तंत्रिका पर विपरीत प्रभाव डालता है। जिला अस्पताल के परामर्शदाता डॉ. परवेंद्र कुमार ने बताया कि टाइफाइड एक बैक्टीरियल बीमारी है, जो आंतों पर असर करती है। गर्मियों में टाइफाइड के अधिक होने की प्रमुख वजह दूषित पेय पदार्थों का सेवन है। सड़क किनारे बिकने वाले जूस, गन्ने का रस, शिकंजी आदि में डाली जाने वाली बर्फ चीजों को ठंडा करने के लिए होती है, लेकिन जूस, रस और शिकंजी वाले बर्फ को पिलाने का काम करते हैं। जिससे टायफाइड होने की संभावना बन जाती है। इसके अलावा बासी भोजन का सेवन करने से भी टाइफाइड हो सकता है। इस बीमारी से बचने के लिए ताजा भोजन करें और शीतल पेय पदार्थों का सेवन करते समय साफ-सफाई का विशेेष ध्यान रखें। जितना भी हो घर पर बनी चीजें खाएं।
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टायफाइड के लक्षण
टाइफाइड में मरीज को तेज बुखार आता है, जो 103 डिग्री से 104 डिग्री तक बढ़ सकता है। टाइफाइड का बुखार करीब एक सप्ताह तक बना रहता है। मरीज को बुखार आने के साथ ही पेट दर्द, भूख नहीं लगना, सिरदर्द होना, शरीर के कई हिस्सों में दर्द होना, दस्त लगना आदि लक्षण होते हैं।
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बुलंदशहर। मौसम में आए बदलाव के चलते लोग बुखार, सर्दी, जुकाम के साथ अब टायफाइड की चपेट में आने लगे हैं। बीते कई दिनों से जिला अस्पताल की पैथोलॉजी लैब में 20 से 30 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आ रही है। वहीं, अन्य सरकारी चिकित्सालय और निजी अस्पताल में भी टायफाइड, डायरिया और ड्रिहाइडेशन के मरीज उपचार कराने के लिए पहुंच रहे हैं। टायफाइड होने की प्रमुख वजह दूषित खानपान सामने आ रहा है। जिन्हें चिकित्सक बीमारी से बचने के लिए स्वच्छ पानी पीने के साथ खानपान में सफाई बरतने की सलाह दे रहे हैं। टायफाइड बुखार, पीलिया और डायरिया जलजनित बीमारी हैं। गर्मियों में इसका प्रकोप अधिक बढ़ जाता है। लेकिन लोगों द्वारा गंदे पेय पदार्थों का सेवन करने पर इसकी चपेट में आ जाते हैं। वहीं, तापमान बढ़ने के साथ शरीर की ऊष्णता भी बढ़ जाती है। ऐसे में गंदे पेय पदार्थ पाचन तंत्रिका पर विपरीत प्रभाव डालता है। जिला अस्पताल के परामर्शदाता डॉ. परवेंद्र कुमार ने बताया कि टाइफाइड एक बैक्टीरियल बीमारी है, जो आंतों पर असर करती है। गर्मियों में टाइफाइड के अधिक होने की प्रमुख वजह दूषित पेय पदार्थों का सेवन है। सड़क किनारे बिकने वाले जूस, गन्ने का रस, शिकंजी आदि में डाली जाने वाली बर्फ चीजों को ठंडा करने के लिए होती है, लेकिन जूस, रस और शिकंजी वाले बर्फ को पिलाने का काम करते हैं। जिससे टायफाइड होने की संभावना बन जाती है। इसके अलावा बासी भोजन का सेवन करने से भी टाइफाइड हो सकता है। इस बीमारी से बचने के लिए ताजा भोजन करें और शीतल पेय पदार्थों का सेवन करते समय साफ-सफाई का विशेेष ध्यान रखें। जितना भी हो घर पर बनी चीजें खाएं।
टायफाइड के लक्षण
टाइफाइड में मरीज को तेज बुखार आता है, जो 103 डिग्री से 104 डिग्री तक बढ़ सकता है। टाइफाइड का बुखार करीब एक सप्ताह तक बना रहता है। मरीज को बुखार आने के साथ ही पेट दर्द, भूख नहीं लगना, सिरदर्द होना, शरीर के कई हिस्सों में दर्द होना, दस्त लगना आदि लक्षण होते हैं।
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