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Bulandshahar News: चाय के कप डिजाइन में बनाए जा रहे गमलों की बढ़ी मांग
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खुर्जा स्थित पॉटरी में रखे चाय के कप के डिजाइन में बने गमले । संवाद
खुर्जा। बागवानी में दो-दो फुट बड़े चाय के कप अपनी सुंदरता बिखरेंगे। खुर्जा की पॉटरी इकाई में चाय के कप डिजाइन के गमले बनाए जा रहे हैं, जो लोगों को काफी पसंद आ रहे हैं। यह दिखने में आकर्षक, सुंदर और मजबूत भी हैं।
खुर्जा के पॉटरी औद्योगिक क्षेत्र में तैयार होने वाले उत्पाद देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी प्रसिद्ध हैं। खुर्जा में लगभग 350 पॉटरी इकाइयां हैं। जहां पर क्रॉकरी, इंसुलेटर व गमले तैयार होते हैं। पॉटरी कारोबार में समय-समय पर नए डिजाइन की क्रॉकरी व गमले तैयार किए जाते हैं। इसमें बाजार की मांग और लोगों की सुविधा को देखते हुए समय-समय पर डिजाइन में बदलाव किया जाता है।
पॉटरी उद्यमी विजय खुराना ने बताया कि गमलों में अलग-अलग डिजाइन बन रहे हैं, जिसमें चाय के कप का डिजाइन काफी अलग है। जिसे लोग पसंद कर रहे हैं। बताया कि कप की डिजाइन के गमले एक या दो फुट गहरे बनाए जा रहे हैं। इसमें हैंडिल भी है।
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विजय खुराना ने बताया कि कम गमला इंडोर प्लांट के साथ-साथ बागवानी में भी लगाया जा सकता है। इसके अलावा इसको घर के अंदर सजावटी फूलों के साथ भी रखा जा सकता है।
मजबूती के लिए बनाया जा रहा विशेष मिट्टी का मिश्रण
उद्यमी तुषार ने बताया कि गमलों में डिजाइन व रंग के साथ उनकी मजबूती का भी विशेष ध्यान रखा रहा है, जिससे मिट्टी या पेड़ों की जड़ के दबाव से वह टूट नहीं सके। इसके लिए गुजरात, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, झारखंड की मिट्टी मंगवाई जा रही है। मिट्टी के मिश्रण को अनुपात के अनुसार तैयार किया जाता है, जिससे अधिक ताप पर उत्पाद को पकाया जा सके। इससे उत्पाद अर्थात गमले की मजबूती बढ़ती है।
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खुर्जा के पॉटरी औद्योगिक क्षेत्र में तैयार होने वाले उत्पाद देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी प्रसिद्ध हैं। खुर्जा में लगभग 350 पॉटरी इकाइयां हैं। जहां पर क्रॉकरी, इंसुलेटर व गमले तैयार होते हैं। पॉटरी कारोबार में समय-समय पर नए डिजाइन की क्रॉकरी व गमले तैयार किए जाते हैं। इसमें बाजार की मांग और लोगों की सुविधा को देखते हुए समय-समय पर डिजाइन में बदलाव किया जाता है।
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पॉटरी उद्यमी विजय खुराना ने बताया कि गमलों में अलग-अलग डिजाइन बन रहे हैं, जिसमें चाय के कप का डिजाइन काफी अलग है। जिसे लोग पसंद कर रहे हैं। बताया कि कप की डिजाइन के गमले एक या दो फुट गहरे बनाए जा रहे हैं। इसमें हैंडिल भी है।
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विजय खुराना ने बताया कि कम गमला इंडोर प्लांट के साथ-साथ बागवानी में भी लगाया जा सकता है। इसके अलावा इसको घर के अंदर सजावटी फूलों के साथ भी रखा जा सकता है।
मजबूती के लिए बनाया जा रहा विशेष मिट्टी का मिश्रण
उद्यमी तुषार ने बताया कि गमलों में डिजाइन व रंग के साथ उनकी मजबूती का भी विशेष ध्यान रखा रहा है, जिससे मिट्टी या पेड़ों की जड़ के दबाव से वह टूट नहीं सके। इसके लिए गुजरात, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, झारखंड की मिट्टी मंगवाई जा रही है। मिट्टी के मिश्रण को अनुपात के अनुसार तैयार किया जाता है, जिससे अधिक ताप पर उत्पाद को पकाया जा सके। इससे उत्पाद अर्थात गमले की मजबूती बढ़ती है।