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जाटों की लामबंदी किरनपाल के लिए कांटों भरा ‘ताज’

Fri, 20 May 2016 09:31 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बुलंदशहर
ब्यूरो/अमर उजाला, बुलंदशहर Updated Fri, 20 May 2016 09:31 PM IST
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Hooks for full mobilization of Jats Kirnpal 'crown'
समाजवादी पार्टी - फोटो : अमर उजाला

समाजवादी पार्टी ने पूर्व कैबिनेट मंत्री और जाट नेता चौधरी किरनपाल सिंह को साइकिल पर सवार कराकर जाटों को फुसलाने की कवायद तेज कर दी है। सपा ने यह सियासी दांव मुजफ्फरनगर दंगों से नाराज जाट समुदाय के लोगों को मनाने के लिए खेला है।

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उसका लक्ष्य जाट बहुल बुलंदशहर जिले की सात विधानसभा सीटों के लिए 2017 में होने वाले विधानसभा चुनाव में जाटों की लामबंदी करना है। पूर्व मंत्री के पार्टी में शामिल होने से सपा कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह है, लेकिन जाटों को सपा के पक्ष में खड़ा करने की जिम्मेदारी चौधरी किरनपाल के समक्ष कांटों से भरे ताज से कम नहीं है।
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पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुजफ्फरनगर में सितंबर 2013 में हुए दंगों के दौरान प्रदेश सरकार की भूमिका को जाट समुदाय के लोग अब तक भूले नहीं हैं। उनके जेहन में सरकार के प्रति खासी कड़वाहट है।
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लोगों का मानना है कि प्रदेश सरकार की भूमिका की वजह से हिंदू और मुसलिम समुदाय की बीच दूरियां बढ़ीं। राजनीतिक पंडितों के मुताबिक सपा ने 2017 के आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सियासी तानाबाना बुनने का काम शुरू कर दिया है।

गौरतलब है कि बुलंदशहर जिले के अतंर्गत सात विधानसभा क्षेत्र हैं। इन सीटों पर जाट मतों की बहुलता है। फिलहाल इन सात सीटों में एक सीट भाजपा के पास है, जबकि सपा, कांग्रेस और बसपा में प्रत्येक के पास दो-दो सीटें हैं। चौधरी किरनपाल छह बार विधायक और एक मर्तबा प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं।

हालांकि वह 2012 के विधानसभा चुनाव में शिकारपुर से राष्ट्रीय लोकदल के टिकट पर चुनाव लड़े थे, लेकिन सपा के मुकेश पंडित ने उन्हें पटकनी दे दी थी। बावजूद इसके चौधरी किरनपाल का क्षेत्र में खासा प्रभाव माना जाता है।  यही कारण है कि सपा उनके चेहरे को जाट नेता के तौर पर इस्तेमाल करना चाहती है।

सपा जिला अध्यक्ष दिनेश गुर्जर का दावा है कि प्रो. किरनपाल सिंह के सपा में आने से पश्चिमी यूपी में पार्टी और मजबूत होगी। आगामी चुनाव पार्टी को फायदा होगा। वहीं राजनीतिक जानकार इस बात से सहमत नहीं हैं। उनका मानना है कि किरनपाल की राह आसान नहीं होगी।

उनकी सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि उन पर एक चर्चित कांड में शामिल होने के आरोपों की वजह से उनकी छवि पर प्रतिकूल असर पड़ा है। इसके अलावा वह इस समय राष्ट्रीय लोकदल छोड़कर आए हैं। बताया जाता है कि प्रो. किरनपाल को पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह और उनके पुत्र अजीत सिंह का आशीर्वाद प्राप्त रहा है। ऐसे में रालोद छोड़ने पर जाटों की एक लॉबी उनसे नाराज है।

प्रो. किरनपाल सिर्फ जाट समुदाय के नेता नहीं हैं, वह सभी जातियों का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनके आने से पश्चिमी यूपी में पार्टी और मजबूत होगी। आगामी चुनाव में हम और अधिक सीटें जीतेंगे। - दिनेश गुर्जर, जिलाध्यक्ष, सपा


चौधरी किरनपाल सिंह के सपा में जाने से कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ेगा। जाट समुदाय को अच्छी तरह मालूम है कि उसे किसके साथ रहना चाहिए। वह पूरी तरह से चौधरी साहब के साथ ही है। - राजीव चौधरी, जिलाध्यक्ष, रालोद

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