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हिंदू भाई ने बचाई मुस्लिम बहन की जिंदगी

Sat, 09 Jan 2016 10:38 PM IST
अमर उजाला, बुलंदशहर
अमर उजाला, बुलंदशहर Updated Sat, 09 Jan 2016 10:38 PM IST
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Hindu brother saved the life of a Muslim sister by donating blood.
देश में सहिष्णुता और असहिष्णुता की बहस के बीच बुलंदशहर के मांगेराम ने खून देकर रुखसार की न केवल जिंदगी बचा ली बल्कि लोगों को बांटने वाली धर्म की लकीर भी मिटा दी।
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उनका यह कदम उन कट्टरपंथी ताकतों के लिए सबक है,जो समाज को हिंदू और मुस्लिम के चश्मे से देखते हैं। सिकंदराबाद के मोहल्ला खत्रीबाड़ा की रहने वाली राशिद की पत्नी रुखसार ने चार जनवरी को सिकंदराबाद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लड़के को जन्म दिया था।
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प्रसव के दौरान रक्तस्राव अधिक होने से रुखसार के शरीर में ब्लड की कमी हो गई, जो खतरनाक स्टेज पर जा पहुंची। शुक्रवार की शाम अचानक रुखसार की तबीयत बिगड़ने लगी।
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आनन फानन में महिला को जिला महिला अस्पताल शिफ्ट किया गया। रुखसार को ए नेगेटिव ग्रुप के खून की जरूरत थी। सरकारी ब्लड बैंक में इस ग्रुप का ब्लड नहीं था। शहर में प्राइवेट तौर पर खून की तलाश की गई मगर हर जगह से निराशा हाथ लगी।

शनिवार की सुबह जच्चा बच्चा की जान का वास्ता देकर कई लोगों को फोन घुमाया गया। इनमें कुछ मुस्लिम भी थे। मगर किसी ने खून के लिए हामी नहीं भरी।

वहीं कलक्ट्रेट में भाकियू के आंदोलन में सक्रिय भाकियू नेता मांगेराम त्यागी पता लगते ही अस्पताल पहुंचे और मुस्लिम बहन को खून देकर उसकी जिंदगी बचा ली। फिलहाल रुखसार खतरे से बाहर बताई गई है।

रुखसार को खून की तत्काल जरूरत थी। कई लोगों से संपर्क साधा गया, लेकिन कोई आगे नहीं आया। इसके बाद मांगेराम त्यागी को पूरी बात बताई गई। वह खून देने के लिए तुरंत तैयार हो गए। मैं और मेरा परिवार सदैव मांगेराम का ऋणी रहेगा।- राशिद मोहम्मद, रुखसार का पति


हिंदू-मुस्लिम इंसानों द्वारा बनाए गए हैं। सबसे ऊपर इंसानियत होती है। मैंने इंसानियत का धर्म निभाते हुए अपनी मुस्लिम बहन को खून दिया। मैं खुशनसीब हूं कि मैं किसी की जान बचा सका।- मांगेराम त्यागी, प्रदेश सचिव, भाकियू


बहुत कम लोग ऐसे होते हैं, जो जरूरत पड़ने पर तत्काल रक्तदान करने के लिए तैयार हो जाते हैं। ए निगेटिव ग्रुप काफी रेयर होता है। एक हजार में से एक आदमी का ब्लड ग्रुप ए निगेटिव होता है। -डॉ. दीपक ओहरी, सीएमओ
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