{"_id":"6a9eff267f64fbb7e2026eef","slug":"government-offices-in-dilapidated-buildings-lives-at-stake-in-dilapidated-buildings-bulandshahr-news-c-133-1-bul1033-164792-2026-09-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bulandshahar News: जर्जर भवनों में सरकारी दफ्तर, जर्जर इमारतों में जिंदगी दांव पर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bulandshahar News: जर्जर भवनों में सरकारी दफ्तर, जर्जर इमारतों में जिंदगी दांव पर
विज्ञापन
नगर के मोतीबाग स्थित जिला निर्वाचन कार्यालय का जर्जर भवन। संवाद
बुलंदशहर/खुर्जा/सिकंदराबाद। जिले में जर्जर और निष्प्रयोज्य घोषित भवनों में भी सरकारी कार्यालयों का संचालन हो रहा है। इन कार्यालयों में कर्मचारी ही नहीं, बल्कि रोजाना बड़ी संख्या में फरियादी और आम लोग भी पहुंचते हैं। खुर्जा में आजादी से पहले बनी कई ऐतिहासिक इमारतें भी बदहाल हो चुकी हैं। कहीं छज्जे गिर रहे हैं तो कहीं पुराने आवास और पानी की टंकियां हादसे को न्योता दे रही हैं। भवनों की हालत को देखते हुए समय रहते मरम्मत, पुनर्निर्माण या ध्वस्तीकरण नहीं कराया गया तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।
कलक्ट्रेट परिसर स्थित पुराना भवन पहले ही निष्प्रयोज्य घोषित किया जा चुका है। इसके बावजूद परिसर में कई महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालय संचालित हो रहे हैं। यहां एडीएम कार्यालय, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, एकल खिड़की, जुवेनाइल कोर्ट और प्रोबेशन कार्यालय में कर्मचारी काम कर रहे हैं। इन कार्यालयों में प्रतिदिन विभिन्न कार्यों के लिए लोगों का आना-जाना लगा रहता है। निष्प्रयोज्य घोषित भवन में कार्यालय संचालित होने से कर्मचारियों और यहां पहुंचने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मोतीबाग का निर्वाचन कार्यालय भी जर्जर
नगर के मोतीबाग स्थित निर्वाचन कार्यालय का भवन भी लंबे समय से जर्जर हालत में है। चुनाव संबंधी महत्वपूर्ण कार्य इसी कार्यालय से होते हैं और कर्मचारियों के साथ विभिन्न कार्यों से लोग भी यहां पहुंचते हैं। भवन की स्थिति को देखते हुए इसकी मरम्मत अथवा नए भवन में कार्यालय स्थानांतरित करने की आवश्यकता है। इसके अलावा सिकंदराबाद में बिजली विभाग का कार्यालय भवन भी जर्जर स्थिति में पहुंच चुका है। यहां रोजाना बिजली संबंधी समस्याओं को लेकर उपभोक्ताओं की आवाजाही रहती है। ऐसे में जर्जर भवनों में कार्यालय संचालन किसी संभावित हादसे से कम नहीं है।
विज्ञापन
खुर्जा में सौ साल से अधिक पुरानी इमारत में दुकानें और स्कूल
खुर्जा में भी कई पुरानी इमारतें अब खतरे की स्थिति में पहुंच चुकी हैं। सुभाष मार्ग स्थित चतुर श्रेणी वैश्य भवन करीब सौ वर्ष से अधिक पुराना बताया जाता है। तीन मंजिला इस भवन की पहली और दूसरी मंजिल खाली हैं, जबकि भूतल पर दुकानें और एक निजी स्कूल संचालित हो रहा है। 19 जुलाई 2026 को भवन का छज्जा टूटकर नीचे गिर गया था। गनीमत रही कि उस समय कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। घटना के बाद भवन समिति प्रबंधन की ओर से बाहर नोटिस भी लगाया गया, लेकिन भवन की स्थिति में सुधार नहीं हो सका है। ऐसे में स्कूल में आने वाले बच्चों, दुकानदारों और राहगीरों पर खतरा बना हुआ है।
1919 में बने अस्पताल की दीवारें भी बदहाल
खुर्जा के श्री लक्ष्मण दास जटिया राजकीय चिकित्सालय की इमारत का निर्माण वर्ष 1919 में हुआ था। करीब एक सदी से अधिक पुरानी इस इमारत की दीवारें और लिंटर काफी मोटे हैं, लेकिन समय के साथ भवन की हालत खराब होती जा रही है। कई स्थानों पर बदहाली साफ दिखाई देती है और भवन मरम्मत की बाट जोह रहा है।
अस्पताल परिसर में बने पुराने आवास भी पूरी तरह जर्जर पड़े हैं। इन भवनों के छज्जे कभी भी गिर सकते हैं। सबसे बड़ी चिंता अस्पताल परिसर में लगी जर्जर पानी की टंकी को लेकर है। टंकी का संचालन लंबे समय से नहीं हो रहा है, लेकिन इसके बावजूद उसे ध्वस्त नहीं किया गया है। अस्पताल में मरीजों, तीमारदारों और कर्मचारियों की लगातार आवाजाही रहती है। ऐसे में टंकी या जर्जर भवन का कोई हिस्सा गिरने से गंभीर हादसा हो सकता है।
पुराने भवनों का सर्वे कराकर हो कार्रवाई
जिले में कई भवनों के जर्जर होने के बावजूद उनमें सरकारी कामकाज या अन्य गतिविधियां जारी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार पुराने भवनों का तकनीकी सर्वे कराकर उनकी वास्तविक स्थिति का आकलन कराया जाना चाहिए। जो भवन मरम्मत योग्य हैं, उनकी तत्काल मरम्मत कराई जाए और जो पूरी तरह असुरक्षित हो चुके हैं, उन्हें खाली कराकर ध्वस्त किया जाए। सरकारी कार्यालयों को निष्प्रयोज्य भवनों से सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने की भी जरूरत है। लोगों का कहना है कि किसी हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय प्रशासन को पहले ही एहतियाती कदम उठाने चाहिए, ताकि जानमाल के नुकसान की स्थिति पैदा न हो।
एडीएम प्रशासन नितीश कुमार का कहना है कि जर्जर घोषित हो चुके भवनों के स्थान पर नए भवन बनाने के लिए प्रक्रिया चल रही है। कलक्ट्रेट के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया था। अन्य भवनों के लिए भी काम किया जा रहा है।
विज्ञापन
कलक्ट्रेट परिसर स्थित पुराना भवन पहले ही निष्प्रयोज्य घोषित किया जा चुका है। इसके बावजूद परिसर में कई महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालय संचालित हो रहे हैं। यहां एडीएम कार्यालय, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, एकल खिड़की, जुवेनाइल कोर्ट और प्रोबेशन कार्यालय में कर्मचारी काम कर रहे हैं। इन कार्यालयों में प्रतिदिन विभिन्न कार्यों के लिए लोगों का आना-जाना लगा रहता है। निष्प्रयोज्य घोषित भवन में कार्यालय संचालित होने से कर्मचारियों और यहां पहुंचने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
विज्ञापन
मोतीबाग का निर्वाचन कार्यालय भी जर्जर
नगर के मोतीबाग स्थित निर्वाचन कार्यालय का भवन भी लंबे समय से जर्जर हालत में है। चुनाव संबंधी महत्वपूर्ण कार्य इसी कार्यालय से होते हैं और कर्मचारियों के साथ विभिन्न कार्यों से लोग भी यहां पहुंचते हैं। भवन की स्थिति को देखते हुए इसकी मरम्मत अथवा नए भवन में कार्यालय स्थानांतरित करने की आवश्यकता है। इसके अलावा सिकंदराबाद में बिजली विभाग का कार्यालय भवन भी जर्जर स्थिति में पहुंच चुका है। यहां रोजाना बिजली संबंधी समस्याओं को लेकर उपभोक्ताओं की आवाजाही रहती है। ऐसे में जर्जर भवनों में कार्यालय संचालन किसी संभावित हादसे से कम नहीं है।
विज्ञापन
खुर्जा में सौ साल से अधिक पुरानी इमारत में दुकानें और स्कूल
खुर्जा में भी कई पुरानी इमारतें अब खतरे की स्थिति में पहुंच चुकी हैं। सुभाष मार्ग स्थित चतुर श्रेणी वैश्य भवन करीब सौ वर्ष से अधिक पुराना बताया जाता है। तीन मंजिला इस भवन की पहली और दूसरी मंजिल खाली हैं, जबकि भूतल पर दुकानें और एक निजी स्कूल संचालित हो रहा है। 19 जुलाई 2026 को भवन का छज्जा टूटकर नीचे गिर गया था। गनीमत रही कि उस समय कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। घटना के बाद भवन समिति प्रबंधन की ओर से बाहर नोटिस भी लगाया गया, लेकिन भवन की स्थिति में सुधार नहीं हो सका है। ऐसे में स्कूल में आने वाले बच्चों, दुकानदारों और राहगीरों पर खतरा बना हुआ है।
1919 में बने अस्पताल की दीवारें भी बदहाल
खुर्जा के श्री लक्ष्मण दास जटिया राजकीय चिकित्सालय की इमारत का निर्माण वर्ष 1919 में हुआ था। करीब एक सदी से अधिक पुरानी इस इमारत की दीवारें और लिंटर काफी मोटे हैं, लेकिन समय के साथ भवन की हालत खराब होती जा रही है। कई स्थानों पर बदहाली साफ दिखाई देती है और भवन मरम्मत की बाट जोह रहा है।
अस्पताल परिसर में बने पुराने आवास भी पूरी तरह जर्जर पड़े हैं। इन भवनों के छज्जे कभी भी गिर सकते हैं। सबसे बड़ी चिंता अस्पताल परिसर में लगी जर्जर पानी की टंकी को लेकर है। टंकी का संचालन लंबे समय से नहीं हो रहा है, लेकिन इसके बावजूद उसे ध्वस्त नहीं किया गया है। अस्पताल में मरीजों, तीमारदारों और कर्मचारियों की लगातार आवाजाही रहती है। ऐसे में टंकी या जर्जर भवन का कोई हिस्सा गिरने से गंभीर हादसा हो सकता है।
पुराने भवनों का सर्वे कराकर हो कार्रवाई
जिले में कई भवनों के जर्जर होने के बावजूद उनमें सरकारी कामकाज या अन्य गतिविधियां जारी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार पुराने भवनों का तकनीकी सर्वे कराकर उनकी वास्तविक स्थिति का आकलन कराया जाना चाहिए। जो भवन मरम्मत योग्य हैं, उनकी तत्काल मरम्मत कराई जाए और जो पूरी तरह असुरक्षित हो चुके हैं, उन्हें खाली कराकर ध्वस्त किया जाए। सरकारी कार्यालयों को निष्प्रयोज्य भवनों से सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने की भी जरूरत है। लोगों का कहना है कि किसी हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय प्रशासन को पहले ही एहतियाती कदम उठाने चाहिए, ताकि जानमाल के नुकसान की स्थिति पैदा न हो।
एडीएम प्रशासन नितीश कुमार का कहना है कि जर्जर घोषित हो चुके भवनों के स्थान पर नए भवन बनाने के लिए प्रक्रिया चल रही है। कलक्ट्रेट के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया था। अन्य भवनों के लिए भी काम किया जा रहा है।

नगर के मोतीबाग स्थित जिला निर्वाचन कार्यालय का जर्जर भवन। संवाद