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घोड़ी और खच्चर में ग्लैंडर्स फारसी की पुष्टि, अलर्ट जारी

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 12 Apr 2021 11:19 PM IST
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glanders and farcy disease
घोड़ी और खच्चर में ग्लैंडर्स फारसी की पुष्टि, अलर्ट जारी
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बुलंदशहर। घोड़ों की प्रजाति में पाई जाने वाली खतरनाक ग्लैंडर्स फारसी बीमारी ने जनपद में दस्तक दे दी है। लखावटी ब्लॉक क्षेत्र के गांव शेखपुर गढ़वा में एक घोड़ी और खच्चर की रिपोर्ट हरियाणा स्थित हिसार लैब से पॉजिटिव आई है। लैब के वैज्ञानिकों ने दोबारा से दोनों पशुओं की पूरी डिटेल मांगी है, विभाग ने दोनों की जानकारी भेज दी है। अब दूसरी रिपोर्ट मिलने का अब इंतजार है। वहीं, पॉजिटिव रिपोर्ट आने के बाद विभाग ने जनपद में अलर्ट जारी कर दिया है।
ग्लैंडर्स फारसी बीमारी गधे, घोड़ों और खच्चरों से मनुष्य में बड़ी तेजी से फैलती है। ऐसे में पशुपालन विभाग इस बीमारी को लेकर अलर्ट रहता है। प्रत्येक माह जनपद से घोड़ों और गधों के रक्त सैंपल हरियाणा स्थित हिसार लैब में भेजे जाते हैं। करीब 20 दिन पूर्व विभाग की टीम ने लखावटी ब्लॉक के गांव शेखपुर गढ़वा से एक व्यक्ति के यहां पर एक खच्चर और एक घोड़ी का सैंपल जांच को भेजा था। लैब से दोनों पशुआें की रिपोर्ट विभाग को पॉजिटिव प्राप्त हुई है। रिपोर्ट आने के बाद विभाग में खलबली मच गया और आनन-फानन में टीम ने गांव में पहुंचकर दोनों पशुओं की जांच की। साथ ही उन दोनों को अलग-अलग कर दिया। उनके मालिक को पीईपी किट उपलब्ध करवाकर उनसे दूर रहने के लिए कहा गया है। बताया कि लैब से दोनों पशुओं के बारे में फिर से जानकारी मांगी गई है। ग्लैंडर्स फारसी के उनमें अभी लक्षण जैसे बुखार, नाक से स्त्राव होना और शरीर पर फोड़े-फुंसी जैसी कोई बीमारी अभी तो नहीं हैं। सीवीओ ने बताया कि दोनों पशुओं की रिपोर्ट तैयार कर लैब को भेज दी है। बताया गया कि दोनों पशु इस समय पूरी तरह से स्वस्थ हैं और उनमें ग्लैंडर्स फारसी के कोई लक्षण दिखाई नहीं देर हैं। विभाग को अब दोनों पशुओं की रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट आने के बाद अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। जनपद में अलर्ट जारी कर सतर्कता बरती जा रही है।
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बीमारी होने पर सुला दिए जाते हैं मौत की नींद
ग्लैंडर्स फारसी बीमारी घोड़ा, गधा और खच्चर में ही पाई जाती है। यदि किसी अश्व को यह बीमारी हो जाती है तो पशुपालन विभाग द्वारा उनको मौत की नींद सुला दिया जाता है। यह पूरी कार्रवाई पूरी सुरक्षा और पीपीई किट पहनकर कराई जाती है। बीमार अश्व की मौत होने पर उसे गहरे गड्ढे में दबा दिया जाता है, ताकि उसके लक्षण किसी व्यक्ति तक न पहुंच सकें। ऐसे घोड़े की मौत होने पर शासन की ओर से पालक को मुआवजा भी देने का प्रावधान है।
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हिसार लैब से एक खच्चर और एक घोड़ी की रिपोर्ट पॉजिटिव प्राप्त हुई है। दोनों पशुओं की जांच करने के बाद रिपोर्ट फिर से भेजी गई है। लैब से दूसरी रिपोर्ट मिलने का इंतजार है। 20 दिन पूर्व इनके सैंपल भेजे गए थे। मौजूदा समय में दोनों में ग्लैंडर्स फारसी के लक्षण नहीं दिखाई दे रहे हैं। दूसरी रिपोर्ट आने के बाद कुछ कहा जा सकेगा। - विजेंद्र सिंह, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी
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