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महिला अपराधों पर नहीं लग रहा लगाम, लगातार बढ़ रहे अपराध
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महिला अपराधों पर नहीं लग रहा लगाम, लगातार बढ़ रहे अपराध
बुलंदशहर। महिला अपराधों पर लगाम लगा पाना पुलिस के लिए चुनौती साबित हो रहा है। महिला अपराध के कई मामलों में पुलिस की लापरवाही भी उजागर हुई। जिस कारण वह अपराध बड़ी वारदातों में तब्दील भी हो गए।
बीते कुछ वर्षों में महिला अपराधों पर लगाम लगा पाना पुलिस के लिए कड़ी चुनौती साबित हो रहा है। दिन प्रतिदिन यह मामले बढ़ते ही नजर आ रहे हैं। इन अपराधों पर लगाम लगाने की पुलिस की कोशिशें नाकाफी साबित हो रही हैं। यही कारण रहा कि बीते करीब तीन माह में यह आंकड़ा इस वर्ष सबसे अधिक बढ़ता हुआ नजर आ रहा है। यही नहीं, जनपद में बीते कुछ दिनों में दुष्कर्म के मामले भी प्रकाश में आए। खासतौर पर जहांगीराबाद थाना क्षेत्र के एक गांव में दुष्कर्म पीड़िता की आरोपियों ने घर में घुसकर जलाकर हत्या कर दी थी। इस वारदात से एक दिन पूर्व ही अनूपशहर थाना क्षेत्र में एक बीए एलएलबी की छात्रा ने सामूहिक दुष्कर्म मामले में कार्रवाई न होने पर आत्महत्या कर ली थी। सुसाइड नोट में पीड़िता ने इस संबंध में अपनी आपबीती भी लिखी थी। यही नहीं गत तीन वर्षों का आंकड़ा देखें तो महिला अपराध बीते दो सालों में बहुत बढ़े थे। लेकिन, इस वर्ष की शुरुआत में कुछ मामले दर्ज हुए लेकिन, बाद में कोरोना काल के कारण मामलों पर कुछ दिनों के लिए लगाम लगी रही थी। लेकिन, अनलॉक लागू होने के बाद एक बार फिर अपराध ने रफ्तार पकड़ी। इनमें अधिकतर मामले महिला उत्पीड़न और अपराध के दर्ज किए गए।
यह हैं आंकड़े
वर्ष दुष्कर्म दुष्कर्म की कोशिश दहेज उत्पीड़न
2018 51 144 276
2019 43 135 224
2020 62 149 327
नोट:- वर्ष 2020 के आंकड़े दिसंबर माह के मध्य तक हैं।
महिला अपराध के मामलों को तत्काल दर्जकर उन पर कार्रवाई की जाती है। हालांकि, बीते कुछ माह में कई मामले गलत दर्ज कराए गए हैं। प्रारंभिक तौर पर तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज की गईं, लेकिन बाद में फर्जी पाए जाने पर उन्हें कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। महिला अपराधों पर लगाम लगाने के लिए जनपद पुलिस प्राथमिक तौर पर काम कर रही है।
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संतोष कुमार सिंह, एसएसपी
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बुलंदशहर। महिला अपराधों पर लगाम लगा पाना पुलिस के लिए चुनौती साबित हो रहा है। महिला अपराध के कई मामलों में पुलिस की लापरवाही भी उजागर हुई। जिस कारण वह अपराध बड़ी वारदातों में तब्दील भी हो गए।
बीते कुछ वर्षों में महिला अपराधों पर लगाम लगा पाना पुलिस के लिए कड़ी चुनौती साबित हो रहा है। दिन प्रतिदिन यह मामले बढ़ते ही नजर आ रहे हैं। इन अपराधों पर लगाम लगाने की पुलिस की कोशिशें नाकाफी साबित हो रही हैं। यही कारण रहा कि बीते करीब तीन माह में यह आंकड़ा इस वर्ष सबसे अधिक बढ़ता हुआ नजर आ रहा है। यही नहीं, जनपद में बीते कुछ दिनों में दुष्कर्म के मामले भी प्रकाश में आए। खासतौर पर जहांगीराबाद थाना क्षेत्र के एक गांव में दुष्कर्म पीड़िता की आरोपियों ने घर में घुसकर जलाकर हत्या कर दी थी। इस वारदात से एक दिन पूर्व ही अनूपशहर थाना क्षेत्र में एक बीए एलएलबी की छात्रा ने सामूहिक दुष्कर्म मामले में कार्रवाई न होने पर आत्महत्या कर ली थी। सुसाइड नोट में पीड़िता ने इस संबंध में अपनी आपबीती भी लिखी थी। यही नहीं गत तीन वर्षों का आंकड़ा देखें तो महिला अपराध बीते दो सालों में बहुत बढ़े थे। लेकिन, इस वर्ष की शुरुआत में कुछ मामले दर्ज हुए लेकिन, बाद में कोरोना काल के कारण मामलों पर कुछ दिनों के लिए लगाम लगी रही थी। लेकिन, अनलॉक लागू होने के बाद एक बार फिर अपराध ने रफ्तार पकड़ी। इनमें अधिकतर मामले महिला उत्पीड़न और अपराध के दर्ज किए गए।
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यह हैं आंकड़े
वर्ष दुष्कर्म दुष्कर्म की कोशिश दहेज उत्पीड़न
2018 51 144 276
2019 43 135 224
2020 62 149 327
नोट:- वर्ष 2020 के आंकड़े दिसंबर माह के मध्य तक हैं।
महिला अपराध के मामलों को तत्काल दर्जकर उन पर कार्रवाई की जाती है। हालांकि, बीते कुछ माह में कई मामले गलत दर्ज कराए गए हैं। प्रारंभिक तौर पर तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज की गईं, लेकिन बाद में फर्जी पाए जाने पर उन्हें कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। महिला अपराधों पर लगाम लगाने के लिए जनपद पुलिस प्राथमिक तौर पर काम कर रही है।
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संतोष कुमार सिंह, एसएसपी