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Bulandshahar News: गुदड़ी मेले में तब्दील हुआ अनूपशहर का गंगा स्नान मेला
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अनूपशहर के मेले में खरीदारी करती महिलाएं। संवाद
अनूपशहर। कार्तिक पूर्णिमा गंगा स्नान मेले के तीसरे दिन मंगलवार को भी मेला क्षेत्र में महिलाओं व बच्चों की भारी भीड़ लगी रहने से पूरा मेला क्षेत्र गुलजार रहा। झूला चरखा, खाद्य पदार्थ व खेल खिलौने की दुकानों पर जमकर खरीददारी की जा रही है। अब यह मेला गुदड़ी मेले में तब्दील हो गया।
कार्तिक पूर्णिमा मेला सकुशल होने के बाद तीसरे दिन गुदड़ी मेला शुरू हो गया। गुदड़ी शब्द का प्रयोग कार्तिक मेले के दौरान खरीदारी के लिए आने वाली भीड़ के लिए प्रयोग किया जाता है। कार्तिक मेले के बाद लगभग एक सप्ताह तक गुदड़ी चलने की प्राचीन परंपरा है। इस ग्रामीण अंचल के मेले के दौरान घर में प्रयोग करने वाले अनेक सामान जो बाजार में आसानी से नहीं मिलते हैं, वह खरीदे जाते हैं। मेले में महिलाओं के लिए ढोलक, चकला, बेलन, खरल, मूसली, धनकुट आदि सभी सामान उपलब्ध है। वहीं, मेला में मनाेरंजन के लिए झूले और व्यंजनों की दुकान लगी हैं। दिन में ग्रामीण तो रात को कस्बावासी पहुंच रहे हैं। मेले के आयोजकों के अनुसार अब रंगारंग और सांस्कृतिक कार्यक्रम हाेंगे। मंगलवार की रात को रसियों का आयोजन हुआ। बुधवार की रात शेख चिल्ली का कार्यक्रम होगा। बृहस्पतिवाार को छात्र-छात्राओं द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। वहीं, एक दिसंबर को जादू का शो होगा। जबकि तीन दिसंबर को रागिनी का आयोजन होगा। इसमें प्रसिद्ध रागिनी गायक शामिल होंगे।
उजड़ने लगा गंगा की रेती से तंबुओं का नगर
कस्बे में गंगा किनारे लगा कार्तिक पूर्णिमा गंगा स्नान मेला रेती से उजड़ना शुरू हो गया है। इस समय कुछ लोग ही यहां तंबू डाले हुए हैं। यहां लगी दुकानों से भी दुकानदारों ने सामान समेटना शुरू कर दिया है। बावजूद इसके पांच किलोमीटर के क्षेत्र में जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन लगातार नजर रखे हुए हैं। बता दें कि यहां पर पिछले साल तक 10 दिन का मेला लगता था। लेकिन इस बार मेला प्रांतीय स्तर का होने के कारण 15 दिन का लगाया गया है। मेला अभी भी जारी रहेगा।
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कार्तिक पूर्णिमा मेला सकुशल होने के बाद तीसरे दिन गुदड़ी मेला शुरू हो गया। गुदड़ी शब्द का प्रयोग कार्तिक मेले के दौरान खरीदारी के लिए आने वाली भीड़ के लिए प्रयोग किया जाता है। कार्तिक मेले के बाद लगभग एक सप्ताह तक गुदड़ी चलने की प्राचीन परंपरा है। इस ग्रामीण अंचल के मेले के दौरान घर में प्रयोग करने वाले अनेक सामान जो बाजार में आसानी से नहीं मिलते हैं, वह खरीदे जाते हैं। मेले में महिलाओं के लिए ढोलक, चकला, बेलन, खरल, मूसली, धनकुट आदि सभी सामान उपलब्ध है। वहीं, मेला में मनाेरंजन के लिए झूले और व्यंजनों की दुकान लगी हैं। दिन में ग्रामीण तो रात को कस्बावासी पहुंच रहे हैं। मेले के आयोजकों के अनुसार अब रंगारंग और सांस्कृतिक कार्यक्रम हाेंगे। मंगलवार की रात को रसियों का आयोजन हुआ। बुधवार की रात शेख चिल्ली का कार्यक्रम होगा। बृहस्पतिवाार को छात्र-छात्राओं द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। वहीं, एक दिसंबर को जादू का शो होगा। जबकि तीन दिसंबर को रागिनी का आयोजन होगा। इसमें प्रसिद्ध रागिनी गायक शामिल होंगे।
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उजड़ने लगा गंगा की रेती से तंबुओं का नगर
कस्बे में गंगा किनारे लगा कार्तिक पूर्णिमा गंगा स्नान मेला रेती से उजड़ना शुरू हो गया है। इस समय कुछ लोग ही यहां तंबू डाले हुए हैं। यहां लगी दुकानों से भी दुकानदारों ने सामान समेटना शुरू कर दिया है। बावजूद इसके पांच किलोमीटर के क्षेत्र में जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन लगातार नजर रखे हुए हैं। बता दें कि यहां पर पिछले साल तक 10 दिन का मेला लगता था। लेकिन इस बार मेला प्रांतीय स्तर का होने के कारण 15 दिन का लगाया गया है। मेला अभी भी जारी रहेगा।
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