{"_id":"63b6fb02b7867e6cc94510c7","slug":"fraud-bulandshahr-news-gbd250248453","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bulandshahar News: ओबीसी का फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर बन गया प्रधान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bulandshahar News: ओबीसी का फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर बन गया प्रधान
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ओबीसी का फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर बन गया प्रधान
बुलंदशहर। शिकारपुर तहसील क्षेत्र ग्राम पंचायत रिवाड़ा में हुए पंचायत चुनाव में ओबीसी का फर्जी प्रमाणपत्र लगाकर प्रमोद प्रधान बन गया। शिकायत पर एसडीएम शिकारपुर ने जांच की तो मामले का खुलासा हुआ।
एसडीएम शिकारपुर अरविंद कुमार सिंह ने डीपीआरओ को पत्र लिखकर प्रमोद के खिलाफ कार्रवाई के लिए कहा है। पंचायत चुनाव के दौरान रहीम और प्रमोद ने रिवाड़ा ग्राम पंचायत से प्रधानी का चुनाव लड़ा था। प्रमोद ने जीत दर्ज की थी। प्रत्याशी रहे रहीम ने शिकायत दर्ज कराई थी कि प्रधान पद का आरक्षण ओबीसी जाति का था। प्रमोद अहेरिया जाति से संबंधित है। अहेरिया जाति केंद्र सरकार के आरक्षण में ओबीसी तो प्रदेश सरकार के आरक्षण में सामान्य जाति में आती है। प्रमोद ने अपना जाति प्रमाण पत्र ओबीसी का बनवाकर चुनाव लड़ा और जीत हासिल कर ली। शिकायत पर हुई जांच में पता चला कि प्रमोद का जाति प्रमाणपत्र भारत सरकार के आरक्षण के आधार पर स्वीकार किया गया था। उत्तर प्रदेश सरकार की अन्य पिछड़ा वर्ग की सूची में न होने के कारण विधि मान्य नहीं है।
तिल बेगमपुर में भी चल रही जांच
इसी तरह का एक और मामला सिकंदराबाद तहसील की ग्राम पंचायत तिल बेगमपुर में भी सामने आया था, जिसकी जांच चल रही है। वहां सामान्य जाति से संबंध रखने वाली मुनाजरी बेगम ने ओबीसी का फर्जी जाति प्रमाणपत्र बनवाकर चुनाव लड़ा और वह जीत गई। डीपीआरओ के अनुसार इसकी जांच लगभग पूरी हो चुकी है और फाइल डीएम के पास है।
विज्ञापन
ग्राम पंचायत रिवाड़ा में प्रधान बने प्रमोद का जाति प्रमाणपत्र फर्जी है। प्रधान प्रमोद ने जिला जज के यहां से इस पर स्टे ले लिया है। स्टे 11 जनवरी तक है। इसके बाद अदालत से जो निर्देश मिलेंगे, उनका पालन किया जाएगा।
-डा. प्रीतम सिंह, जिला पंचायती राज अधिकारी।
------
एसडीएम ने मेरा जातिप्रमाण पत्र अमान्य माना है। इस आदेश के खिलाफ मैं कोर्ट में गया, जहां से मुझे 11 जनवरी तक का स्टे मिल गया है। आगे अदालत का जो भी फैसला होगा वह मान्य होगा।
-प्रमोद, ग्राम प्रधान रिवाड़ा
विज्ञापन
बुलंदशहर। शिकारपुर तहसील क्षेत्र ग्राम पंचायत रिवाड़ा में हुए पंचायत चुनाव में ओबीसी का फर्जी प्रमाणपत्र लगाकर प्रमोद प्रधान बन गया। शिकायत पर एसडीएम शिकारपुर ने जांच की तो मामले का खुलासा हुआ।
एसडीएम शिकारपुर अरविंद कुमार सिंह ने डीपीआरओ को पत्र लिखकर प्रमोद के खिलाफ कार्रवाई के लिए कहा है। पंचायत चुनाव के दौरान रहीम और प्रमोद ने रिवाड़ा ग्राम पंचायत से प्रधानी का चुनाव लड़ा था। प्रमोद ने जीत दर्ज की थी। प्रत्याशी रहे रहीम ने शिकायत दर्ज कराई थी कि प्रधान पद का आरक्षण ओबीसी जाति का था। प्रमोद अहेरिया जाति से संबंधित है। अहेरिया जाति केंद्र सरकार के आरक्षण में ओबीसी तो प्रदेश सरकार के आरक्षण में सामान्य जाति में आती है। प्रमोद ने अपना जाति प्रमाण पत्र ओबीसी का बनवाकर चुनाव लड़ा और जीत हासिल कर ली। शिकायत पर हुई जांच में पता चला कि प्रमोद का जाति प्रमाणपत्र भारत सरकार के आरक्षण के आधार पर स्वीकार किया गया था। उत्तर प्रदेश सरकार की अन्य पिछड़ा वर्ग की सूची में न होने के कारण विधि मान्य नहीं है।
विज्ञापन
तिल बेगमपुर में भी चल रही जांच
इसी तरह का एक और मामला सिकंदराबाद तहसील की ग्राम पंचायत तिल बेगमपुर में भी सामने आया था, जिसकी जांच चल रही है। वहां सामान्य जाति से संबंध रखने वाली मुनाजरी बेगम ने ओबीसी का फर्जी जाति प्रमाणपत्र बनवाकर चुनाव लड़ा और वह जीत गई। डीपीआरओ के अनुसार इसकी जांच लगभग पूरी हो चुकी है और फाइल डीएम के पास है।
विज्ञापन
ग्राम पंचायत रिवाड़ा में प्रधान बने प्रमोद का जाति प्रमाणपत्र फर्जी है। प्रधान प्रमोद ने जिला जज के यहां से इस पर स्टे ले लिया है। स्टे 11 जनवरी तक है। इसके बाद अदालत से जो निर्देश मिलेंगे, उनका पालन किया जाएगा।
-डा. प्रीतम सिंह, जिला पंचायती राज अधिकारी।
------
एसडीएम ने मेरा जातिप्रमाण पत्र अमान्य माना है। इस आदेश के खिलाफ मैं कोर्ट में गया, जहां से मुझे 11 जनवरी तक का स्टे मिल गया है। आगे अदालत का जो भी फैसला होगा वह मान्य होगा।
-प्रमोद, ग्राम प्रधान रिवाड़ा