फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bulandshahar News ›   for sugarcane farmers, agitation and road jam by RLD.

किसानों के हक को सड़क पर उतरी छोटे चौधरी की ‘फौज’

Tue, 12 Jan 2016 11:11 PM IST
अमर उजाला, बुलंदशहर
अमर उजाला, बुलंदशहर Updated Tue, 12 Jan 2016 11:11 PM IST
विज्ञापन
for sugarcane farmers, agitation and road jam by RLD.
किसान हितों की खातिर मंगलवार को रालोद मुखिया अजित सिंह (छोटे चौधरी) की फौज सड़कों पर उतर आई। रालोद के बैनर तले गन्ना किसानों ने काला आम चौराहे पर 15 मिनट जाम लगा वाहनों की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया।
विज्ञापन


चौराहे पर एक अफसर की कार के बोनट पर कार्यकर्ता चढ़ गए। किसानों ने चौराहे पर ही गन्ने की होली जलाई और  शासन-प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। कलक्ट्रेट में घुसने को लेकर पुलिस से कहासुनी हई।
विज्ञापन


गन्ना समर्थन मूल्य को लेकर मंगलवार को राष्ट्रीय लोकदल के बैनर तले  किसान एक होटल में एकत्र हुए। होटल में आम सभा कर जिलाध्यक्ष राजीव चौधरी के नेतृत्व में काला आम चौराहे पर पहुंचे और जाम लगा दिया। 
विज्ञापन
विज्ञापन


यहां किसान वाहनों के सामने लेट गए। 15 मिनट के जाम से ही कचहरी रोड, डीएम रोड, मोतीबाग रोड और सिविल लाइन रोड पर वाहनों की लंबी कतार लग गई।

जाम लगाने को लेकर रालोद पदाधिकारियों और पुलिस अफसरों के बीच नोकझोंक हुई। बाद में कार्यकर्ता काला आम चौराहे से रैली के रूप में कलक्ट्रेट गेट पर पहुंचे।

गेट पर काफी संख्या में पहले से ही पुलिस बल तैनात था। यहां कार्यकर्ताओं को अफसरों ने अंदर जाने से रोका तो हंगामा खड़ा हो गया। कार्यकर्ताओं की अधिकारियों से तीखी झड़पहुई।

नौबत धक्कामुक्की तक पहुंच गई।  कलक्ट्रेट में अंदर नहीं जाने देने से खफा किसानों ने प्रशासनिक अधिकारियों को तानाशाह करार दिया और वहीं धरने पर बैठ गए।

रालोद के राष्ट्रीय सचिव चक्रपाणि यादव ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार ने गन्ना किसानों को बर्बाद कर दिया है।  गन्ने का वाजिब मूल्य किसानों को नहीं मिल रहा है।

अफसर किसानों की शिकायत तक सुनने को तैयार नहीं है। वर्ष 2017 के चुनाव में सपा को पता चल जाएगा कि वह कितने पानी में है। अन्नू चौधरी, विजेंद्र सिंह, कुंवरवीर सिंह, रामनरेश सिंह, नितिन, विजेंद्र सिंह, वीरेंद्र , अर्जुन, नावेश, पंकज सुधीर आदि मौजूद रहे।                       

नहीं चलेगा तानाशाही
बाद में 11 सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल डीएम से मिला।  सभी ने डीएम से कहा कि गेट पर पीड़ित किसानों को रोकना लोकतंत्र की हत्या के समान है। किसान डीएम के सामने समस्या नहीं रखेगा तो किसके सामने रखेगा। यह आगे से बर्दाश्त नहीं होगा।

‘रोकने का आदेश डीएम का’
भीड़ को कलक्ट्रेट में घुसने नहीं देने का आदेश डीएम का है। इसका पालन कराना पुलिस का काम है। यह बात खुद का बचाव करते हुए पुलिस अफसरों ने किसानों से कहीं।


इसपर किसानों को गुस्सा आ गया। किसानों ने कहा कि डीएम को आम आदमी की समस्या सुननी चाहिए। पुलिस डीएम के नाम का गलत इस्तेमाल कर रही है।

हमारी नाराजगी सरकार के साथ डीएम से भी है। किसानों को अंदर नहीं जाने दिया। किसान डीएम के सामने दुखड़ा रोना चाहते थे। बाद में 11 लोगों को ज्ञापन सौंपने के लिए डीएम के पास जाने दिया गया।- राजीव चौधरी, जिलाध्यक्ष रालोद
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed