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मरम्मत के लिए ठेकेदार ने लिया ट्रांसफार्मर, नहीं लौटाया
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मरम्मत के लिए ठेकेदार ने लिया ट्रांसफार्मर, नहीं लौटाया
बुलंदशहर। मरम्मत के लिए ट्रांसफार्मर लेने के तीन माह बाद भी ठेकेदार ने बिजली निगम को वापस नहीं किया। अब बिजली निगम की ओर से आरोपी ठेकेदार के खिलाफ नगर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
बिजली निगम के स्टोर कर्मचारी ललित कुमार तोमर ने बताया कि बिजली निगम के फुंके हुए ट्रांसफार्मरों की मरम्मत आगरा के सिकंदरा क्षेत्र की मैसर्स टेक्नो कैंट नामक फर्म कार्य करती थी। करीब तीन माह पहले फर्म को दस और पांच एमवीए (मेगा वोल्ट एंपियर) के एक-एक ट्रांसफार्मर मरम्मत के लिए दिए थे। ट्रांसफार्मर की लागत करीब एक करोड़ रुपये है। नियमानुसार कंपनी को ट्रांसफार्मरों की मरम्मत कराते हुए शीघ्र वापस करना था, लेकिन कंपनी ने ऐसा नहीं किया। कई बार ठेकेदार को ट्रांसफार्मर वापस करने के लिए कहा गया, लेकिन आरोपी ने ऐसा नहीं किया। इसके चलते बिजली निगम को परेशानी के साथ ही आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ा है। नगर कोतवाली में कंपनी के मालिक और डायरेक्टर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है।
दोनों ट्रांसफार्मर से चार हजार उपभोक्ताओं को मिल सकती है सप्लाई
15एमवीए के दो ट्रांसफार्मरों से करीब चार हजार उपभोक्ताओं को बिजली सप्लाई दी जाती है। बिजलीघर पर लगाए जाने वाले इन ट्रांसफार्मरों के स्थान पर अधिकारियों ने अन्य ट्रांसफार्मर लगाए हैं, लेकिन ट्रांसफार्मर उपलब्ध न होने की स्थिति में करीब चार हजार उपभोक्ताओं को परेशानी हो सकती है।
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ट्रांसफार्मर फुंकने के बाद मरम्मत कराने के लिए ठेकेदार को दिया था। नियमानुसार अधिकतम एक माह में मरम्मत के बाद ट्रांसफार्मर वापस आने चाहिए थे। कई बार कहने के बाद जब ट्रांसफार्मर नहीं दिए गए तो आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। - अनिल कुमार गुप्ता, एई, स्टोर, बिजली निगम
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बुलंदशहर। मरम्मत के लिए ट्रांसफार्मर लेने के तीन माह बाद भी ठेकेदार ने बिजली निगम को वापस नहीं किया। अब बिजली निगम की ओर से आरोपी ठेकेदार के खिलाफ नगर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
बिजली निगम के स्टोर कर्मचारी ललित कुमार तोमर ने बताया कि बिजली निगम के फुंके हुए ट्रांसफार्मरों की मरम्मत आगरा के सिकंदरा क्षेत्र की मैसर्स टेक्नो कैंट नामक फर्म कार्य करती थी। करीब तीन माह पहले फर्म को दस और पांच एमवीए (मेगा वोल्ट एंपियर) के एक-एक ट्रांसफार्मर मरम्मत के लिए दिए थे। ट्रांसफार्मर की लागत करीब एक करोड़ रुपये है। नियमानुसार कंपनी को ट्रांसफार्मरों की मरम्मत कराते हुए शीघ्र वापस करना था, लेकिन कंपनी ने ऐसा नहीं किया। कई बार ठेकेदार को ट्रांसफार्मर वापस करने के लिए कहा गया, लेकिन आरोपी ने ऐसा नहीं किया। इसके चलते बिजली निगम को परेशानी के साथ ही आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ा है। नगर कोतवाली में कंपनी के मालिक और डायरेक्टर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है।
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दोनों ट्रांसफार्मर से चार हजार उपभोक्ताओं को मिल सकती है सप्लाई
15एमवीए के दो ट्रांसफार्मरों से करीब चार हजार उपभोक्ताओं को बिजली सप्लाई दी जाती है। बिजलीघर पर लगाए जाने वाले इन ट्रांसफार्मरों के स्थान पर अधिकारियों ने अन्य ट्रांसफार्मर लगाए हैं, लेकिन ट्रांसफार्मर उपलब्ध न होने की स्थिति में करीब चार हजार उपभोक्ताओं को परेशानी हो सकती है।
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ट्रांसफार्मर फुंकने के बाद मरम्मत कराने के लिए ठेकेदार को दिया था। नियमानुसार अधिकतम एक माह में मरम्मत के बाद ट्रांसफार्मर वापस आने चाहिए थे। कई बार कहने के बाद जब ट्रांसफार्मर नहीं दिए गए तो आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। - अनिल कुमार गुप्ता, एई, स्टोर, बिजली निगम