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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bulandshahar News ›   Even after jumping over the prison wall, the car servants reached there to service the car.

Bulandshahar News: जेल की दीवार कूदकर भी कार सेवा के लिए पहुंचे थे कार सेवक

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 16 Jan 2024 10:45 PM IST
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शिकारपुर। कार सेवा का जज्बा लेकर घर से निकले कार सेवकों को जेल की सलाखें भी नहीं रोक पाईं थीं। नगर के मोती चौक निवासी राकेश कुमार सिंघल अपने साथ नगर निवासी लोकेश शर्मा, अपने भाई के साले औरंगाबाद निवासी जय भगवान के साथ कार सेवा के लिए निकले, लेकिन लखनऊ स्टेशन पर उतरने के बाद जब वह पैदल गोंडा पहुंचे तो पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद उन्हें एक अस्थाई जेल में बंद रखा गया था, लेकिन दो दिन बाद ही वह जेल की दीवार कूदकर फरार हो गए थे। बाद में सरयू नदी के किनारे चलते हुए वह अयोध्या पहुंचे थे। बताया कि अयोध्या में लाखों राम भक्तों की भीड़ देखकर उनका हौसला और बढ़ा। राकेश कुमार ने बताया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह हेलीकॉप्टर से निरीक्षण कर रहे थे और घोड़ों पर सवार पुलिस के जवान लगातार कार सेवकों को अयोध्या जाने से रोक रहे थे, लेकिन कार सेवकों के हौसलों के आगे पुलिस की एक न चली। बताया कि अयोध्या में विवादित ढांचा गिराने के बाद जब पुलिस ने कार सेवकों पर गोली चलाई तो उन्होंने एक कुम्हार की दुकान में छिपकर अपनी जान बचाई थी। पुलिस की कार्रवाई के बाद वह अपने साथियों से बिछड़ गए थे और फिर घर लौटने के बाद ही मुलाकात हुई।
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कोई न पहचाने, इसलिए अलग-अलग कोच में किया सफर
नगर निवासी नरेश सिंघल, जयप्रकाश बजाज, खंडवाया निवासी विजय शंकर शर्मा व हरसरन दास मिश्रा, अशोक कुमार मित्तल लोहे वाले, गजेंद्र सिंह फतेहपुर कार सेवा के लिए घर से निकले, लेकिन पुलिस के पहरे के कारण काफी परेशानी हुई। जब खुर्जा जंक्शन से लखनऊ के लिए ट्रेन में बैठे तो कोई पुलिसकर्मी उन्हें पहचान न ले, इसके लिए सभी अलग-अलग कोच में सवार हुए थे। जब लखनऊ स्टेशन पर ट्रेन से उतरे और अयोध्या की ओर जाने का प्रयास किया तो पुलिसकर्मियों के पहरे के कारण वह 15 दिन तक आसपास के गांवों में ही ठहरे थे। अयोध्या न जाने का दिल में मलाल था, लेकिन अब राम काज की घोषणा से उनके चेहरे पर खुशी है। बताया कि मामला शांत होने पर कार्तिक गंगा स्नान के दिन लखनऊ से घर लौटे थे।
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