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इंजीनियर्स डे विशेष: जिगर-जॉली से रोलर हेड तक, इंजीनियरिंग ने बदल दी खुर्जा के पॉटरी उद्योग की तस्वीर

Tue, 15 Sep 2026 07:52 AM IST
Vijay Singh Pundir अवनीश, बुलंदशहर
अवनीश, बुलंदशहर Published by: Vijay Singh Pundir Updated Tue, 15 Sep 2026 07:52 AM IST
सार

करीब 400 इकाइयों और सालाना करीब 100 करोड़ रुपये के कारोबार वाले इस उद्योग में कभी चाक पर हाथ से तैयार होने वाले उत्पाद अब आधुनिक मशीनों की मदद से तैयार हो रहे हैं।

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Engineering has transformed the face of Khurja's pottery industry
खुर्जा में मशीनों ने बदला पॉटरी निर्माण का तरीका - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मशीन और तकनीक ने काम को आसान, तेज और बेहतर बना दिया है। इसका श्रेय इंजीनियरों को जाता है। इंजीनियरिंग के इस योगदान की तस्वीर खुर्जा के पॉटरी उद्योग में भी साफ दिखाई देती है। जिगर जॉली से लेकर रोलर हेड और टनल भट्ठी तक तकनीक ने उत्पादन की प्रक्रिया बदल दी है। करीब 400 इकाइयों और सालाना करीब 100 करोड़ रुपये के कारोबार वाले इस उद्योग में कभी चाक पर हाथ से तैयार होने वाले उत्पाद अब आधुनिक मशीनों की मदद से तैयार हो रहे हैं।

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पॉटरी उद्योग से जुड़े निखिल पोद्दार बताते हैं कि खुर्जा में पॉटरी का काम मुगलकाल से जुड़ा माना जाता है। पहले कुम्हार चाक पर हाथों से मिट्टी को आकार देकर उत्पाद तैयार करते थे। करीब वर्ष 1962 में खुर्जा में जिगर जॉली मशीन आई। इससे उत्पादों को एक समान आकार देने में मदद मिली।

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निखिल बताते हैं कि बीते पांच वर्षों में पॉटरी उद्योग में मशीनों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। मैन्युफैक्चरिंग यूनिट संचालक जोनू चौहान बताते हैं कि पहले मिट्टी तैयार करने का काम कारीगर हाथों से करते थे। अब पग मिल, वॉल मिल और फिल्टर प्रेस जैसी मशीनों की मदद से मिट्टी तैयार की जाती है।

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पॉटरी कारोबारी निखिल बताते हैं कि काम आसान होने के बाद उद्योग में गुणवत्ता पर भी अधिक ध्यान दिया जाने लगा है। पहले खुर्जा के पॉटरी उत्पादों को गुणवत्ता के मामले में कमतर आंका जाता था। अब यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर की गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। मशीनों से उत्पादन में लगने वाला समय भी कम हुआ है। पहले जिस उत्पाद को तैयार करने में करीब 12 घंटे लगते थे, अब करीब तीन घंटे में तैयार हो रहा है।

मशीन से बाजारों तक पहुंची इंजीनियरिंग
तकनीक का असर पॉटरी की डिजाइनिंग और बिक्री पर भी दिखाई दे रहा है। कंप्यूटर आधारित डिजाइनिंग और उडी तकनीक से नए उत्पादों के डिजाइन तैयार किए जा रहे हैं। पॉटरी एसोसिएशन की ओर से 3डी मशीन भी लगाई गई है। इसके जरिए डिजाइन के सैंपल तैयार कर कंपनियों को दिखाए जाते हैं। वहीं, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए खुर्जा के पॉटरी उत्पाद देश के अलग-अलग हिस्सों के ग्राहकों तक पहुंच रहे हैं। खुर्जा निवासी निशांत बताते हैं कि वह पॉटरी उद्योग से कप सेट और अन्य सिरेमिक उत्पाद खरीदकर ऑनलाइन बेचते हैं। उनके अनुसार ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से घर बैठे नए ग्राहकों तक पहुंचना आसान हुआ है। इस तरह मैकेनिकल इंजीनियरिंग से मशीनों और उत्पादन प्रक्रिया में बदलाव आया, तो कंप्यूटर और सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग ने डिजाइनिंग और नए उत्पाद तैयार करने के तरीके को बदला।

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