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Bulandshahar News: जिले में डेंगू हो रहा बेकाबू, 16 केस और मिले, 442 पहुंचा आंकड़ा
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बुलंदशहर। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की लचर व्यवस्था और सुस्त कार्यप्रणाली के चलते जिले में डेंगू बुखार का असर कम होता नहीं दिख रहा है। सोमवार को जिले में 16 और डेंगू संक्रमित रोगी मिले हैं। इसके अलावा जिलेभर में बुखार का प्रकोप बना हुआ है। जिला अस्पताल की ओपीडी में डेंगू और मलेरिया जैसे लक्षण वाले रोगी मिलने पर संबंधित का सैंपल लेकर जांच कराई गई। स्वास्थ्य अफसरों का कहना है कि लक्षण वाले लोगों की जांच कराने पर डेंगू बुखार की पुष्टि हुई है।
जिले में डेंगू के मरीज लगातार मिल रहे हैं। इसके बावजूद निकाय और ग्राम पंचायत फॉगिंग व एंटी लार्वा छिड़काव पर ध्यान नहीं दे रहे। वहीं, निजी व सरकारी अस्पतालों में लोगों को बेड न मिलने पर झोलाछाप से इलाज करवाना पड़ रहा है। संचारी और दस्तक अभियान सिर्फ नाम तक सीमित रह गया। यह स्थिति तब है जब जिले में बुखार से लोगों की लगातार मौत हो रही है और निजी अस्पताल में बुखार के मरीजों को डेंगू बुखार बताकर भर्ती किया जा रहा है। सोमवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की भीड़ रही। ओपीडी में 381 बुखार से पीड़ित उपचार कराने पहुंचे। इसमें 86 मलेरिया, 138 टायफाइड व 68 डेंगू लक्षण वाले रहे। इनकी जांच कराने पर 70 लोगों में टायफाइड की और पांच में एनएस-1 किट से डेंगू की पुष्टि हुई। एनएस-1 किट से पॉजिटिव वाले करीब 90 लोगों की जांच कराने पर 16 लोगों में डेंगू बुखार की पुष्टि हुई है। ये सभी अस्पताल में भर्ती हैं और अपना उपचार करवा रहे हैं। वर्तमान में जिले में डेंगू का आंकड़ा 442 पर पहुंच गया है। इनमें छह लोगों की मौत हो चुकी है तो 400 के करीब स्वस्थ्य हो चुके हैं।
डेंगू नियंत्रण को लेकर बरती जा रही लापरवाही
आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. संजीव अग्रवाल ने बताया कि जिले में डेंगू नियंत्रण को लेकर लापरवाही बरती जा रही है। डेंगू पर नियंत्रण को पूरी तरह प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग निष्क्रिय है। इसके चलते निजी चिकित्सालयों में डेंगू मरीजों की भरमार है। इसके रोकने के लिए ठोस उपाय जल्द से जल्द होने चाहिए। डेंगू से जिले में हजारों लोगों की मौत हो चुकी है, इस पर प्रशासन मौन है। लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
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स्क्रब टायफस के बढ़ रहे रोगी, छह में हो चुकी पुष्टि
जिले में डेंगू और वायरल बुखार के साथ-साथ स्क्रब टायफस के रोगी भी मिलने लगे हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े में अब तक जिले में छह लोगों में स्क्रब टायफस की पुष्टि हो चुकी है। सर्विलांस अधिकारी डॉ. रमित कुमार ने बताया कि स्क्रब टायफस होने पर ठंड लग कर बुखार आता है और शरीर पर लाल निशान पड़ जाते हैं। अगर लोगों में इस तरह के लक्षण है तो जांच जरूर जांच कराएं। ये बीमारी कीड़ों या पिस्सू के काटने से होती है।
डेंगू के मरीजों की संख्या शुरुआत की अपेक्षा घट रही है। आने वाले दिनों में डेंगू खत्म हो जाएगा। बुखार को लेकर दवाएं व जांच उपलब्ध हैं। लोगों को झोलाछाप से इलाज न कराने को जागरूक किया जा रहा है। बचाव को लेकर गांव में लगातार शिविर लगाए जा रहे हैं। - डॉ. विनय कुमार सिंह, सीएमओ
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जिले में डेंगू के मरीज लगातार मिल रहे हैं। इसके बावजूद निकाय और ग्राम पंचायत फॉगिंग व एंटी लार्वा छिड़काव पर ध्यान नहीं दे रहे। वहीं, निजी व सरकारी अस्पतालों में लोगों को बेड न मिलने पर झोलाछाप से इलाज करवाना पड़ रहा है। संचारी और दस्तक अभियान सिर्फ नाम तक सीमित रह गया। यह स्थिति तब है जब जिले में बुखार से लोगों की लगातार मौत हो रही है और निजी अस्पताल में बुखार के मरीजों को डेंगू बुखार बताकर भर्ती किया जा रहा है। सोमवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की भीड़ रही। ओपीडी में 381 बुखार से पीड़ित उपचार कराने पहुंचे। इसमें 86 मलेरिया, 138 टायफाइड व 68 डेंगू लक्षण वाले रहे। इनकी जांच कराने पर 70 लोगों में टायफाइड की और पांच में एनएस-1 किट से डेंगू की पुष्टि हुई। एनएस-1 किट से पॉजिटिव वाले करीब 90 लोगों की जांच कराने पर 16 लोगों में डेंगू बुखार की पुष्टि हुई है। ये सभी अस्पताल में भर्ती हैं और अपना उपचार करवा रहे हैं। वर्तमान में जिले में डेंगू का आंकड़ा 442 पर पहुंच गया है। इनमें छह लोगों की मौत हो चुकी है तो 400 के करीब स्वस्थ्य हो चुके हैं।
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डेंगू नियंत्रण को लेकर बरती जा रही लापरवाही
आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. संजीव अग्रवाल ने बताया कि जिले में डेंगू नियंत्रण को लेकर लापरवाही बरती जा रही है। डेंगू पर नियंत्रण को पूरी तरह प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग निष्क्रिय है। इसके चलते निजी चिकित्सालयों में डेंगू मरीजों की भरमार है। इसके रोकने के लिए ठोस उपाय जल्द से जल्द होने चाहिए। डेंगू से जिले में हजारों लोगों की मौत हो चुकी है, इस पर प्रशासन मौन है। लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
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स्क्रब टायफस के बढ़ रहे रोगी, छह में हो चुकी पुष्टि
जिले में डेंगू और वायरल बुखार के साथ-साथ स्क्रब टायफस के रोगी भी मिलने लगे हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े में अब तक जिले में छह लोगों में स्क्रब टायफस की पुष्टि हो चुकी है। सर्विलांस अधिकारी डॉ. रमित कुमार ने बताया कि स्क्रब टायफस होने पर ठंड लग कर बुखार आता है और शरीर पर लाल निशान पड़ जाते हैं। अगर लोगों में इस तरह के लक्षण है तो जांच जरूर जांच कराएं। ये बीमारी कीड़ों या पिस्सू के काटने से होती है।
डेंगू के मरीजों की संख्या शुरुआत की अपेक्षा घट रही है। आने वाले दिनों में डेंगू खत्म हो जाएगा। बुखार को लेकर दवाएं व जांच उपलब्ध हैं। लोगों को झोलाछाप से इलाज न कराने को जागरूक किया जा रहा है। बचाव को लेकर गांव में लगातार शिविर लगाए जा रहे हैं। - डॉ. विनय कुमार सिंह, सीएमओ