{"_id":"57990a134f1c1b385e21e0a1","slug":"vilagers-forcefully-taken-deadbody-of-jatin-from-police","type":"story","status":"publish","title_hn":"पुलिस से जतन का शव छीनकर ले गए थे ग्रामीण","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
पुलिस से जतन का शव छीनकर ले गए थे ग्रामीण
अमर उजाला ब्यूरो, बुलंदशहर
Updated Thu, 28 Jul 2016 12:53 AM IST
विज्ञापन
भगदड़
कुख्यात बदमाश जतन सिरोही के एनकाउंटर ने जिले के हालात बिगाड़ दिए थे। जतन के एनकाउंटर की खबर आग की तरह जिले में फैल गई। इसके बाद जो हुआ वह पुलिस के काबू से भी बाहर था। जतन समर्थकों ने शहर को कई घंटों तक थाम दिया।
जमकर तोड़फोड़ मचाई। बड़ी संख्या में मौजूद पुलिस फोर्स से जतन का शव छीनकर ले गए। ग्रामीणों को काबू में करने के लिए पुलिस को हवाई फायरिंग और आंसू गैस के गोले तक दागने पड़े। पूरा शहर और जतन सिरोही के गांव को छाबनी में तब्दील कर दिया गया।
पुलिस मुठभेड़ में जतन सिरोही की मौत के बाद उसके समर्थकों का आक्रोश सड़क पर देखने को मिला। एनकाउंटर की खबर लगते ही सैकड़ों ग्रामीण रात में ही बुलंदशहर आ धमके। जतन समर्थक उसके शव को लेने के लिए जिला अस्पताल पहुंच गए, लेकिन पुलिस ने शव देने से इंकार कर दिया। इसके बाद तो जैसे तूफान आ गया हो। जतन समर्थकों ने जिला अस्पताल में तोड़फोड़ मचानी शुरू कर दी। ग्रामीणों का आक्रोश देख पुलिस मूकदर्शक में बनी रही।
विज्ञापन
अगले दिन सुबह तक जतन का शव नहीं मिलने पर ग्रामीणों ने सड़क पर जाम लगा दिया। देर शाम तक भी पुलिस फोर्स जाम नहीं खुलवा सकी तो पीएसी को बुलाया गया। पीएसी ने जैसे ही ग्रामीणों को उठाने का प्रयास किया तो सड़क पर संग्राम मच गया। ग्रामीणों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। पीएसी के लाठी चार्ज करते ही स्थिति बिगड़ गई। दर्जनों ग्रामीण गंभीर रूप से जख्मी हुए। इसके बावजूद ग्रामीणों ने मोर्चा नहीं छोड़ा।
जब भीड़ पीछे नहीं हटी तो पीएसी ने हवाई फायरिंग शुरू कर दी। आंसू गैस के गोले दागे गए , लेकिन इसके बावजूद ग्रामीणों का आक्रोश कम नहीं हुआ। ग्रामीण पुलिस कस्टडी से ही जतन सिरोही का शव खींचकर ले गए और अंतिम संस्कार कर दिया।
जतन-सेंसर के गैंगवार से थर्राता था बुलंदशहर
जतन सिरोही और सेंसरपाल का नाम लेते ही जेहन में खूनी गैंगवार आ जाता है। जतन और सेंसर के बीच गैंगवार ऐसा चला कि जनपद थर्रा उठा था। एक के बाद एक दोनों तरफ से हत्या का सिलसिला शुरू हुआ, जो दोनों की मौत के बाद ही थम सका। 16 साल लंबे खूनी सफर में 32 लोगों की हत्या हुई।
बहुचर्चित जतन सिरोही-सेंसरपाल के खूनी गैंगवार का सफर काफी लंबा रहा है। वर्ष 1993 से शुरू हुआ खूनी गैंगवार 2008 में पहले सेंसरपाल और फिर जतन सिरोही की मौत के बाद ही थम सका। जतन सिरोही के एनकाउंटर से कुछ दिन पहले ही सेंसरपाल की मौत हार्टअटैक से हुई थी, हालांकि सेंसरपाल की मौत पर भी कई सवाल उठे थे।
16 साल लंबे चले खूनी सफर में जतन सिरोही और सेंसरपाल की तरफ से कुल 32 हत्याएं हुई। एक के बाद एक दोनों तरफ से लोगों की जान जाती चली गई। बताते हैं कि जतन सिरोही का आतंक इस कदर था कि वह जेल में बैठे-बैठे विरोधियों को जान से मरवा देता था।
जतन ने जब अपने भाई की मौत का बदला लिया तो नौ लोगों को मौत के घाट उतारा था। बड़े-बड़े अपराधी जेल में जतन की सेवा करते थे। बताया जाता था कि जेल में जतन की हुकूमत चलती थी। उसके परिजनों ने उस वक्त दावा किया था कि पुलिस द्वारा किया गया एनकाउंटर राजनीतिक दबाव के चलते किया गया है। जतन के एनकाउंटर से करीब सात-आठ पहले ही प्रदेश में सरकार बदली थी।
विज्ञापन
जमकर तोड़फोड़ मचाई। बड़ी संख्या में मौजूद पुलिस फोर्स से जतन का शव छीनकर ले गए। ग्रामीणों को काबू में करने के लिए पुलिस को हवाई फायरिंग और आंसू गैस के गोले तक दागने पड़े। पूरा शहर और जतन सिरोही के गांव को छाबनी में तब्दील कर दिया गया।
विज्ञापन
पुलिस मुठभेड़ में जतन सिरोही की मौत के बाद उसके समर्थकों का आक्रोश सड़क पर देखने को मिला। एनकाउंटर की खबर लगते ही सैकड़ों ग्रामीण रात में ही बुलंदशहर आ धमके। जतन समर्थक उसके शव को लेने के लिए जिला अस्पताल पहुंच गए, लेकिन पुलिस ने शव देने से इंकार कर दिया। इसके बाद तो जैसे तूफान आ गया हो। जतन समर्थकों ने जिला अस्पताल में तोड़फोड़ मचानी शुरू कर दी। ग्रामीणों का आक्रोश देख पुलिस मूकदर्शक में बनी रही।
विज्ञापन
अगले दिन सुबह तक जतन का शव नहीं मिलने पर ग्रामीणों ने सड़क पर जाम लगा दिया। देर शाम तक भी पुलिस फोर्स जाम नहीं खुलवा सकी तो पीएसी को बुलाया गया। पीएसी ने जैसे ही ग्रामीणों को उठाने का प्रयास किया तो सड़क पर संग्राम मच गया। ग्रामीणों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। पीएसी के लाठी चार्ज करते ही स्थिति बिगड़ गई। दर्जनों ग्रामीण गंभीर रूप से जख्मी हुए। इसके बावजूद ग्रामीणों ने मोर्चा नहीं छोड़ा।
जब भीड़ पीछे नहीं हटी तो पीएसी ने हवाई फायरिंग शुरू कर दी। आंसू गैस के गोले दागे गए , लेकिन इसके बावजूद ग्रामीणों का आक्रोश कम नहीं हुआ। ग्रामीण पुलिस कस्टडी से ही जतन सिरोही का शव खींचकर ले गए और अंतिम संस्कार कर दिया।
जतन-सेंसर के गैंगवार से थर्राता था बुलंदशहर
जतन सिरोही और सेंसरपाल का नाम लेते ही जेहन में खूनी गैंगवार आ जाता है। जतन और सेंसर के बीच गैंगवार ऐसा चला कि जनपद थर्रा उठा था। एक के बाद एक दोनों तरफ से हत्या का सिलसिला शुरू हुआ, जो दोनों की मौत के बाद ही थम सका। 16 साल लंबे खूनी सफर में 32 लोगों की हत्या हुई।
बहुचर्चित जतन सिरोही-सेंसरपाल के खूनी गैंगवार का सफर काफी लंबा रहा है। वर्ष 1993 से शुरू हुआ खूनी गैंगवार 2008 में पहले सेंसरपाल और फिर जतन सिरोही की मौत के बाद ही थम सका। जतन सिरोही के एनकाउंटर से कुछ दिन पहले ही सेंसरपाल की मौत हार्टअटैक से हुई थी, हालांकि सेंसरपाल की मौत पर भी कई सवाल उठे थे।
16 साल लंबे चले खूनी सफर में जतन सिरोही और सेंसरपाल की तरफ से कुल 32 हत्याएं हुई। एक के बाद एक दोनों तरफ से लोगों की जान जाती चली गई। बताते हैं कि जतन सिरोही का आतंक इस कदर था कि वह जेल में बैठे-बैठे विरोधियों को जान से मरवा देता था।
जतन ने जब अपने भाई की मौत का बदला लिया तो नौ लोगों को मौत के घाट उतारा था। बड़े-बड़े अपराधी जेल में जतन की सेवा करते थे। बताया जाता था कि जेल में जतन की हुकूमत चलती थी। उसके परिजनों ने उस वक्त दावा किया था कि पुलिस द्वारा किया गया एनकाउंटर राजनीतिक दबाव के चलते किया गया है। जतन के एनकाउंटर से करीब सात-आठ पहले ही प्रदेश में सरकार बदली थी।