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अब एक करोड़ के कफ सीरप पकड़े
अमर उजाला ब्यूरो/बुलंदशहर
Updated Fri, 29 Jul 2016 11:37 PM IST
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खांसी की दवा
- फोटो : ब्यूरो
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अवैध दवाओं के काले खेल को रोकने के लिए शुक्रवार को दिनभर जनपद में छापेमारी होती रही। सेल्स टैक्स अफसरों ने जहां ट्रांसपोर्टरों और दवा व्यापारियों के ठिकानों पर छापेमारी की तो ड्रग विभाग ने मेडिसिन मार्केट में खोजबीन की।
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सूत्रों के अनुसार कफ सीरप की बड़ी खेप ट्रांसपोर्टर के यहां से पकड़ी गई हैं, जिसकी कीमत 80 लाख से एक करोड़ तक आंकी जा रही है। हालांकि, अफसर जांच पूरी होने तक कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। अमेरिका की एक नामी कंपनी की अवैध सप्लाई के तार बुलंदशहर समेत गाजियाबाद, हापुड़, आगरा, बांग्लादेश और बिहार से जुड़ रहे हैं।
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नशे के लिए इस दवा की सप्लाई शराबबंदी मुल्क बांग्लादेश और बिहार राज्य में की जा रही थी। एमआरपी से दोगुने दाम पर यह दवा सप्लाई हो रही थी। बता दें कि बृहस्पतिवार को
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50 लाख की कफ सीरप की खेप पकड़े जाने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
शुक्रवार को नगर के एक ट्रांसपोर्टर के ठिकानों पर छापेमारी की गई। विभाग के एक अफसर ने बताया कि ट्रांसपोर्टर के यहां से इस दवा का बड़ा जखीरा पकड़ा गया है। नशे के लिए उपयोग हो रही इस दवा का जखीरा पकड़े गए माल से कहीं ज्यादा बताया गया है। अनुमान है कि करीब 80 लाख से एक करोड़ के बीच इसकी कीमत हो सकती है।
इसके अलावा कई दवा और अन्य व्यापारियों के ठिकानों पर भी छापेमारी की गई है। बताया गया कि छापेमारी के दौरान कई व्यापारी भाग खड़े हुए। पूरे मामले की व्यापक स्तर पर जांच चल रही है। अवैध दवा की इतनी बड़ी खेप पकड़े जाने के बाद ड्रग इंस्पेक्टर ने नगर के मेडिसन मार्केट की जांच की।
ड्रग इस्पेक्टर नरेश मोहन दीपक ने बताया कि मार्केट में यह दवा इतनी मात्रा में नहीं है, जितनी मात्रा में पकड़ी गई है। दवा के इस काले कारोबार के लिए नई ट्रांसपोर्ट तक बना दी गई है। वाणिज्य कर विभाग की जांच में पता चला है कि नगर के करीब एक दर्जन दवा और प्रमुख कारोबारियों ने नई ट्रांसपोर्ट कंपनी तक बना डाली।
वाणिज्य कर विभाग ने सूचना नहीं दी, जबकि नियमानुसार कोई भी दवा पकड़े जाने पर ड्रग विभाग को सूचना दी जाती है। वाणिज्य कर अफसरों ने बिना एनओसी के दवा को छोड़ दिया, जो गलत है। इस दवा का दुरुपयोग हो रहा है। - नरेश मोहन दीपक, ड्रग इंस्पेक्टर
अभी जांच चल रही है। शुक्रवार को ट्रांसपोर्टर के ठिकानों पर छापेमारी की गई। कुछ अहम दस्तावेज पकड़े गए हैं। जब तक पूरे मामले की जांच नहीं हो जाती, तब तक कुछ भी कह पाना संभव नहीं है। - आरडी प्रसाद, ज्वाइंट कमिश्नर, वाणिज्य कर विभाग