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स्कूल की भूमि पर जलाई चिता, तनाव
बुलंदशहर, अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 14 Feb 2016 11:57 PM IST
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गांव में आठ साल पहले श्मशान की भूमि पर बनाए गए स्कूल पर पर ग्रामीणों के चिता जलाने से गांव में तनाव फैल गया। ग्रामीणों का कहना है कि अब इस स्कूल में बच्चों को नहीं भेजेंगे।
शिकायत के बाद भी पुलिस तथा शिक्षा विभाग बात को अनसुना करने में लगा है।
गांव की वृद्धा प्रकाशो देवी का निधन होने पर रविवार सुबह उनके अंतिम संस्कार के लिए परिजनों ने स्कूल की भूमि पर अंतिम संस्कार करने की इच्छा जताई।
इसपर ग्रामीणों ने स्कूल होने की दुहाई देकर ऐसा नहीं करने के लिए समझाया लेकिन परिजन नहीं माने। ग्रामीणों ने शिकायत की तो अधिकारियों ने सोमवार को कार्रवाई की बात कहीं।
ग्राम प्रधान देवन सिंह ने बताया कि यह स्कूल गांव के शमशान भूमि पर बना है। फिर किसी को वहां अंतिम संस्कार करने से कैसे रोका जा सकता है। पूर्व प्रधान किशोर सिंह ने बताया कि गांव के तीन बीघा श्मशान भूमि पर स्कूल बनाने का निर्णय पंचायत की बैठक में लिया गया था।
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शमशान के लिए हडवार की भूमि का चयन किया गया था। अब तक अंतिम संस्कार वहंी किए जाते रहे हैं। वर्ष 2008 में इस भूिम पर स्कूल बना दिया गया।
स्कूल के प्रधानाध्यापक गुलशन कुमार ने बताया कि पांच वर्षों से यहां कार्यरत हूं। इस दौरान स्कूल की भूमि पर कोई अंतिम संस्कार नहीं हुआ है।
श्मशान भूमि पर स्कूल बना होने तथा 2009 में स्कूल में अध्यापक बीर सिंह की मृत्यु हो जाने से अभिभावक बच्चों को यहां भेजना पसंद नहीं करते हैं।
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शिकायत के बाद भी पुलिस तथा शिक्षा विभाग बात को अनसुना करने में लगा है।
गांव की वृद्धा प्रकाशो देवी का निधन होने पर रविवार सुबह उनके अंतिम संस्कार के लिए परिजनों ने स्कूल की भूमि पर अंतिम संस्कार करने की इच्छा जताई।
इसपर ग्रामीणों ने स्कूल होने की दुहाई देकर ऐसा नहीं करने के लिए समझाया लेकिन परिजन नहीं माने। ग्रामीणों ने शिकायत की तो अधिकारियों ने सोमवार को कार्रवाई की बात कहीं।
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ग्राम प्रधान देवन सिंह ने बताया कि यह स्कूल गांव के शमशान भूमि पर बना है। फिर किसी को वहां अंतिम संस्कार करने से कैसे रोका जा सकता है। पूर्व प्रधान किशोर सिंह ने बताया कि गांव के तीन बीघा श्मशान भूमि पर स्कूल बनाने का निर्णय पंचायत की बैठक में लिया गया था।
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शमशान के लिए हडवार की भूमि का चयन किया गया था। अब तक अंतिम संस्कार वहंी किए जाते रहे हैं। वर्ष 2008 में इस भूिम पर स्कूल बना दिया गया।
स्कूल के प्रधानाध्यापक गुलशन कुमार ने बताया कि पांच वर्षों से यहां कार्यरत हूं। इस दौरान स्कूल की भूमि पर कोई अंतिम संस्कार नहीं हुआ है।
श्मशान भूमि पर स्कूल बना होने तथा 2009 में स्कूल में अध्यापक बीर सिंह की मृत्यु हो जाने से अभिभावक बच्चों को यहां भेजना पसंद नहीं करते हैं।